यूपी के विकास प्राधिकरणों में रिश्वत का रेट कार्ड:इंजीनियर ने मकान की फाइल अटकाई, भास्कर रिपोर्टर से 3 लाख मांगे; देखिए पूरा स्टिंग

Oct 20, 2026 - 05:25
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यूपी के विकास प्राधिकरणों में रिश्वत का रेट कार्ड:इंजीनियर ने मकान की फाइल अटकाई, भास्कर रिपोर्टर से 3 लाख मांगे; देखिए पूरा स्टिंग
राजधानी लखनऊ में 15 छात्र जिंदा जल गए…। हादसे की जड़ तलाशी तो लखनऊ विकास प्राधिकरण में निकली। दैनिक भास्कर ने इस पर इनवेस्टिगेशन किया। इसमें निकलकर आया कि अफसरों की जेब गरम करके कहीं भी कुछ भी निर्माण किया जा सकता है। विजिलेंस ने खुद सालभर में 5 प्राधिकरणों के 11 अफसरों को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। इनमें सबसे ज्यादा 3-3 अफसर बनारस और सहारनपुर विकास प्राधिकरण के हैं। विजिलेंस के एक्शन के बावजूद यहां के अफसर खुलेआम पैसों की डिमांड कर रहे हैं। दैनिक भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम के अंडरकवर रिपोर्टर पीड़ित बने और एक सील बिल्डिंग के पेपर जुटाकर इन घूसखोर अफसरों के पास पहुंचे। रिपोर्टर को इनपुट मिला कि लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के जूनियर इंजीनियर राहुल प्रताप विश्वकर्मा पैसे लेकर अवैध निर्माण कराते हैं। भास्कर रिपोर्टर ने एक सील प्रॉपर्टी के डॉक्यूमेंट्स तैयार किए। उस पर दोबारा काम शुरू कराने की डील के लिए जूनियर इंजीनियर राहुल प्रताप विश्वकर्मा से फोन पर बात की। राहुल ने रिपोर्टर को विकास प्राधिकरण कार्यालय की पहली मंजिल स्थित कमरा नंबर- 12 में बुलाया। यहां राहुल तो नहीं मिले, लेकिन जोनल ऑफिसर मान सिंह से मुलाकात हुई- रिपोर्टर : छोटा-सा काम था, राहुल सर ने बुलाया था। मान सिंह: बताइए, क्या मैटर है? रिपोर्टर : एक प्रॉपर्टी सील है, काम लगाना था। मान सिंह : कौन-सा थाना लगता है? रिपोर्टर : जोन-3 एरिया में पारा थाना में पड़ता है। हम लोग 4 भाई हैं। हम बेंगलुरु में रहते हैं। यहां पर 2400 स्क्वायर फीट की जमीन है। ग्राउंड, फर्स्ट और सेकंड फ्लोर बनवा रहे थे। एलडीए से नोटिस चस्पा हो गया। रिपोर्टर : बिजनेस के सिलसिले में बाहर थे, देख नहीं पाए। मान सिंह : इसमें तो ध्वस्तीकरण हो जाएगा, बताइए तोड़ना है कि बचाना है? रिपोर्टर : मेहनत की कमाई से बनाया है सर। आपकी कृपा हो जाए तो मेरी बिल्डिंग बन जाएगी। मान सिंह : कितने फ्लोर बनाए हैं? रिपोर्टर : 2 फ्लोर बना लिए हैं सर। जोनल ऑफिसर मान सिंह ने रिपोर्टर से बातचीत के दौरान प्लाॅट पर आने की बात बोलकर लेनदेन का इशारा किया। बोला- राहुल को आप सब कुछ नोट करा दीजिएगा। मैं बात कर लूंगा, कल आपके प्लॉट पर आकर देख लेते हैं। राहुल से बात करेंगे और अगले दिन प्लॉट पर जाकर देखेंगे। एक हफ्ते तक जोनल अफसर और जूनियर इंजीनियर से रिपोर्टर की मोबाइल पर बात होती रही। जूनियर इंजीनियर राहुल प्रताप विश्वकर्मा ने रिपोर्टर को इंदिरा नगर में अपने घर के पास मिलने बुलाया। वह सरकारी गाड़ी से अकेले डील करने पहुंचा। बातचीत में प्रॉपर्टी की लोकेशन, उसका क्षेत्रफल, निर्माण और संभावित खर्च की जानकारी ली और साइट देखकर फाइनल करने की बात कही- राहुल : क्या महाराज, कहिए, आप इतना परेशान क्यों हैं? रिपोर्टर : सर नोटिस के कारण परेशान हैं, बहुत पैसा फंसा है। राहुल : इसमें क्या चाहते हैं आप? रिपोर्टर : काम लगाने की अनुमति मिल जाए बस। राहुल : आगे क्या काम करना है? क्या आपको बनवाना है? रिपोर्टर : फ्लैट बनवाना चाहते हैं। राहुल : क्या देंगे आप? रिपोर्टर : जो बताइए, हो जाएगा। कार्रवाई का डर दिखाकर इंजीनियर ने मुंह खोला रिपोर्टर से डील के दौरान जूनियर इंजीनियर राहुल ने बार-बार साइट विजिट करने के बाद प्राधिकरण के अफसरों का कट फाइनल करने की बात कही। साइट देखने के बाद राहुल ने रिपोर्टर को कॉल कर इंदिरा नगर के एक कैफे में फाइनल डील के लिए बुलाया। जेई ने रिपोर्टर से अवैध निर्माण से लेकर कार्रवाई से बचाने की पूरी डील की- राहुल : साइट देखी है, आप अपार्टमेंट बना रहे हैं। रिपोर्टर : अरे सर, अपार्टमेंट कहां? बगल वाली रोड भी हमने ही बनवाई है। राहुल : हां, तो जब करोड़ों का अपार्टमेंट बन रहा है, तो रोड क्या चीज है? रिपोर्टर : कहां करोड़ों का, सर? राहुल : देखिए एक अपार्टमेंट गिरा है, सबकी हालत खराब है। मजबूती दे रहे हैं न अपार्टमेंट में? रिपोर्टर : हां सर, अपना घर है, मजबूती रहेगी। राहुल : हमको न बताइए, रोज हम यही सब देखते हैं। रिपोर्टर : आप बताइए, क्या करना है? राहुल : एक फ्लोर पर कितने फ्लैट हैं? चार फ्लैट तो होंगे ही। रिपोर्टर : जी, सर। राहुल : एक फ्लैट कम से कम 50 लाख में तो बेचेंगे ही। रिपोर्टर : अरे नहीं, सर। राहुल : हमको नहीं पता वहां का क्या रेट है? कम से कम एक फ्लैट का 50 लाख रुपए मिलेगा। ‘जोनल से लेकर हर अफसर का हिस्सा जाएगा’ डील के दौरान जेई राहुल ने बड़ा खुलासा किया। राहुल ने दावा किया कि पैसा ऊपर तक जाता है। बड़े अफसरों तक पैसा नहीं जाएगा, तो पूरा मामला फंस जाएगा। इसलिए हर अधिकारी का पद के हिसाब से कट होता है। राहुल : हो जाएगा, तनाव नहीं लीजिए। रिपोर्टर : हम चाहते हैं कि बाद में कोई दिक्कत नहीं आए। रिपोर्टर : बताइए, एक लाख करा दें? राहुल : छत का ना? रिपोर्टर : पूरे का सर ? राहुल : नहीं महाराज, आप कौन-सी दुनिया में जी रहे हैं? रिपोर्टर : तो आप बताइए फिर क्या किया जाए? राहुल : काम कब से चालू करेंगे? रिपोर्टर : अरे, आप बताइए तो कल या परसों से शुरू करवा देंगे। राहुल : कम से कम एक कर दीजिए रनिंग मंथली। रिपोर्टर : एक लाख मंथली? राहुल : हां जी, वैसे कितने महीने में बिल्डिंग बन जाएगी? रिपोर्टर : छह से सात महीने तो लग ही जाएंगे। बस बनने के लिए टाइम देना होगा न? राहुल : हां, बनने के बाद आप सिस्टम में तो रहोगे ही, दिक्कत नहीं आएगी। रिपोर्टर : जी सर। राहुल : नक्शा तो पास हुआ नहीं है? रिपोर्टर : नक्शा पास करने जाएंगे तो करोड़ों लगेंगे। राहुल : छत का तो आपको अलग से करना होगा। रिपोर्टर : कितना लगेगा? राहुल : दो से कम नहीं लगेगा। हम तो कहेंगे, जितनी जल्दी हो सके, ज्यादा से ज्यादा आदमी लगाकर इसको खत्म करो। रिपोर्टर : ये पैसा मान सिंह सर (जोनल ऑफिसर) तक भी जाएगा न? राहुल : और क्या, उनके बिना कोई काम हो पाएगा क्या? उन्होंने ही तो हमें भेजा है, उनको तो देना ही होगा। राहुल : AE है, JE है, सबके पास जाएगा भाई। कोई अगर सवाल करने लगा, तो हम कैसे झेल पाएंगे? रिपोर्टर : मैनेज आप कर दीजिएगा, बाकी 3 लाख हम आपको दे देंगे हर महीने। राहुल : पहले एक काम करिए, जो बन चुका है उसके अंदर का काम शुरू करवा दीजिए। बालू का काम रात में करवाइए, जिससे ज्यादा किसी को पता भी नहीं चलेगा। रिपोर्टर : LDA से कोई आएगा तो नहीं? राहुल : हम लोग ही आएंगे बस। शिकायतें आने लगती हैं न, तो उसको मैनेज करना मुश्किल होता है। इंजीनियर बोला- बुलडोजर की कार्रवाई रोक देंगे डील के दौरान रिपोर्टर ने जब जूनियर इंजीनियर राहुल से सवाल किया कि कहीं वीसी बुलडोजर न भेज दें? ऐसी कंडीशन में तो सब काम खराब हो जाएगा? जूनियर इंजीनियर ने दावा किया कि बुलडोजर की बात होगी, तो हम रोकेंगे। उसका उपाय बताया जाएगा। वैसे बुलडोजर तक बात नहीं जाएगी। अगर शिकायत हुई तो काम पर थोड़ा असर पड़ सकता है बस। आप फिक्र नहीं कीजिए। राहुल : इतने साल से काम रुका है। अगर रनिंग में होता तो अब तक आप 20 करोड़ कमा चुके होते। रिपोर्टर : क्या बताएं सर, दूसरे के भरोसे था तभी दिक्कत हुई। राहुल : सही बात है, वो खुद खा ले रहा होगा और माल सही जगह पहुंचा नहीं रहा होगा, तभी तो काम नहीं बना आपका। रिपोर्टर : जी, देखिए, आपसे फ्रंट पर बात हो गई, आप विभागीय हो इसलिए सिस्टम पता है। राहुल : बीच का आदमी जो होता है न, वो सही जगह पहुंचता ही नहीं है, तभी काम रुका रहता है। राहुल : एक बिल्डिंग थी, जिसमें माल सही जगह पहुंचा ही नहीं, इतनी कार्रवाई हो गई कि पांच करोड़ खर्च करना पड़ा। लखनऊ में इन्वेस्टिगेशन के दौरान ही जीडीए के क्लर्क निर्मल सिंह का इनपुट मिला, जो पैसे लेकर अवैध निर्माण कराता है। अधिकारियों के कट की डील भी निर्मल करता है। भास्कर के अंडरकवर रिपोर्टर पुराने मकान को गिराकर उसकी जगह अपार्टमेंट बनाने का प्लान निर्मल सिंह के पास पहुंचे। प्लॉट को कमर्शियल इस्तेमाल में लाने से जुड़े कागजात भी साथ ले गए। रिपोर्टर ने बताया कि एक प्लॉट खरीदने की बातचीत चल रही है, लेकिन सामने सिर्फ 15 फीट की सड़क है। वहां फ्लैट बनाकर बेचना संभव होगा या नहीं? निर्मल सिंह ने प्लॉट का वीडियो मांगा और डील फाइनल की- निर्मल : खाली प्लॉट है? रिपोर्टर : हां जी, खाली प्लॉट है। मंदिर के पास थोड़ा अंदर गली में है। निर्मल : ठीक है, परचेज कर लीजिए, काम हो जाएगा। रिपोर्टर : रोड बस 15 फीट की है, फ्लैट बनाकर बेचना है। निर्मल : फ्रंट कितना है, बैक कितना है? रिपोर्टर : रेक्टेंगल में है प्लॉट, मान के चलिए मंदिर से 300 से 350 फीट अंदर है। निर्मल : वीडियो मंगाइए, काम हो जाएगा। क्लर्क बोला- मंथली का पेमेंट फिक्स कीजिए रिपोर्टर ने एक पुराने मकान का वीडियो क्लर्क निर्मल को सेंड कर दिया। वीडियो में पुराना घर दिख रहा था और निर्माण से जुड़ी एक्टिविटी भी दिख रही थी। वीडियो देखने के बाद निर्मल सिंह ने फोन कर रिपोर्टर को ऑफिस बुला लिया। रिपोर्टर जीडीए कार्यालय पहुंचा। रिपोर्टर : कितना बजट लेकर चलें? क्या लगेगा, वो बताइए। निर्मल : इसमें होता क्या है, मंथली आपका फिक्स हो जाता है। लेकिन रेट फ्लोर के हिसाब से लगता है, एक लाख लगता है। ये रेट 100 स्क्वायर मीटर पर है। रिपोर्टर : ये लीगल वाला तो है नहीं, सुविधा शुल्क वाला है? निर्मल : हां ये वही वाला है, जिसमें कोई जाकर आपका काम न बंद कराए। यही सुविधा दी जाती है। रिपोर्टर : टोटल कितना लगेगा, जरा बता दीजिए। निर्मल : टोटल 2 लाख 96 हजार रुपए के आसपास लगेगा। रिपोर्टर : मोटा-मोटी 6 से 7 महीने लगेंगे मकान बनने में। निर्मल : कोई इंजीनियर है आपके पास? रिपोर्टर : है हमारे पास, क्यों, क्या हुआ? निर्मल : नहीं, कहने का मतलब इंजीनियर ऐसा हो, जिससे फाइल न फंसे। रिपोर्टर : तो एक काम करिए, इंजीनियर भी आप ही दे दीजिए, जो पैसा लगेगा, हम दे देंगे। रिपोर्टर : अरे, उसी के लिए तो आप बैठे हैं। फाइनल बताइए कितना लगेगा? पद के हिसाब से अफसरों का कमीशन बातचीत के दौरान निर्मल सिंह ने जमीन से जुड़े तकनीकी सवाल पूछे। रिपोर्टर ने अपने एक सोर्स के जरिए फोन पर जमीन के मालिक से उनकी बात कराई। इसके बाद निर्मल सिंह ने विभागीय इंजीनियर से भी फोन पर बात की। आगे की बातचीत में रकम, उसके बंटवारे और निर्माण के दौरान आने वाली शिकायतों को लेकर पूरी डील हुई। निर्मल : जो लीगल है, वो लीगल रहने दीजिए, हमें तो इलीगल को लीगल करना है। रिपोर्टर : कितना देना होगा? निर्मल : हर फ्लोर पर 3 लाख मंथली देना होगा। चाहे आप तीन महीने में बनाएं या छह महीने में, ये तो देना ही है। रिपोर्टर : ये अमाउंट किसको देना होगा? निर्मल : ये हमारे थ्रू ही जाएगा। सब सिस्टम होता है, डिस्ट्रीब्यूट हो जाता है सब जगह। रिपोर्टर : वीसी साहब तक भी जाएगा? निर्मल : हां, सब लोग, इसमें सारे लोग इन्वॉल्व होते हैं। रिपोर्टर : कोई दिक्कत तो नहीं आएगी न? निर्मल : नहीं, कोई दिक्कत नहीं आएगी। अब प्राधिकरण में अफसरों के रिश्वत की रेट लिस्ट देखिए… विजिलेंस के एक्शन से बदला रिश्वत का ट्रेंड यूपी में रिश्वतखोरों के खिलाफ चल रहे विजिलेंस के एक्शन से प्राधिकरण के अफसरों ने रिश्वत का ट्रेंड बदल दिया है। अब अपरिचित से पैसे की डील से बच रहे हैं और एजेंट के हाथों पैसा ले रहे हैं। इसके लिए वसूली की कुल रकम में एजेंट को 10 से 20% दिया जा रहा है। भ्रष्टाचार के 3 नमूने देखिए… 1. कमर्शियल इस्तेमाल की मंजूरी के लिए रिश्वत, 15 स्टूडेंट्स की मौत 22 जून, 2026 को लखनऊ के अलीगंज में 3 मंजिला बिल्डिंग में आग लग गई। इसमें 15 छात्रों मौत हो गई। बिल्डिंग पर अवैध निर्माण को लेकर 2016 में ध्वस्तीकरण का आदेश जारी हुआ था, जिसे बाद में वापस ले लिया गया था। यहां आपातकालीन एग्जिट की जगह लिफ्ट लगा दी गई थी। LDA ने 18 इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी। 2. बिना नक्शा पास कराए बन रही थी बिल्डिंग, स्लैब गिरने से 11 घायल 12 अक्टूबर, 2026 को गाजियाबाद में निर्माणाधीन बिल्डिंग की छत का स्लैब गिर गया। इस घटना में 4 साल के मासूम समेत 11 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। जांच में सामने आया कि बिल्डिंग का नक्शा पास नहीं था, प्राधिकरण के अधिकारियों को रिश्वत देकर निर्माण कराया जा रहा था। 3. तीन फ्लोर का नक्शा, सील खाेलकर बनाया 6 मंजिला लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को रिश्वत देकर 3 फ्लोर में पास एक प्लॉट पर 6 मंजिला बिल्डिंग बना दी गई। 30 सितंबर, 2026 को बिल्डिंग धंसने लगी और पिलर क्रैक होने लगे। जांच में खुलासा हुआ कि अवैध रूप से बनी बिल्डिंग को सील किया गया था, लेकिन रिश्वत लेकर अफसरों ने खुलवा दिया। प्राधिकरण में रिश्वतखोरी कैसे रुकेगी इन्वेस्टिगेशन के दौरान रिपोर्टर ने एक्सपर्ट से बात कर विकास प्राधिकरण में चल रही रिश्वतखोरी की जड़ को समझने की कोशिश की। एडवोकेट, पुलिस के रिटायर्ड अफसर और प्राधिकरण के रिटायर्ड अधिकारियों से बात की। इसमें 5 खामियां सामने आईं… 1. प्राधिकरण की फाइलों का डिजिटलाइजेशन नहीं किया- रिश्वतखोरी रोकने के लिए कामकाज में पारदर्शिता जरूरी है। कुछ अधिकारी नहीं चाहते कि पूरा सिस्टम पारदर्शी हो। इसी वजह से ज्यादातर काम डिजिटल नहीं हो पाए। 2. मामलों के निपटारे की समय सीमा तय नहीं- विकास प्राधिकरण में सिटीजन चार्टर की व्यवस्था नहीं होने से मामलों के निपटारे में देरी होती है। इसी देरी का फायदा उठाकर रिश्वत मांगी जाती है। 3. लंबे समय से अधिकारी-कर्मचारियों का ट्रांसफर नहीं- विकास प्राधिकरण में अधिकारियों की लंबे समय तक एक ही पद पर तैनाती ठीक नहीं है। कुछ अधिकारी लंबे समय तक एक ही जगह रहकर रिश्वतखोरी का पूरा सिस्टम चला लेते हैं। 4. डॉक्यूमेंट में पारदर्शिता नहीं है- सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी भी कई बार अधूरी दी जाती है। आम लोगों से जुड़े डॉक्यूमेंट को लेकर भी प्राधिकरण में पारदर्शिता की कमी है। 5. शिकायतों की निष्पक्ष जांच नहीं होती- विकास प्राधिकरण में भ्रष्टाचार की शिकायतों को दबा दिया जाता है। कार्रवाई करने के बजाय संबंधित अधिकारियों पर आरोपियों से समझौता करने के आरोप भी लगते हैं। ------------------------------- यह खबर भी पढ़ें- रेप-डकैती के आरोपी, पुलिस से बचने के लिए 'बाबा' बने, यूपी में तंत्र-मंत्र से बच्चा पैदा करने का दावा कर रहे झांसी का दिव्य दरबार…तंत्र-मंत्र के बीच दंडवत करते अनुयायी। ऊंचे तख्त पर ‘ज्ञान’ दे रहे बाबा के सामने अफसर और नेता भी मत्था टेक रहे हैं। 22 साल बाद पुलिस को पता चला ‘ज्ञान’ देने वाला यह बाबा लूट और किडनैपिंग का आरोपी है। 5 दिन पहले (11 अक्टूबर) झांसी से गिरफ्तार काली सरकार बाबा (असली नाम प्रदीप शुक्ला) की पोल खुलने के बाद दैनिक भास्कर ने इन्वेस्टिगेशन किया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

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