'आयुष्मान कार्ड से इलाज चाहिए तो मोदी-योगी के पास जाओ':कानपुर में प्राइवेट अस्पताल ने 4 लाख वसूले, पत्नी ने गहने गिरवी रखे

Oct 19, 2026 - 19:04
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'आयुष्मान कार्ड से इलाज चाहिए तो मोदी-योगी के पास जाओ':कानपुर में प्राइवेट अस्पताल ने 4 लाख वसूले, पत्नी ने गहने गिरवी रखे
कानपुर के चौबेपुर में आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद इलाज में मदद नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए एक परिवार ने अपनी परेशानी बताई है। प्रतापपुर निवासी शशिकांत (43) पेट दर्द और बुखार से पीड़ित हुए तो पत्नी नीलम उन्हें लेकर एक के बाद एक चार अस्पतालों में पहुंचीं। परिवार का दावा है कि इलाज में करीब 4 लाख रुपए खर्च हो गए। रकम जुटाने के लिए नीलम को घर के जेवर बेचने या गिरवी रखने पड़े और परिचितों से कर्ज लेना पड़ा। अब परिवार के सामने कर्ज चुकाने के साथ चार बच्चों की पढ़ाई जारी रखने की चुनौती है। नीलम का आरोप है कि गुरुदेव पैलेस स्थित लखनपुर हॉस्पिटल में करीब 2 लाख रुपए खर्च होने के बावजूद उन्हें आयुष्मान कार्ड से इलाज की सुविधा नहीं मिली। उनके मुताबिक, कार्ड से इलाज कराने का अनुरोध करने पर कहा गया, ‘आयुष्मान कार्ड से इलाज कराना है तो मोदी-योगी के पास जाओ, हमारे पास सुविधा नहीं है।’ हालांकि, इस आरोप पर अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने आना बाकी है। पहले प्रकाश, फिर विश्वास और लखनपुर हॉस्पिटल पहुंचे चौबेपुर क्षेत्र के प्रतापपुर निवासी शशिकांत खेती-किसानी और मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं। वह बटाई पर खेती करने के साथ खाली समय में मजदूरी भी करते हैं। पत्नी नीलम के मुताबिक, कुछ समय पहले शशिकांत को पेट दर्द और बुखार की शिकायत हुई। परिवार उन्हें पहले चौबेपुर स्थित प्रकाश हॉस्पिटल ले गया, लेकिन वहां इलाज से राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्हें कल्याणपुर की पुराना शिवली रोड स्थित विश्वास हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। नीलम का कहना है कि यहां इलाज में करीब 20 हजार रुपए खर्च हुए, लेकिन पति की हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद परिजन उन्हें गुरुदेव पैलेस स्थित लखनपुर हॉस्पिटल ले गए। 2 लाख खर्च होने के बाद भी कार्ड से इलाज नहीं मिलने का आरोप नीलम के मुताबिक, लखनपुर हॉस्पिटल में इलाज के दौरान करीब 2 लाख रुपए खर्च हो गए। उन्हें उम्मीद थी कि आयुष्मान कार्ड के जरिए इलाज का खर्च कम हो जाएगा। उन्होंने अस्पताल में कार्ड से इलाज करने का अनुरोध किया, लेकिन उनका दावा है कि उन्हें योजना का लाभ नहीं मिला। नीलम ने आरोप लगाया कि कार्ड से इलाज कराने की बात कहने पर उन्हें मोदी-योगी के पास जाने के लिए कहा गया। परिवार का सवाल है कि यदि इलाज आयुष्मान योजना के तहत संभव था, तो उन्हें इसका लाभ क्यों नहीं दिया गया। हालांकि, यह स्पष्ट होना बाकी है कि संबंधित अस्पताल में शशिकांत की बीमारी के इलाज के लिए योजना का पैकेज उपलब्ध था या नहीं और वह उस समय योजना की शर्तों के तहत पात्र थे या नहीं। अलका हॉस्पिटल से भी नहीं मिली राहत परिजनों के मुताबिक, लखनपुर हॉस्पिटल के बाद वे अलका हॉस्पिटल पहुंचे। वहां उन्हें बताया गया कि आयुष्मान कार्ड के तहत इलाज की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके बाद शशिकांत को कल्याणपुर स्थित राम हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज हुआ। परिवार का दावा है कि अलग-अलग अस्पतालों में इलाज के दौरान कुल खर्च करीब 4 लाख रुपए तक पहुंच गया। खेती और मजदूरी से परिवार चलाने वाले शशिकांत के लिए इतनी बड़ी रकम जुटाना संभव नहीं था। ऐसे में पत्नी नीलम को आर्थिक मदद के लिए दूसरों के सामने हाथ फैलाना पड़ा। जेवर गिरवी रखे, परिचितों से लिया कर्ज नीलम गृहिणी हैं। उन्होंने बताया कि पति के इलाज में परिवार की जमा पूंजी खत्म हो गई। इलाज का खर्च उठाने के लिए घर के जेवर बेचने या गिरवी रखने पड़े। इसके अलावा आसपास के लोगों और परिचितों से भी कर्ज लेना पड़ा। अब परिवार पर इलाज के खर्च के साथ कर्ज चुकाने का दबाव भी है। शशिकांत की कमाई पर निर्भर परिवार के सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल होता जा रहा है। शशिकांत और नीलम के चार बच्चे हैं। इनमें 16 वर्षीय शिवानी कक्षा 11, 14 वर्षीय प्रिया कक्षा 9, 11 वर्षीय शिवांश कक्षा 6 और 5 वर्षीय काव्या कक्षा 1 में पढ़ती है। परिवार का कहना है कि इलाज में बड़ी रकम खर्च होने और कर्ज बढ़ने से बच्चों की पढ़ाई जारी रखना चुनौती बन गया है। एक ओर पति के इलाज का खर्च और कर्ज चुकाने की चिंता है, तो दूसरी ओर बच्चों की शिक्षा और परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी। योजना के लाभ की जांच जरूरी आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र परिवारों को निर्धारित शर्तों के अनुसार सूचीबद्ध अस्पतालों में स्वीकृत उपचार पैकेज के तहत कैशलेस इलाज मिलता है। केवल कार्ड होने से हर अस्पताल में हर बीमारी का इलाज स्वतः निःशुल्क नहीं हो जाता। इस मामले में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित अस्पताल योजना के तहत सूचीबद्ध थे या नहीं, शशिकांत की पात्रता क्या थी और उनके इलाज के लिए स्वीकृत पैकेज उपलब्ध था या नहीं। परिवार के आरोपों पर संबंधित अस्पतालों और स्वास्थ्य विभाग का पक्ष भी सामने आना चाहिए। इससे स्पष्ट हो सकेगा कि परिवार को योजना का लाभ क्यों नहीं मिला और इसके लिए किसकी जिम्मेदारी बनती है।

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