6साल से पेंशन नहीं मिली परिवार भुखमरी कि कगार पर:जल निगम मुख्यालय पर पूर्व कर्मचारियों का प्रदर्शन ,पेंशन और आश्रित नियुक्ति न मिलने पर भड़के, युवक बोला-आत्मदाह के अलावा कोई विकल्प नहीं
'हमने 35 साल तक जल निगम में सेवाएं दिया । और अब इसी दफ्तर के गेट पर बैठकर धरना देना पड़ रहा है। हमारे लिए बहुत दुखद और शर्मनाक है। परिवार में एक बेटी है दिव्यांग है जो जन्म से अभी तक बोली नहीं पेंशन से ही बेटी का इलाज होता है । 6 साल हो गए हैं पेंशन नहीं आई है। इस वजह से दिव्यांग बेटी का इलाज हमारा अपना इलाज और पत्नी का इलाज रुक गया है। जब परेशानी बहुत ज्यादा बढ़ती है तो कर्जा लेकर इलाज करवा लेते हैं। एक बेटा है जो मुश्किल से महीने के 10 से 15 हजार रुपए कमाता है उसी से घर चल रहा है। डॉक्टर के यहां जाने से पहले 20 बार सोचना पड़ता है कोई सुनने को तैयार नहीं है पूरी तरह तानाशाही है। यह कहते हुए चंद्रिका प्रसाद की आंखें भीग गई जो चल निगम के पूर्व कर्मचारी हैं। लखनऊ में हजरतगंज स्थित जल निगम मुख्यालय पर लंबे समय से प्रदर्शन चल रहा है। उत्तर प्रदेश जल निगम नगरी ग्रामीण फील्ड वर्कर्स पेंशनर्स एसोसिएशन के बैनर तले कर्मचारी धरना दे रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि लगभग 1000 कर्मचारी हैं जिन्हें साल 2020 से पेंशन नहीं मिल रहा है। बजट का हवाला देते हुए 6 सालों से पेंशन बंद कर दी गई है । इसके बाद कर्मचारी भुखमरी की कगार पर आ गए हैं। बहुत सारे ऐसे कर्मचारी हैं जिनका इलाज रुक गया है बच्चों की पढ़ाई , शादी ब्याह सब कुछ प्रभावित हो रहा है। ‘डबल बेंच के ऑर्डर को नहीं मान रहा है विभाग’ संगठन के प्रदेश महामंत्री सैयद अली हैदर जैदी ने कहा कि अधिकारी मनमाना रवैया अपना रहे हैं। कोर्ट से पहले हमें सिंगल बेंच से जीत मिली फिर डबल बेंच ने पेंशन जारी करने का आदेश दे दिया। मगर इसके बावजूद भी अधिकारी कोर्ट के आदेश का पालन करने को तैयार नहीं है। हम लोगों की परेशानी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है और विभाग अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहा है। पेंशन न मिलने के अलावा दूसरी बड़ी मांग है आश्रित नियुक्ति। पिछले 5 से 6 सालों में एक भी आश्रित नियुक्ति नहीं हुई है नौकरी करते हुए जान गंवाने वाले कर्मचारियों का परिवार बेसहारा हो गया। जल निगम लगभग 12 हजार कर्मचारियों को पेंशन दे रहा है मात्र 1000 कर्मचारियों को इससे वंचित रखा जा रहा है। ‘आत्मदाह के अलावा कोई रास्ता नजर नहीं आता’ हाथरस से आए जतिन ने बताया कि उनके पिताजी इसी विभाग में नौकरी करते थे 35 साल सेवाएं दिया और ड्यूटी पर उनकी मौत हो गई। 5 साल पिता की मौत को हो गए हैं अब तक आश्रित नियुक्ति नहीं मिली और माता जी की पेंशन भी शुरू नहीं हुई। लखनऊ के चक्कर लगाकर चप्पल घिस गई। परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गया है। स्थिति दिन प्रतिदिन दयनीय होती जा रही है । आगे कैसे दिन गुजरेंगे कुछ कह नहीं सकते। अब आत्मदाह करने के अलावा कोई विकल्प नहीं। हमने मैकेनिक से बीटेक किया है और इसी नौकरी की वजह से केंपस प्लेसमेंट भी छोड़ दिया। और यह नौकरी भी नहीं मिल रही है इसी के सहारे बहन की शादी भी करना था वह भी घर में बैठी है हम लोग कुछ समझ नहीं पा रहे हैं कि क्या करें। बस एक ही विनती है कि रोजगार मिल जाए। 73 साल कि उम्र में धरने पर बैठे इस पूरे आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं आर एस गिरी ने बताया कि उनकी उम्र 73 साल है। 36 सालों तक सेवाएं देने के बाद उम्र के इस पड़ाव पर बैठकर आंदोलन करना पड़ रहा है। बताया कि हमने कर्मचारियों के हित में जल निगम में बहुत सी लड़ाइयां लड़ी और उसमें सफलता मिली। मौजूदा समय में जितने तानाशाह और अड़ियल अधिकारी है उतने कभी नहीं रहे। मगर हम लोग भी पीछे हटने वाले नहीं हैं 21 अक्टूबर को इसी लखनऊ में महा आंदोलन होगा। यह हम कर्मचारियों के आर पार की लड़ाई होगी।
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