अलीगढ़ में 9000 वोट घटे, 25% की मैपिंग पर सवाल:स्नातक MLC चुनाव: भाजपा-सपा में जोरआजमाइश, सजातीय प्रत्याशियों ने बढ़ाई चुनौती
विधान परिषद की आगरा स्नातक सीट पर 23 अक्टूबर को मतदान होना है। चुनाव प्रचार अंतिम दौर में है और भाजपा-सपा समेत सभी दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है। मगर अलीगढ़ में प्रत्याशियों के सामने प्रचार के साथ दो बड़ी चुनौतियां भी हैं। पहली, पिछले चुनाव के मुकाबले करीब 9 हजार मतदाताओं की कमी और दूसरी, करीब 25% वोटरों के पोलिंग सेंटर की मैपिंग में गड़बड़ी की शिकायत। अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद मतदान केंद्रों को लेकर उठे सवालों के बीच भाजपा ने मैपिंग लिस्ट जारी कर दी है। अब प्रत्याशियों की कोशिश मतदाताओं तक पहुंचने के साथ उन्हें सही पोलिंग सेंटर की जानकारी देने की भी है।
12 जिलों में 1.92 लाख वोटर, अलीगढ़ सबसे आगे
आगरा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 12 जिले शामिल हैं। अंतिम मतदाता सूची के अनुसार, पूरी सीट पर करीब 1.92 लाख मतदाता हैं। इनमें अलीगढ़ करीब 38 हजार वोटरों के साथ पहले स्थान पर है। आगरा में करीब 25 हजार और इटावा में लगभग 20 हजार मतदाता हैं। इस तरह अलीगढ़ में सबसे अधिक वोटर होने से यहां का चुनावी गणित पूरी सीट के लिहाज से महत्वपूर्ण हो गया है।
पिछले चुनाव के 47 हजार वोटर, अब करीब 38 हजार
अलीगढ़ में पिछले स्नातक MLC चुनाव के दौरान करीब 47 हजार मतदाता थे। इस बार अंतिम सूची में यह संख्या घटकर लगभग 38 हजार रह गई है। यानी जिले में करीब 8-9 हजार मतदाता कम हो गए हैं। इस गिरावट को लेकर भाजपा और सपा के समर्थक अपने-अपने तर्क दे रहे हैं। भाजपा का कहना है कि उसने बड़ी संख्या में वोट बनवाए हैं। वहीं, सपा समर्थकों का कहना है कि प्रत्याशी की घोषणा देर से होने के कारण मतदाता बनाने के अभियान में कुछ दिक्कतें आईं। हालांकि, मतदाताओं की संख्या घटने के वास्तविक कारण स्पष्ट नहीं हैं। कम वोटर होने का किस प्रत्याशी पर कितना असर पड़ेगा, इसका आकलन भी अभी संभव नहीं है।
मानवेंद्र के सामने अंबरीश, शशांक को दक्ष से चुनौती
आगरा स्नातक सीट पर भाजपा से मौजूदा MLC डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह दूसरी बार चुनाव मैदान में हैं। सपा ने शशांक यादव को प्रत्याशी बनाया है। दोनों प्रमुख दलों के बीच मुकाबले में सजातीय प्रत्याशियों की मौजूदगी भी चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकती है। डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह के सामने अवागढ़ राजपरिवार से जुड़े अंबरीश पाल सिंह मैदान में हैं, जबकि शशांक यादव के सामने आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी दक्ष यादव हैं। राजनीतिक हलकों में इनकी मौजूदगी को सजातीय वोटों के संभावित बंटवारे से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, वोटों का वास्तविक बंटवारा कितना होगा, यह मतदान के बाद ही स्पष्ट होगा।
25% वोटरों के पोलिंग सेंटर दूर होने का दावा
अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद पोलिंग सेंटर की मैपिंग को लेकर भी परेशानी सामने आई है। प्रत्याशियों और उनके समर्थकों का दावा है कि करीब 25% मतदाताओं के मतदान केंद्र उनके निवास क्षेत्र के नजदीक नहीं हैं। कई वोटरों का केंद्र उनके मोहल्ले से दूर होने की शिकायत है। इसे मैपिंग प्रक्रिया में हुई चूक से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, प्रभावित मतदाताओं की संख्या और मैपिंग में गड़बड़ी के इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
भाजपा ने जारी की मैपिंग लिस्ट, वोटरों तक पहुंचाने में जुटे कार्यकर्ता
पोलिंग सेंटर खोजने में मतदाताओं को परेशानी न हो, इसके लिए भाजपा ने मैपिंग लिस्ट जारी की है। इसमें मतदाताओं को उनके मोहल्ले और संबंधित मतदान केंद्र की जानकारी दी जा रही है। चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में कार्यकर्ता इस सूची के जरिए वोटरों तक पहुंच रहे हैं। सपा भी अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं के माध्यम से जनसंपर्क और चुनावी रणनीति पर काम कर रही है।
कम वोटर और मैपिंग, मतदान से पहले दो बड़ी चुनौतियां
अलीगढ़ में मतदाताओं की संख्या में गिरावट और मतदान केंद्रों की मैपिंग को लेकर उठे सवाल चुनावी तैयारियों के अहम मुद्दे बन गए हैं। दलों के सामने अपने समर्थकों तक पहुंचने के साथ यह सुनिश्चित करने की चुनौती है कि मतदाताओं को उनके मतदान केंद्र की सही जानकारी हो। 23 अक्टूबर को होने वाले मतदान में इन समस्याओं का कितना असर पड़ेगा, यह अभी कहना जल्दबाजी होगी। फिलहाल, अंतिम चरण में चुनावी मुकाबला तेज है और अलीगढ़ के मतदाता पूरी आगरा स्नातक सीट के समीकरण में अहम बने हुए हैं।
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