आगरा में गूगल पर फर्जी नंबर डालकर की ठगी:दो लोगों से 12 लाख हड़पे,FIR के बाद खाते की जांच में जुटी पुलिस
आगरा में साइबर ठगी के दो अलग-अलग मामलों में दो लोगों से करीब 12 लाख रुपए ठग लिए गए। एक फर्म संचालक ने कागज खरीदने के लिए गूगल पर कंपनी का नंबर खोजा था। फर्जी नंबर पर संपर्क करने के बाद आरोपियों ने कागज भेजने के नाम पर उनसे 6.85 लाख रुपए ट्रांसफर करा लिए। दूसरे मामले में अरतौनी की महिला के खाते से बिना जानकारी के कई UPI ट्रांजेक्शन के जरिए 5.25 लाख रुपए निकाल लिए गए। दोनों मामलों में साइबर क्राइम थाने में FIR दर्ज की गई है। पुलिस बैंक खातों और लेनदेन की जांच कर रही है। गूगल पर मिला नंबर, खुद को कंपनी का अधिकारी बताया कमलानगर की यमुनोत्री कॉलोनी, कर्मयोगी निवासी निलेश बंसल की सेठ गली में नैमीचंद राकेश कुमार नाम से कागज की फर्म है। उन्हें कागज खरीदना था। 15 सितंबर को उन्होंने गूगल पर आरामको पेपर्स प्राइवेट लिमिटेड, मुजफ्फरनगर सर्च किया। सर्च में मिले नंबर पर बात करने वाले ने अपना नाम विकास बताया और खुद को प्रबंधक बताया। दूसरे आरोपी ने यामीन चौधरी नाम बताते हुए खुद को प्रबंध निदेशक बताया। दोनों ने कागज की गुणवत्ता और कीमत की जानकारी दी। इसके बाद सैंपल भी भेजा, जिससे निलेश को भरोसा हो गया। पहले एडवांस लिया, फिर ट्रक लोड होने की बात कही 20 सितंबर को आरोपियों ने एडवांस के तौर पर एक लाख रुपए अपने खाते में जमा करा लिए। पांच दिन बाद उन्होंने बताया कि 17,094 किलो कागज ट्रक में लोड हो चुका है। आरोपियों ने GST समेत 6,85,811 रुपए का बिल भेजा। इसके बाद निलेश से बाकी 5,85,811 रुपए भी ट्रांसफर करा लिए गए। उन्हें बताया गया कि ट्रक रवाना हो चुका है। ई-वे बिल नहीं आया तो खुली ठगी की पोल 26 सितंबर को निलेश को न तो ई-वे बिल मिला और न ही ड्राइवर का फोन आया। उन्होंने आरोपियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन दोनों मोबाइल नंबर बंद मिले। बैंक से जानकारी लेने पर उन्हें रकम के साथ हुई धोखाधड़ी का पता चला। इसके बाद उन्होंने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। महिला के खाते से बिना जानकारी निकले 5.25 लाख दूसरा मामला अरतौनी निवासी रिचा शर्मा का है। उनके खाते से 5.25 लाख रुपए कई UPI ट्रांजेक्शन के जरिए निकाल लिए गए। उनके भाई अभिषेक ने बताया कि 25 जुलाई को वह पासबुक अपडेट कराने गए थे। पासबुक में एंट्री कराने पर पता चला कि 6 जुलाई को खाते से कई बार UPI के जरिए रकम निकाली गई थी। रिचा को इन लेनदेन की जानकारी ही नहीं थी। साइबर पुलिस बोली- फर्जी हेल्पलाइन नंबर से बचें DCP साइबर क्राइम आदित्य सिंह ने बताया कि दोनों मामलों में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस संबंधित बैंक खातों और लेनदेन की जानकारी जुटा रही है। उन्होंने बताया कि साइबर ठग कई बार गूगल पर कंपनियों के नाम से फर्जी हेल्पलाइन नंबर डाल देते हैं। किसी नंबर पर संपर्क करने से पहले उसका सत्यापन करना जरूरी है। ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करने के साथ बैंक खाते और पासबुक की नियमित जांच करनी चाहिए।
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