गैंग चार्ट की मंजूरी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, बहराइच के एसपी और डीएम को लगाई फटकार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैंगस्टर्स अधिनियम के तहत गैंग चार्ट को मंजूरी देने की प्रक्रिया पर सख्त टिप्पणी की है। बहराइच के पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अदालत ने कहा कि अधिकारियों को स्वतंत्र विवेक और निष्पक्षता के साथ गैंग चार्ट की जांच करनी चाहिए। अदालत ने मामले से जुड़ी पूरी आपराधिक कार्रवाई रद्द कर दी।
दि राइजिंग न्यूज | लखनऊ | 19 सितंबर 2026
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैंगस्टर्स अधिनियम के तहत तैयार किए जाने वाले गैंग चार्ट को लेकर सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने बहराइच के पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी को बिना पर्याप्त विचार और निष्पक्षता के गैंग चार्ट को मंजूरी देने पर फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में अधिकारियों को अपने विवेक का स्वतंत्र रूप से इस्तेमाल करना जरूरी है।न्यायमूर्ति मनीष माथुर की लखनऊ पीठ ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों को संवैधानिक अदालतों द्वारा समय-समय पर दिए गए उन फैसलों की जानकारी होनी चाहिए, जिनमें गैंगस्टर्स अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू करने से पहले सावधानी और निष्पक्षता बरतने पर जोर दिया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि गैंग चार्ट को केवल औपचारिक प्रक्रिया मानकर मंजूरी नहीं दी जा सकती।
किस मामले में हुई सुनवाई
अदालत यह टिप्पणी बब्बू शाह की याचिका पर सुनवाई के दौरान कर रही थी। याचिकाकर्ता ने बहराइच के पयागपुर थाने में अपने खिलाफ गैंगस्टर्स अधिनियम के तहत शुरू की गई कार्रवाई को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने गैंग चार्ट तैयार करने और उसे मंजूरी देने की प्रक्रिया की जांच की।अदालत ने पाया कि संबंधित दस्तावेजों में यह स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं था कि याचिकाकर्ता की आपराधिक पृष्ठभूमि की उचित जांच की गई थी। न्यायालय ने इसी आधार पर अधिकारियों द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाया और कहा कि ऐसे मामलों में पूरी सावधानी और स्वतंत्र विवेक के साथ निर्णय लिया जाना चाहिए।
क्या होता है गैंग चार्ट
गैंग चार्ट वह महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जिसके आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ गैंगस्टर्स अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू करने का प्रस्ताव तैयार किया जाता है। इसमें संबंधित व्यक्ति के कथित आपराधिक इतिहास, संगठित आपराधिक गतिविधियों से संबंध और उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई शुरू करने के आधारों का उल्लेख किया जाता है।इस दस्तावेज को तैयार करने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा इसकी जांच की जाती है। पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी जैसे अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है कि वे उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों को ध्यान से देखकर अपनी स्वतंत्र संतुष्टि दर्ज करें। अदालत ने इसी प्रक्रिया में सावधानी और निष्पक्षता की आवश्यकता पर जोर दिया।
एसपी ने 11 नवंबर को दी मंजूरी
मामले में बहराइच के पुलिस अधीक्षक ने 11 नवंबर 2021 को गैंग चार्ट को मंजूरी दी थी। इसके बाद जिलाधिकारी ने 15 नवंबर 2021 को उसे स्वीकार कर लिया। अदालत ने मंजूरी दिए जाने के इस क्रम पर भी गंभीर सवाल उठाए।न्यायालय ने कहा कि दोनों अधिकारियों के आदेशों का क्रम यह संकेत देता है कि आवश्यक स्तर पर एक-दूसरे से उचित विचार-विमर्श नहीं किया गया। अदालत के अनुसार, गैंग चार्ट को मंजूरी देना केवल दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसके गंभीर आपराधिक परिणाम हो सकते हैं।
अधिकारियों को स्वतंत्र विवेक से लेना होगा फैसला
हाईकोर्ट ने कहा कि गैंग चार्ट को मंजूरी देने से पहले संबंधित व्यक्ति की आपराधिक पृष्ठभूमि की उचित तरीके से जांच की जानी चाहिए। अधिकारियों को उपलब्ध तथ्यों पर स्वतंत्र रूप से विचार करना चाहिए और अपनी संतुष्टि स्पष्ट रूप से दर्ज करनी चाहिए।अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के खिलाफ गैंगस्टर्स अधिनियम जैसी कड़ी कार्रवाई शुरू करने में निष्पक्षता बेहद जरूरी है। वरिष्ठ अधिकारियों को यह देखना चाहिए कि कार्रवाई कानून के निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं और उपलब्ध सामग्री वास्तव में कार्रवाई को उचित ठहराती है या नहीं।
हाईकोर्ट ने पूरी कार्रवाई की रद्द
अदालत ने गैंग चार्ट की मंजूरी की प्रक्रिया को कानूनी रूप से अनुचित पाते हुए उससे जुड़ी आगे की कार्रवाई भी रद्द कर दी। न्यायालय ने 15 नवंबर 2021 के गैंग चार्ट के साथ 19 फरवरी 2022 की आरोप पत्र संबंधी कार्रवाई और 7 दिसंबर 2022 के संज्ञान एवं समन आदेश को भी निरस्त कर दिया।इसके साथ ही बहराइच में दर्ज इस मामले से जुड़ी पूरी आपराधिक कार्रवाई को रद्द कर दिया गया। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को संवैधानिक अदालतों द्वारा तय कानूनी सिद्धांतों का पालन करने और सरकारी कार्रवाई में निष्पक्षता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
अदालत ने अधिकारियों को क्या संदेश दिया
इस मामले में हाईकोर्ट की टिप्पणी का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि गैंगस्टर्स अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू करने से पहले अधिकारियों को उपलब्ध सामग्री की गंभीरता से जांच करनी चाहिए। केवल पुलिस की ओर से तैयार किए गए दस्तावेज के आधार पर औपचारिक मंजूरी देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता।अदालत ने अधिकारियों को यह भी याद दिलाया कि उनके फैसलों के गंभीर कानूनी परिणाम हो सकते हैं। इसलिए गैंग चार्ट की जांच करते समय व्यक्ति की आपराधिक पृष्ठभूमि, उपलब्ध साक्ष्यों और कार्रवाई के कानूनी आधार पर स्वतंत्र रूप से विचार करना आवश्यक है।
मुख्य बातें
- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैंग चार्ट की मंजूरी को लेकर सख्त टिप्पणी की।
- बहराइच के पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी की प्रक्रिया पर अदालत ने सवाल उठाए।
- अदालत ने कहा कि गैंग चार्ट को महज औपचारिक प्रक्रिया नहीं माना जा सकता।
- संबंधित व्यक्ति की आपराधिक पृष्ठभूमि की उचित जांच जरूरी बताई गई।
- हाईकोर्ट ने गैंग चार्ट, आरोप पत्र, संज्ञान और समन से जुड़ी कार्रवाई रद्द कर दी।
- अदालत ने अधिकारियों को निष्पक्षता और स्वतंत्र विवेक के साथ निर्णय लेने का निर्देश दिया।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)