आईआईटी-बीएचयू और जर्मनी की बर्गिशे यूनिवर्सिटी वुपर्टाल के बीच एमओयू:अब संस्थागत स्तर पर होगा संयुक्त शोध और छात्रों-शिक्षकों का आदान-प्रदान

Oct 07, 2026 - 18:55
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आईआईटी-बीएचयू और जर्मनी की बर्गिशे यूनिवर्सिटी वुपर्टाल के बीच एमओयू:अब संस्थागत स्तर पर होगा संयुक्त शोध और छात्रों-शिक्षकों का आदान-प्रदान
आईआईटी-बीएचयू और जर्मनी की बर्गिशे यूनिवर्सिटी वुपर्टाल (BUW) के बीच शैक्षणिक और शोध सहयोग को विस्तार देने के लिए संस्थागत स्तर पर समझौता ज्ञापन (एमओयू) हुआ है। दोनों संस्थानों के बीच 1 अक्टूबर 2026 को एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। अब तक दोनों संस्थानों के बीच विभागीय स्तर पर चल रहा सहयोग संस्थान स्तर तक पहुंच गया है। इससे विभिन्न विभागों में संयुक्त शोध परियोजनाओं, विद्यार्थियों और शिक्षकों के आदान-प्रदान तथा बहुविषयक शोध को बढ़ावा देने के अवसर मिलेंगे। सिविल इंजीनियरिंग से शुरू हुआ था सहयोग दोनों संस्थानों के बीच सहयोग की शुरुआत सिविल इंजीनियरिंग विभागों के स्तर पर हुई थी। स्कीम फॉर प्रमोशन ऑफ एकेडमिक एंड रिसर्च कोलैबोरेशन (SPARC) के तहत संयुक्त शैक्षणिक और शोध गतिविधियां संचालित की गईं। इन गतिविधियों की सफलता के बाद सहयोग को संस्थागत स्तर पर विस्तार देने का फैसला लिया गया। कई विभागों में संयुक्त शोध के अवसर एमओयू के तहत अब विभिन्न विभागों के बीच संयुक्त शोध परियोजनाएं, विद्यार्थी-शिक्षक आदान-प्रदान, अकादमिक गतिविधियां और बहुविषयक शोध को बढ़ावा दिया जाएगा। सिविल इंजीनियरिंग के अलावा इंजीनियरिंग और विज्ञान के अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग के नए अवसर विकसित किए जाएंगे। पेवमेंट स्कैनिंग तकनीक पर वर्कशॉप एमओयू का आदान-प्रदान आईआईटी-बीएचयू में आयोजित SPARC-GIANT International Workshop on “Pavement Scanning Technologies” के दौरान किया गया। इस मौके पर जर्मनी से आए प्रो. पाहिरंगन शिवापाथम के साथ बर्गिशे यूनिवर्सिटी वुपर्टाल के 11 विद्यार्थियों का दल भी मौजूद रहा। वर्कशॉप में सड़क और पेवमेंट की आधुनिक जांच तकनीकों पर व्यावहारिक और तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (GPR) और ट्रैफिक स्पीड डिफ्लेक्टोमीटर (TSD) जैसी तकनीकों से सड़क और पेवमेंट की स्थिति का आकलन करने पर जोर दिया जा रहा है। निदेशक बोले- अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए अवसर मिलेंगे आईआईटी-बीएचयू के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने कहा कि दोनों संस्थानों के बीच सहयोग ने पिछले कुछ वर्षों में महत्वपूर्ण प्रगति की है। विभागीय स्तर से शुरू हुआ सहयोग अब संस्थागत स्तर तक पहुंच गया है। इससे विभिन्न विषयों में संयुक्त शोध, विद्यार्थी-शिक्षक आदान-प्रदान और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग के नए अवसर उपलब्ध होंगे। दोनों संस्थानों के विस्तारित सहयोग से सतत अवसंरचना, सड़क एवं पेवमेंट इंजीनियरिंग, उन्नत अवसंरचना जांच तकनीकों और पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों पर संयुक्त शोध को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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