आनंद घाट पर सर्वपितृ अमावस्या के साथ पितृपक्ष संपन्न:उन्नाव के तर्पण-पिंडदान कर पूर्वजों को दी विदाई, सुख-शांति की कामना
उन्नाव के आनंद घाट पर पितृपक्ष शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के साथ संपन्न हो गया। 15 दिनों तक चले इस पर्व के अंतिम दिन लोगों ने अपने पूर्वजों को तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य कर विदाई दी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सर्वपितृ अमावस्या पर उन सभी पितरों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती या जिनका श्राद्ध पितृपक्ष के दौरान नहीं हो पाता। इसे महालय अमावस्या भी कहते हैं। लोगों ने सुबह स्नान के बाद पूर्वजों के निमित्त जल अर्पित किया। तिल, कुश और जल से तर्पण कर पितरों का स्मरण किया गया। कई परिवारों ने पंडितों से श्राद्ध और पिंडदान कराया। इसके बाद जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और अन्य सामग्री दान की गई। कुछ परिवारों ने ब्राह्मण भोज भी कराया। पितृपक्ष पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का विशेष अवसर माना जाता है। बुजुर्गों के अनुभव, उनके संस्कार और परिवार के लिए किए गए त्याग को याद कर नई पीढ़ी को उनसे परिचित कराया जाता है। पूर्वजों के प्रति सम्मान की यह परंपरा परिवार को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ती है। धार्मिक जानकारों के अनुसार, श्राद्ध का मूल भाव श्रद्धा और स्मरण है। इस अवसर पर जरूरतमंदों की सहायता करना, भोजन कराना और सेवा के कार्य करना भी पुण्यकारी माना जाता है। पितृपक्ष के समापन के साथ ही लोगों ने अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए उनसे परिवार की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)