अलीगढ़ में दो झोलाछाप संचालकों पर FIR:बिना पंजीकरण और डिग्री के चला रहे थे क्लीनिक, स्वास्थ्य विभाग के निरीक्षण में नहीं मिले वैध दस्तावेज

Oct 09, 2026 - 18:17
0
अलीगढ़ में दो झोलाछाप संचालकों पर FIR:बिना पंजीकरण और डिग्री के चला रहे थे क्लीनिक, स्वास्थ्य विभाग के निरीक्षण में नहीं मिले वैध दस्तावेज
जिले में बिना पंजीकरण और चिकित्सीय शैक्षिक योग्यता के क्लीनिक संचालित करने के आरोप में स्वास्थ्य विभाग की शिकायत पर हरदुआगंज पुलिस ने दो संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इनमें भटौला-हरदुआगंज रोड स्थित जलाली के डॉ. खुर्जावाले क्लीनिक के संचालक बैंकर सिंह और जलाली मोड़ स्थित अपना मेडिसन हाउस के संचालक भीष्मपाल सिंह शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग के निरीक्षण में दोनों प्रतिष्ठानों के पंजीकरण और चिकित्सीय योग्यता से संबंधित दस्तावेज नहीं मिले थे। निर्धारित समय देने के बावजूद संचालकों ने मांगे गए अभिलेख विभाग में उपलब्ध नहीं कराए। 18 अगस्त को हुआ था निरीक्षण चिकित्सा अधीक्षक एवं झोलाछाप के नोडल अधिकारी डॉ. प्रवेंद्र कुमार की ओर से पुलिस को भेजे गए पत्रों के मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 18 अगस्त 2026 को दोनों क्लीनिकों का स्थलीय निरीक्षण किया था। इस दौरान संचालकों को क्लीनिक के पंजीकरण और चिकित्सीय शैक्षिक योग्यता समेत जरूरी दस्तावेज 20 अगस्त तक कार्यालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही, दस्तावेजों की वैधता स्पष्ट होने तक दोनों प्रतिष्ठानों का संचालन बंद रखने को कहा गया था। 24 अगस्त तक नहीं दिए दस्तावेज स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद भी 24 अगस्त तक दोनों संचालकों ने जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। विभाग ने इसे बिना वैध पंजीकरण और चिकित्सीय योग्यता के क्लीनिक संचालन का मामला मानते हुए आमजन के स्वास्थ्य और सुरक्षा के मद्देनजर कानूनी कार्रवाई की संस्तुति की। दोनों प्रतिष्ठानों को बंद कराने या सील करने और संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए पुलिस से अनुरोध किया गया था। BNS की धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा हरदुआगंज पुलिस ने शुक्रवार को दोनों मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 319(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। एफआईआर में संबंधित क्लीनिक संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। मामलों की विवेचना उपनिरीक्षक आदेश कुमार को सौंपी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने अपनी शिकायत में कहा है कि बिना पंजीकरण और चिकित्सीय शैक्षिक योग्यता के चिकित्सा कार्य करने वालों पर नियंत्रण के लिए कार्रवाई जरूरी है। हालांकि, एफआईआर दर्ज होने के आधार पर आरोपों को न्यायालय में सिद्ध माना नहीं जा सकता।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User