एक हरंटा जनरल बना फील्ड मार्शल, आजीवन चाटेगा मलाई

दि राइजिंग न्यूज। लखनऊ। 21 मई, 2025।  इस्लामाबाद की फौजी पंचायत में नई स्कीम आई है – जो जीते वो सिपाही, जो हारे वो फील्ड मार्शल! जी हां, भारत से मुंह की खाने के बाद पाकिस्तान ने अपने बहादुर-से-भी-ज़्यादा-संवेदनशील आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर को "फील्ड मार्शल" बना दिया है। वजह? हार में भी गरिमा बनी रहे!

एक हरंटा जनरल बना फील्ड मार्शल, आजीवन चाटेगा मलाई
"Reward for defeat": Defeated general in Pakistan made Field Marshal!

दि राइजिंग न्यूज। लखनऊ। 21 मई, 2025। 

इस्लामाबाद की फौजी पंचायत में नई स्कीम आई है – जो जीते वो सिपाही, जो हारे वो फील्ड मार्शल!
जी हां, भारत से मुंह की खाने के बाद पाकिस्तान ने अपने बहादुर-से-भी-ज़्यादा-संवेदनशील आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर को "फील्ड मार्शल" बना दिया है। वजह? हार में भी गरिमा बनी रहे!

फील्ड मार्शल: पाकिस्तान का ‘सांत्वना पुरस्कार’

ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान को सैन्य, मनोवैज्ञानिक और डिजिटल मोर्चे पर धो डाला। लेकिन उधर जनरल साहब ने हार को इतना ‘आत्मसात’ कर लिया कि सरकार ने उन्हें ताउम्र प्रमोशन थमा दिया। अब वो ताउम्र सरकारी तनख्वाह, बंगला, बुलेटप्रूफ गाड़ी और बूट पोलिश बजट के हकदार होंगे – भले ही देश की GDP ICU में पड़ी हो।

तनख्वाह कर्ज से, ठाठ बेमिसाल

जहां IMF ने पाकिस्तान को "भीख with interest" में 1 अरब डॉलर थमा दिए हैं, वहीं उसी कर्ज से फील्ड मार्शल साहब ₹75,000 की पाकिस्तानी सैलरी में VIP जिन्दगी बिता रहे हैं। मतलब जनता भूखी और जनरल जी ‘फाइव स्टार’!

आर्मी चीफ से अमर कथा तक

1959 में जनरल अयूब खान ने खुद को राष्ट्रपति बनाकर फील्ड मार्शल घोषित किया था। अब "जनरल रीमिक्स 2.0" के तहत मुनीर साहब ने भी वही फार्मूला पकड़ा है — लेकिन इस बार जंग जीते बिना
“भारत से हारो, प्रमोशन पाओ” — पाकिस्तान मिलिट्री का नया मोटो लगता है!

‘ऑपरेशन बन्यनुन मार्सूस’ – मतलब कुछ भी!

पाकिस्तान सरकार का कहना है कि मुनीर को यह रैंक भारत के ऑपरेशन सिंदूर के जवाब में चलाए गए ‘ऑपरेशन बन्यनुन मार्सूस’ की वीरता के लिए मिली है। अब क्या कहें – जब ऑपरेशन का नाम ही किसी सॉफ्ट टॉय जैसा लगे, तो हकीकत भी खिलौना बन जाती है।

रणनीति या तख्तापलट की रिहर्सल?

शहबाज़ शरीफ की सरकार ने शायद यह रैंक एक "प्रीवेंटिव ब्राइब" के तौर पर दी है – “भाई तख्तापलट मत करना, ये लो प्रमोशन और मौज करो।”
पर पाकिस्तान का इतिहास बताता है – जहां जनरल VIP बनता है, वहां प्रधानमंत्री VRS लेता है।