60 करोड़ की असरफ मंजिल कोठी राज्य सरकार में निहित:डीएम कोर्ट ने कब्जेदारों को 15 दिन में खाली करने का आदेश दिया
सीतापुर में शहर के सिविल लाइन इलाके में करीब 25 बीघा नजूल जमीन पर बनी बहुचर्चित असरफ मंजिल कोठी को लेकर सोमवार शाम करीब 6 बजे प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। डीएम कोर्ट ने कब्जेदारों का पक्ष सुनने के बाद कोठी को राज्य सरकार में निहित करने का आदेश दिया है। फैसले के बाद तहसील प्रशासन ने आदेश की प्रति कोठी परिसर में चस्पा कर दी है। प्रशासन ने कब्जेदारों को 15 दिन के भीतर परिसर खाली करने का निर्देश दिया है। बताया जा रहा है कि असरफ मंजिल कोठी शहर के सिविल लाइन क्षेत्र में स्थित है और इसका निर्माण करीब 25 बीघा नजूल भूमि पर हुआ है। इस संपत्ति को लेकर प्रशासन की ओर से कुछ महीने पहले कब्जेदारों को नोटिस जारी किया गया था। नोटिस के बाद मामले में कब्जेदारों की ओर से अपना पक्ष रखा गया। डीएम कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अब अपना फैसला सुनाया है। फैसले के तहत कोठी और उससे संबंधित भूमि को राज्य सरकार में निहित किए जाने की कार्रवाई की गई है। आदेश जारी होने के बाद तहसील प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर आदेश को चस्पा किया। प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि कब्जेदारों को निर्धारित 15 दिन की अवधि में स्वयं कब्जा खाली करना होगा। तहसील प्रशासन के मुताबिक यदि निर्धारित समय में कब्जा खाली नहीं किया गया तो प्रशासन की ओर से नियमानुसार बलपूर्वक कब्जा लिया जाएगा। इसके लिए आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।स्थानीय स्तर पर असरफ मंजिल कोठी की कीमत करीब 50 से 60 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इतनी बड़ी संपत्ति के राज्य सरकार में निहित होने के फैसले के बाद शहर में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। तहसीलदार सदर अजीत जायसवाल ने बताया कि डीएम कोर्ट के आदेश के बाद कब्जेदारों को 15 दिन में संपत्ति खाली करने का निर्देश दिया गया है। निर्धारित अवधि में कब्जा खाली नहीं करने पर नियमानुसार प्रशासन द्वारा कब्जा लिया जाएगा।
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