आजमगढ़-एक घर में 14 ‘विकास यादव’, गोरखपुर में 6 'अनुराग':सॉफ्टवेयर भी नहीं पकड़ पाया; यूपी में SIR के बाद भी वोटर लिस्ट में खामियां
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 15 अक्टूबर को ‘समाजवादी ECI ऑडिट-1’ नाम से एक रिपोर्ट जारी की। दावा किया- एक विधानसभा सीट पर एक ही व्यक्ति का नाम 10 बार है। सबूत के तौर पर आजमगढ़, लखनऊ और गोरखपुर के उदाहरण दिए। इस पर चुनाव आयोग ने कहा- जांच कर रहे हैं। दैनिक भास्कर ने इस दावे का सच जानने के लिए पड़ताल की। 5 विधानसभा सीटों की वोटर लिस्ट को चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर क्रॉस चेक किया। इसके लिए 3 तरीके अपनाए- 1. सपा की लिस्ट में दर्ज हर नाम और उसके EPIC नंबर को एक-एक करके ceouttarpradesh.nic.in पर चेक किया। 2. SIR के बाद चुनाव आयोग से जारी फाइनल लिस्ट में फिल्टर लगाकर ऐसे नाम छांटे, जिनमें मतदाता का नाम, पिता का नाम, उम्र और मकान नंबर एक जैसे थे। 3. आखिर में चुनाव आयोग की ओर से जारी सप्लीमेंट्री लिस्ट से मैच करके क्रॉस चेक किया। वोटर लिस्ट में एक ही नाम कई बार होना पाया गया। क्या SIR प्रक्रिया में वाकई धांधली हुई है? या फिर यह सिर्फ मानवीय चूक और डेटा एंट्री का फेर है? पढ़िए पूरी केस स्टडी... सपा ने आजमगढ़ सदर विधानसभा सीट की वोटर लिस्ट पर सबसे पहले सवाल उठाया। दावा किया- 'विकास यादव' नाम के शख्स का नाम 10 अलग-अलग जगह दर्ज है। जब हमने ECI पोर्टल पर इसकी जांच की, तो आंकड़े और भी चौंकाने वाले निकले। पिता के नाम के कॉलम में 'जीबोध यादव' और मकान नंबर '17' दर्ज था, लेकिन विकास यादव नाम से कुल 14 एंट्री मिलीं। हमारी जांच में पता चला कि आयोग ने सप्लिमेंट्री वोटर लिस्ट में बूथ नंबर- 222 और बूथ नंबर- 423 से विकास यादव का एक-एक नाम काट दिया है। लेकिन, 12 नाम अभी भी मौजूद हैं। जांच में यह भी पता चला कि एक ही EPIC नंबर पर दो अलग लोगों के नाम दर्ज हैं। जांच की अगली कड़ी में हमने गोरखपुर के कैंपियरगंज सीट की वोटर लिस्ट खंगाली। यहां अनुराग पुत्र संजय के नाम से 6 वोटर मिले। सभी का पता, उम्र और पिता का नाम समान है। ये नाम बूथ- 347 की वोटर लिस्ट में क्रम संख्या 729, 756, 757, 760, 761 और 763 पर मौजूद हैं। इसी बूथ पर मकान नंबर 23 में रहने वाली 'सत्या भामा' (पति- विनोद सिंह, उम्र- 27 साल) का नाम भी क्रम संख्या 755, 758 और 759 पर यानी 3 जगह दर्ज पाया गया। राजधानी लखनऊ की बात करें, तो लखनऊ पूर्वी सीट के बूथ नंबर- 149 पर मकान नंबर- 12/102 में 'अरविंद कुमार' नाम के 6 वोटर दर्ज पाए गए। इन सबकी उम्र 25 साल और पिता का नाम 'राम कुमार' है। बूथ 149 पर क्रम संख्या 739, 740, 741, 742, 744 और 745 पर अरविंद कुमार का नाम लिखा है। सहारनपुर की नकुड़ विधानसभा में समा परवीन का नाम 3 जगह दर्ज है। ये तीनों नाम भी मतदाता सूची के अंतिम भाग में लगभग एक ही क्रम संख्या में उपलब्ध हैं। ऐसा ही केस श्रावस्ती की विधानसभा सीट पर भी देखने को मिला। SIR के बाद यहां एक ही क्रम में 5 बार रिजवान पुत्र मोहर्रम अली का नाम दर्ज था। सपा की ओर से चुनाव आयोग को जो लिस्ट सौंपी गई है, उसमें यह नाम भी शामिल है। 10 अप्रैल की मतदाता सूची में ये सभी नाम मिले, लेकिन सप्लिमेंट्री सूची में इनमें से 4 नाम हटाए जा चुके हैं। जब सॉफ्टवेयर पकड़ लेता है डुप्लीकेसी, फिर कैसे हो गई डबलिंग? SIR के दौरान चुनाव आयोग ने दावा किया था कि ऐसा सॉफ्टवेयर बनाया गया है, जो डुप्लीकेट वोटरों की पहचान कर सकता है। वहीं, सपा का कहना है कि पार्टी ने अब तक करीब 3 लाख डुप्लीकेट नामों की पहचान की है। इस पर यूपी में मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा कहते हैं- सपा के आरोपों की जांच कराई जा रही है। उनकी ओर से 100 सीटों का डेटा दिया गया है। जांच पूरी होने पर ही स्थिति साफ होगी कि इनमें से कितनी शिकायतें सही हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि इतनी बड़ी प्रक्रिया में कुछ खामियां रह जाती हैं। लेकिन, सपा की ओर से जो संख्या बताई गई है, आयोग उससे सहमत नहीं। दोहरी प्रविष्टियां हटाने के लिए सभी जिलों के डीएम को निर्देश दिए गए हैं। इस काम में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई की जाएगी। सपा के ज्ञापन में शामिल 10 नाम, सप्लिमेंट्री लिस्ट में डिलीट मिले सपा ने 100 विधानसभा सीटों पर करीब तीन लाख डुप्लीकेट नाम होने का दावा किया है। आयोग को 7 पेज का ज्ञापन भी सौंपा है। इसमें कन्नौज की छिबरामऊ, इटावा की जसवंतनगर और श्रावस्ती जिले की श्रावस्ती विधानसभा सीट के 11 उदाहरण भी दिए थे। दैनिक भास्कर ने इन नामों को क्रॉस चेक किया तो 11 में से 10 नाम चुनाव आयोग डिलीट कर चुका है। सिर्फ श्रावस्ती के अनीश पुत्र गुलजार का नाम एक से ज्यादा जगहों पर मिला। ------------------------------ यह खबर भी पढ़ें- यूपी में विधानसभा के बाद ही होंगे पंचायत चुनाव, हाईकोर्ट का आदेश रुकवाने SC जाएगी सरकार
यूपी में पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद होंगे, जो जनवरी से मार्च के बीच होने हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 3 महीने में पंचायत चुनाव कराने का आदेश दिया है। लेकिन, विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यह संभव नहीं लग रहा। हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे के लिए ग्राम प्रधान संगठन, ओबीसी आयोग और राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
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