सहारनपुर कोर्ट ने बाप-बेटे को सुनाई उम्रकैद की सजा:8 साल पहले घर में घुसकर युवक के सिर में गोली मारकर की थी हत्या, 4 दिन बाद इलाज के दौरान हुई थी मौत
सहारनपुर कोर्ट ने 8 साल पुराने अलीशेर हत्याकांड में अभियुक्त बाप-बेटे को दोषी करार दिया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायालय संख्या-10 ने दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोनों पर 20-20 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने पत्रावली पर आए साक्ष्य और गवाहों की गवाही के आधार पर सजा सुनाई है। घर में घुसकर अलीशेर के सिर में मारी थी गोली एडीजीसी संजय कुमार ने बताया कि 14 मार्च 2018 की शाम करीब 7:15 बजे थाना कोतवाली देहात क्षेत्र में हुई थी। मुकर्रम का बेटा अलीशेर अपने घर में था। इसी दौरान नदीम और इकबाल तमंचे लेकर घर में घुस आए। आरोप है कि नदीम ने अलीशेर के सिर के पीछे गोली मार दी, जबकि इकबाल की ओर से किया गया फायर लोहे के गेट में लगा। गोली लगने से अलीशेर गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजन उसे सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां से हालत गंभीर होने पर उसे दिल्ली रोड स्थित मेगा सिटी अस्पताल रेफर किया गया। करीब चार दिन तक इलाज चलने के बाद 18 मार्च 2018 को अलीशेर की मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने मामले में हत्या की धारा 302 भी जोड़ दी। पुरानी रंजिश में की थी हत्या एडीजीसी ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच पहले से मुकदमेबाजी चल रही थी। मृतक अलीशेर की बहन शबनम की शादी आरोपी शौकीन से हुई थी। शबनम ने आरोपियों के खिलाफ दहेज का मुकदमा दर्ज कराया था। वहीं 5 जनवरी 2018 को शबनम और अलीशेर पर तेजाब डालने का मामला भी दर्ज हुआ था। अभियोजन ने इसी विवाद को हत्या की घटना की पृष्ठभूमि बताया। इस मामले में शौकीन को भी आरोपी बनाया गया था, लेकिन सुनवाई के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। इसके बाद 10 फरवरी 2023 को उसके खिलाफ न्यायिक कार्यवाही समाप्त कर दी गई। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 10 गवाह पेश किए गए। वादी मुकर्रम ने अपने बयान में कहा था कि घटना के समय उसका बेटा अलीशेर घर के अंदर आया था। इसी दौरान नदीम और इकबाल घर में आएं। नदीम ने अलीशेर के सिर में गोली मारी, जबकि इकबाल की ओर से किया गया फायर लोहे के गेट में लगा। इसके बाद दोनों धमकी देते हुए मौके से भाग गए। नदीम से तमंचा हुआ था बरामद पुलिस विवेचना में 22 मार्च 2018 को नदीम को सरकड़ी शेख गांव में गैस गोदाम के सामने से गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, तलाशी में उसके पास से 315 बोर का तमंचा और तीन जिंदा कारतूस बरामद हुए थे। बचाव पक्ष ने आरोपों से किया था इनकार एडीजीसी के अनुसार, सुनवाई के दौरान दोनों आरोपियों ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया और खुद को निर्दोष बताया। इकबाल की ओर से बचाव में कहा गया कि घटना के समय वो गांव में दूध निकलवाने गया था। बचाव पक्ष ने फुरकान और तेलूराम को गवाह के रूप में पेश किया। दोनों पक्षों की दलीलें और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद कोर्ट ने नदीम और इकबाल को दोषी ठहराया। बचाव पक्ष ने नदीम के बीटेक होने तथा इकबाल की अधिक उम्र और परिवार में अन्य कमाने वाला सदस्य नहीं होने का हवाला देते हुए कम सजा की मांग की। कोर्ट ने ये भी आदेश दिया कि जुर्माने की रकम वसूल होने पर उसकी आधी राशि मृतक अलीशेर की पत्नी को प्रतिकर के रूप में दी जाएगी।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)