अब्बास अंसारी को हेट स्पीच मामले में दो साल की सजा, विधायकी स्वत: रद्द; जानें विकल्प
दि राइजिंग न्यूज। मऊ। 31 मई, 2025। मऊ सदर विधानसभा सीट से विधायक और माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी को बड़ा झटका लगा है। मऊ की एमपी-एमएलए कोर्ट ने 2022 विधानसभा चुनाव के दौरान दिए गए हेट स्पीच मामले में अब्बास अंसारी को दोषी करार देते हुए दो साल की सजा और 2,000 रुपये का जुर्माना सुनाया है। कोर्ट के इस फैसले के साथ ही उनकी विधायकी भी स्वतः समाप्त हो गई है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक किसी भी जनप्रतिनिधि को दो साल या उससे अधिक की सजा मिलने पर उसकी सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द हो जाती है।
दि राइजिंग न्यूज। मऊ। 31 मई, 2025।
मऊ सदर विधानसभा सीट से विधायक और माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी को बड़ा झटका लगा है। मऊ की एमपी-एमएलए कोर्ट ने 2022 विधानसभा चुनाव के दौरान दिए गए हेट स्पीच मामले में अब्बास अंसारी को दोषी करार देते हुए दो साल की सजा और 2,000 रुपये का जुर्माना सुनाया है। कोर्ट के इस फैसले के साथ ही उनकी विधायकी भी स्वतः समाप्त हो गई है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक किसी भी जनप्रतिनिधि को दो साल या उससे अधिक की सजा मिलने पर उसकी सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द हो जाती है।
क्या कहा था अब्बास अंसारी ने?
विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान अब्बास अंसारी ने एक विवादित बयान में कहा था कि "सरकार बनने के बाद अधिकारियों के साथ हिसाब-किताब बराबर किया जाएगा।" इस बयान को धमकी के तौर पर देखा गया और इसके बाद चुनाव आयोग ने उनके चुनाव प्रचार पर 24 घंटे की रोक भी लगाई थी। चुनाव के तुरंत बाद इस बयान को लेकर एफआईआर दर्ज हुई और मुकदमा चलाया गया, जिसमें उन्हें अब दोषी ठहराया गया है।
अब्बास अंसारी की विधायकी कैसे गई?
अब्बास अंसारी की सदस्यता खत्म होने की वजह सुप्रीम कोर्ट का 2013 का फैसला है। लिली थॉमस बनाम भारत सरकार केस में सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि अगर किसी सांसद, विधायक या विधान परिषद सदस्य को 2 साल या उससे अधिक की सजा होती है, तो उसकी सदस्यता तुरंत रद्द हो जाती है। यह नियम Representation of the People Act, 1951 की धारा 8(3) के तहत लागू होता है।
क्या अब्बास अंसारी को राहत मिल सकती है?
अब्बास अंसारी के पास अभी भी कुछ कानूनी रास्ते हैं जिनसे वे सजा और विधायकी रद्द होने के खिलाफ लड़ सकते हैं:
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सजा पर रोक (Stay on Sentence):
अगर वे हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में अपील करते हैं और कोर्ट उनकी सजा पर अस्थायी रोक लगा देता है, तो उनकी विधायकी बहाल हो सकती है। -
दोषसिद्धि पर रोक (Stay on Conviction):
यह ज्यादा कठिन विकल्प है क्योंकि अदालतें दोषसिद्धि पर रोक बहुत विशेष मामलों में ही लगाती हैं। उनके चाचा अफजल अंसारी को ऐसा लाभ सुप्रीम कोर्ट से 2023 में मिला था। -
अपील में बरी होना:
अगर ऊपरी अदालत में अपील के बाद वे बरी हो जाते हैं, तो दोषसिद्धि हट जाएगी और विधायकी स्वतः बहाल हो जाएगी।
अब आगे क्या होगा?
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मऊ सदर विधानसभा सीट को अब रिक्त घोषित किया जाएगा और वहां उपचुनाव कराना होगा।
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अब्बास अंसारी को यदि दोषसिद्धि बनी रहती है, तो वे सजा पूरी होने के बाद भी 6 साल तक चुनाव नहीं लड़ सकते, जब तक कि ऊपरी अदालत से दोषसिद्धि रद्द न हो जाए।
मुख्य बिंदु:
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दो साल की सजा और जुर्माना
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत विधायकी स्वत: समाप्त
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सजा पर रोक, दोषसिद्धि पर रोक या अपील में बरी होने पर विधायकी वापस संभव
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मऊ में उपचुनाव होगा
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दोषसिद्धि बनी रही तो 6 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक