अल्मोड़ा आपदा से मिला प्रशासन का सबक:LU में अनूप पांडेय ने साझा किया अनुभव, जनभागीदारी पर दिया जोर
आपदा के समय प्रशासन को तेजी से काम करना पड़ता है। संकट से निपटने के लिए प्रशासन और लोगों के बीच तालमेल जरूरी है।” उत्तर प्रदेश के पूर्व चुनाव आयुक्त और पूर्व मुख्य सचिव डॉ. अनूप चंद्र पांडेय ने 1993 की अल्मोड़ा आपदा का उदाहरण देते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में प्रशासन के सही फैसले और लोगों का सहयोग हालात को संभालने में अहम भूमिका निभाता है। 1993 की अल्मोड़ा आपदा को बताया उदाहरण डॉ. अनूप चंद्र पांडेय ने लखनऊ विश्वविद्यालय के लोक प्रशासन विभाग में आयोजित ‘किस्सा प्रशासन का : अध्याय-1—विकसित भारत@2047’ कार्यक्रम में अल्मोड़ा आपदा को उदाहरण के तौर पर रखा। उन्होंने अपने प्रशासनिक अनुभव साझा करते हुए बताया कि आपदा के समय किस तरह की दिक्कतें सामने आती हैं और प्रशासन को उनसे कैसे निपटना होता है। अच्छे शासन में लोगों की भागीदारी जरूरी उन्होंने कहा कि अच्छा शासन तभी संभव है, जब प्रशासन लोगों की बात सुने और सरकारी योजनाओं का फायदा सही लोगों तक पहुंचे। प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ लोगों की भागीदारी भी जरूरी है। विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में प्रशासन की भूमिका अहम है। ‘पीपल, पॉलिसीज, पॉसिबिलिटीज’ पर हुई चर्चा कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘पीपल, पॉलिसीज, पॉसिबिलिटीज’ यानी ‘जन, नीतियां और संभावनाएं’ रहा। इसमें विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को लेकर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि अच्छी नीतियां बनाने के साथ उन्हें सही तरीके से लागू करना भी जरूरी है। वैशाली सक्सेना ने आपदा प्रबंधन पर रखी बात लोक प्रशासन विभाग की अध्यक्ष प्रो. वैशाली सक्सेना ने कार्यक्रम की भूमिका रखी। उन्होंने ‘किस्सा प्रशासन’ के पहले अध्याय और आपदा प्रबंधन से जुड़ी बातों पर चर्चा की। उन्होंने मुश्किल समय में प्रशासन के सामने आने वाली चुनौतियों पर भी बात की। किस्सों के जरिए बात समझाने पर जोर कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. अरविंद मोहन ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि वास्तविक घटनाओं और किस्सों के जरिए किसी विषय को आसानी से समझाया जा सकता है। उन्होंने कार्यक्रम की अध्यक्षता भी की। विकसित भारत के लिए बेहतर प्रशासन पर चर्चा कार्यक्रम में अच्छे और जवाबदेह शासन को विकसित भारत के लिए जरूरी बताया गया। प्रशासन में पारदर्शिता, लोगों की भागीदारी और बेहतर कामकाज पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के लिए प्रशासन और लोगों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। शिक्षक और शोधार्थी रहे मौजूद कार्यक्रम में अंग्रेजी एवं आधुनिक यूरोपीय भाषाओं की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. मैत्री प्रियदर्शी, प्रो. नंदलाल भारती, डॉ. नंदिता कौशल, डॉ. सुशील चौहान, डॉ. अमन सिंह, शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्र मौजूद रहे। संचालन कौशाम्बी सिंह तोमर ने किया।
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