42 साल पुराने डकैती-हत्या केस में राहत नहीं:अलीगढ़ में उम्रकैद काट रहे 69 वर्षीय राजेंद्र की रिहाई की दयायाचिका राज्यपाल ने खारिज की

Sep 28, 2026 - 08:41
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42 साल पुराने डकैती-हत्या केस में राहत नहीं:अलीगढ़ में उम्रकैद काट रहे 69 वर्षीय राजेंद्र की रिहाई की दयायाचिका राज्यपाल ने खारिज की
डकैती के दौरान हत्या के 42 साल पुराने मामले में उम्रकैद काट रहे 69 वर्षीय राजेंद्र सिंह की जेल से समयपूर्व रिहाई की उम्मीद खत्म हो गई। राजेंद्र ने उम्र और जेल में काटी गई सजा के आधार पर दयायाचिका दाखिल की थी, लेकिन समयपूर्व रिहाई समिति ने उसकी रिहाई की संस्तुति नहीं की। इसके बाद संविधान के अनुच्छेद-161 के तहत मामला राज्यपाल के सामने पहुंचा, जहां से भी उसे राहत नहीं मिली। अब शासन ने राज्यपाल द्वारा दयायाचिका खारिज किए जाने का आदेश जारी किया। राजेंद्र सिंह पुत्र शैतान सिंह नगला संतोषी, थाना दादों का निवासी है और वर्तमान में केंद्रीय कारागार इटावा में बंद है। मामला 25/26 अगस्त 1984 की रात का है। आदेश के मुताबिक राजेंद्र अपने एक सहअभियुक्त के साथ गांव के ही सियाराम के घर में डकैती डालने घुसा था। इसी दौरान किताब सिंह ने उसे पहचान लिया। पहचान खुलने के बाद राजेंद्र ने गोली चला दी, जिससे किताब सिंह की हत्या हो गई। मामले में मुकदमा चला और चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश, अलीगढ़ ने 24 दिसंबर 1985 को राजेंद्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। राजेंद्र ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की, लेकिन 8 अप्रैल 2016 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी उम्रकैद की सजा बरकरार रखी। 69 साल की उम्र में मांगी थी समयपूर्व रिहाई राजेंद्र ने सामान्य दयायाचिका के आधार पर समयपूर्व रिहाई की मांग की थी। शासन के रिकॉर्ड के अनुसार 14 जुलाई 2025 तक उसकी उम्र करीब 69 वर्ष थी। जिला स्तरीय रिहाई समिति ने प्रकरण पर विचार करते हुए अपराध की प्रकृति, बंदी की स्वास्थ्य स्थिति और पुलिस-प्रशासन की रिपोर्ट को देखा। आदेश के अनुसार डकैती के दौरान एक व्यक्ति की हत्या किए जाने को गंभीर आधार माना गया। वहीं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और जिला मजिस्ट्रेट, अलीगढ़ ने भी समयपूर्व रिहाई की संस्तुति नहीं की थी। समिति ने सभी बिंदुओं पर विचार के बाद राजेंद्र की समयपूर्व रिहाई की संस्तुति नहीं की। आदेश में यह भी कहा गया कि उसे रिहा करने से समाज में प्रतिकूल संदेश जाने की आशंका है। राज्यपाल ने भी नहीं दी राहत समिति की रिपोर्ट के बाद प्रकरण राज्यपाल के समक्ष भेजा गया। शासन के आदेश के मुताबिक संविधान के अनुच्छेद-161 के तहत राजेंद्र सिंह की दयायाचिका पर विचार किया गया और राज्यपाल ने समयपूर्व रिहाई की मांग अस्वीकार कर दी। शासन ने केंद्रीय कारागार इटावा के वरिष्ठ अधीक्षक को निर्देश दिया है कि राज्यपाल के फैसले से बंदी को अवगत कराया जाए। साथ में इस आदेश की प्रति अलीगढ़ कारागार व डीएम-एसएसपी को भी भेजी है।

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