आंगनबाड़ी केंद्रों पर भोजन बनाने वाले रसोइयों का पारिश्रमिक लंबित:श्रावस्ती में 5 साल से भुगतान न मिलने का आरोप, मिड-डे मील का पैसा मिल रहा
श्रावस्ती में परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत रसोइयों से आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी नौनिहालों के लिए भोजन तैयार कराया जा रहा है। रसोइयों का आरोप है कि इसके एवज में निर्धारित एक रुपये का पारिश्रमिक उन्हें कई वर्षों से नहीं मिला है। मंगलवार सुबह रसोइयों ने जिला प्रशासन से मामले में तत्काल कार्रवाई कराकर बकाया पारिश्रमिक दिलाने की मांग की। रसोइया रजनी, चमेली, मुन्नी देवी, कुंती समेत बड़ी संख्या में रसोइयों का कहना है कि उन्हें परिषदीय विद्यालयों में मिड-डे मील तैयार करने का पारिश्रमिक तो मिल रहा है, लेकिन आंगनबाड़ी केंद्रों पर भोजन बनाने के लिए निर्धारित राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा। उनका कहना है कि वे नियमित रूप से आंगनबाड़ी केंद्रों पर भोजन तैयार कर बच्चों को खिलाती हैं, इसके बावजूद वर्षों से उनका भुगतान लंबित है। रसोइया रजनी देवी ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों का भोजन भी उनके द्वारा तैयार किया जा रहा है, लेकिन इसके बदले मिलने वाला पैसा नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि परिषदीय विद्यालय में भोजन बनाने का पारिश्रमिक नियमित रूप से मिल रहा है, लेकिन आंगनबाड़ी केंद्रों पर भोजन तैयार करने की निर्धारित राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है। वहीं चमेली देवी का आरोप है कि करीब पांच वर्षों से आंगनबाड़ी केंद्र पर भोजन बनाने के एवज में उन्हें एक रुपया भी नहीं मिला है। अन्य रसोइयों ने भी इसी तरह की समस्या बताते हुए प्रशासन से बकाया भुगतान कराने की मांग की है। हॉट कुक्ड योजना में 8.50 रुपए प्रति बच्चे की दर से राशि मामले को लेकर जनवरी 2026 में हॉट कुक्ड योजना में वित्तीय अनियमितता के आरोप भी सामने आए थे। शिकायतकर्ता मनोज पाठक ने तत्कालीन जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर योजना की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। शिकायत के अनुसार, तीन से छह वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को गर्म भोजन उपलब्ध कराने के लिए प्रति बच्चे 8.50 रुपये की दर से धनराशि ग्राम प्रधान और आंगनबाड़ी कार्यकत्री के संयुक्त खाते में भेजी जाती थी। योजना के प्रावधान के मुताबिक इसमें 7 रुपये भोजन सामग्री, एक रुपया रसोइया के पारिश्रमिक और 50 पैसे आंगनबाड़ी सहायिका के लिए निर्धारित थे। रसोइयों और सहायिकाओं को भुगतान नहीं मिलने का आरोप रसोइयों का आरोप है कि योजना लागू होने के कई वर्ष बाद भी उन्हें निर्धारित एक रुपये का पारिश्रमिक नहीं मिल सका। इसी तरह आंगनबाड़ी सहायिकाओं को भी निर्धारित 50 पैसे का भुगतान नहीं होने की बात सामने आई है। रसोइयों का कहना है कि वे अपनी जिम्मेदारी के तहत लगातार बच्चों के लिए भोजन तैयार कर रही हैं, लेकिन इसके एवज में मिलने वाला पारिश्रमिक लंबित है। रसोइयों ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराकर यह पता लगाने की मांग की है कि योजना के तहत भेजी गई धनराशि का उपयोग किस मद में किया गया और निर्धारित पारिश्रमिक का भुगतान क्यों नहीं हुआ। विभाग बोला- बिल वाउचर लगाया, जल्द होगा भुगतान रसोइयों की शिकायत पर विभाग का कहना है कि भुगतान की प्रक्रिया के लिए बिल-वाउचर लगाया गया है। विभाग के अनुसार जल्द ही रसोइयों का बकाया पारिश्रमिक भुगतान किया जाएगा। वहीं रसोइयों ने प्रशासन से मांग की है कि भुगतान में देरी की जांच कराकर वर्षों से लंबित राशि उन्हें जल्द दिलाई जाए।
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