आगरा में सबूतों के अभाव में हत्या का आरोपी बरी:मृतक की पत्नी ने शक में लिखवाया था मुकदमा, विवेचक की लापरवाही पर अदालत नाराज
आगरा में हत्या के एक मामले में अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपी को बरी कर दिया। मृतक की पत्नी ने दो माह पुराने विवाद के आधार पर शक जताते हुए आरोपी के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ ऐसे ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका, जिनसे हत्या में उसकी भूमिका साबित हो सके। अदालत ने विवेचक की अव्यवस्थित और लचर विवेचना पर नाराजगी जताते हुए आदेश की प्रति पुलिस आयुक्त आगरा, जिलाधिकारी आगरा और डीजीपी लखनऊ को भेजने के निर्देश दिए हैं। मामला सदर बाजार थाना क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार, रोहता निवासी सीमा के पति मनोज ऑटो चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते थे। 22 जनवरी 2019 को मनोज अपना ऑटो लेकर घर से निकले थे, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटे। पत्नी ने उनके मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फोन बंद मिला। अगले दिन मोहल्ले में रहने वाले मनुआ ने मनोज का शव रोहता इंटर कॉलेज के पीछे कच्चे रास्ते पर पड़े होने की जानकारी दी। सीमा अपने बेटे के साथ मौके पर पहुंचीं और शव की पहचान की। सीमा ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि घटना से करीब दो माह पहले उनके पति का कुंटू उर्फ देवेंद्र सिंह निवासी रोहता से विवाद हुआ था। इसी आधार पर उन्होंने देवेंद्र पर हत्या का शक जताया। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। विवेचना के बाद आरोपी के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया। आठ गवाहों की गवाही के बाद भी नहीं जुड़ीं साक्ष्य की कड़ियां मुकदमे की सुनवाई के दौरान वादिया सीमा, मृतक के भाई संजय दुबे, डॉक्टर सुमंत कुमार सिंह सहित आठ गवाह पेश हुए। अदालत में पेश साक्ष्यों से परिस्थितिजन्य साक्ष्य की कड़ियां आपस में नहीं जुड़ सकीं। विवेचक यह पता नहीं लगा सका कि घटना किस हथियार से और कैसे हुई। ऐसा कोई स्वतंत्र गवाह भी सामने नहीं आया, जिसने मनोज को आखिरी बार आरोपी के साथ देखा हो। अदालत ने विवेचना में गंभीर कमियां पाईं। आदेश के अनुसार, आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसका केवल एक लाइन का बयान दर्ज किया गया था, जिसमें उसने कहा था कि उससे गलती हो गई और वह अपने अधिवक्ता के माध्यम से अदालत में पक्ष रखेगा। विवेचक ने आरोपी के खिलाफ दोष साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य जुटाने का प्रयास नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल आरोप पत्र दाखिल करने और केस डायरी में पर्चे काटने से किसी अभियुक्त का अपराध साबित नहीं हो जाता। अपर जिला जज मृदुल दुबे ने आरोपी कुंटू उर्फ देवेंद्र सिंह को साक्ष्यों के अभाव में बरी करने का आदेश दिया। साथ ही विवेचक की लापरवाही को गंभीर मानते हुए आदेश की प्रति पुलिस आयुक्त आगरा, जिलाधिकारी आगरा और डीजीपी लखनऊ को भेजने के निर्देश दिए। आरोपी की ओर से अधिवक्ता अरविंद कुमार शर्मा, उमेश चंद शर्मा और मनीष पाठक ने पैरवी की।
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