AMU में पदोन्नति रोकने के लिए फर्जी ई-मेल का खेल?:कुलपति से शिक्षा मंत्रालय तक भेजे गए DPC में पक्षपात के आरोप, जॉइंट रजिस्ट्रार की पत्नी भी पदोन्नति प्रक्रिया में शामिल

Oct 11, 2026 - 18:11
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AMU में पदोन्नति रोकने के लिए फर्जी ई-मेल का खेल?:कुलपति से शिक्षा मंत्रालय तक भेजे गए DPC में पक्षपात के आरोप, जॉइंट रजिस्ट्रार की पत्नी भी पदोन्नति प्रक्रिया में शामिल
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में गैर-शिक्षण कर्मचारियों की पदोन्नति को लेकर विवाद पुलिस तक पहुंच गया है। विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाले फर्जी ई-मेल के मामले में विश्वविद्यालय के सात अधिकारियों ने संयुक्त रूप से FIR दर्ज कराई है। शिकायत करने वालों में रजिस्ट्रार कार्यालय के जॉइंट रजिस्ट्रार मोहम्मद आरिफुद्दीन अहमद भी शामिल हैं। उनकी पत्नी जेएनएमसीएच में सेक्शन ऑफिसर हैं और शिकायत के मुताबिक, उनका नाम भी संबंधित पदोन्नति प्रक्रिया में शामिल था। अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि फर्जी ई-मेल के जरिए पक्षपात और नियम बदलने के आरोप प्रसारित कर DPC को प्रभावित करने, पदोन्नति में देरी कराने और उनकी पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। सिविल लाइंस पुलिस ने रविवार को अज्ञात ई-मेल उपयोगकर्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच इंस्पेक्टर शिशुपाल शर्मा को सौंपी है। DPC के बीच वरिष्ठ अधिकारियों को भेजे गए ई-मेल FIR के मुताबिक, 5 अगस्त 2026 को deepakassociates2009@gmail.com से विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रतिकुलपति, कुलसचिव, वित्त अधिकारी, परीक्षा नियंत्रक सहित वरिष्ठ अधिकारियों और शिक्षा मंत्रालय के संबंधित अधिकारियों को ई-मेल भेजे गए थे। इनमें प्रस्तावित DPC और सहायक कुलसचिव पद के साक्षात्कार को लेकर कथित अनियमितताओं, नियम बदलने और कुछ कर्मचारियों को अनुचित लाभ देने के आरोप लगाए गए थे। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि ई-मेल में कुछ कर्मचारियों के व्यक्तिगत, व्यावसायिक और पारिवारिक संबंधों का भी उल्लेख किया गया। उन्होंने इन आरोपों को झूठा, निराधार और मानहानिकारक बताते हुए दावा किया कि इससे पदोन्नति प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए और अधिकारियों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करने का प्रयास किया गया। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि ई-मेल भेजने का मकसद DPC को स्थगित कराना, उसके फैसलों को प्रभावित करना या कुछ कर्मचारियों की पदोन्नति की संभावनाओं को नुकसान पहुंचाना हो सकता है। हालांकि, कथित उद्देश्य और आरोपों की सत्यता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। ई-मेल आईडी किसने बनाई, किसने भेजा? शिकायत में विवादित ई-मेल आईडी के निर्माण, इस्तेमाल और कथित तौर पर हटाए जाने की जांच की मांग की गई है। अधिकारियों ने पुलिस से पता लगाने को कहा है कि खाता किसने बनाया, किस मोबाइल नंबर या रिकवरी ई-मेल का इस्तेमाल हुआ, किन IP पतों से लॉग-इन किया गया और संदेश किस डिवाइस या नेटवर्क से भेजा गया। उन्होंने ई-मेल के पूर्ण हेडर, मेटाडेटा, टाइमस्टैम्प, लॉग-इन हिस्ट्री और ट्रांसमिशन रिकॉर्ड सुरक्षित कराने की मांग भी की है। शिकायतकर्ताओं को आशंका है कि खाते को हटाए जाने से डिजिटल साक्ष्य जुटाने में कठिनाई हो सकती है। इसलिए संबंधित सेवा प्रदाताओं से उपलब्ध रिकॉर्ड कानून के अनुसार सुरक्षित कराकर हासिल करने का अनुरोध किया गया है। विश्वविद्यालय की आंतरिक जानकारी का स्रोत भी जांच के दायरे में शिकायत में यह सवाल भी उठाया गया है कि ई-मेल में DPC, कर्मचारियों की पात्रता, सेवा संबंधी विवरण और विश्वविद्यालय के आंतरिक प्रशासनिक मामलों से जुड़ी जानकारी कहां से आई। अधिकारियों ने आशंका जताई है कि विश्वविद्यालय की अंदरूनी जानकारी तक पहुंच रखने वाला कोई व्यक्ति संदेश तैयार करने या भेजने में मददगार हो सकता है। पुलिस से यह भी जांचने की मांग की गई है कि ई-मेल तैयार करने, भेजने और आगे प्रसारित करने में एक से अधिक लोग शामिल थे या नहीं। शिकायत के मुताबिक, ई-मेल में लगाए गए आरोप बाद में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और समाचार माध्यमों तक भी पहुंचे। अधिकारियों ने पोस्ट, वीडियो, स्क्रीनशॉट, लिंक और समाचार रिपोर्टों की पड़ताल कर प्रसार में शामिल लोगों की पहचान करने की मांग की है। उनका दावा है कि इससे उनकी प्रतिष्ठा, सेवा संबंधी हितों और पदोन्नति की संभावनाओं पर प्रतिकूल असर पड़ा। फिलहाल किसी व्यक्ति या मीडिया संस्थान की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। DPC की अधिसूचनाएं वापस, सहायक कुलसचिव की बैठक भी रद्द विवाद के बीच AMU के कुलसचिव कार्यालय की चयन समिति (गैर-शिक्षण) ने 6 अगस्त 2026 की अधिसूचना में मिनिस्ट्रियल, सेक्रेटेरियल और फाइनेंस कैडर के विभिन्न पदों की पदोन्नति के लिए जारी DPC संबंधी 13 अधिसूचनाएं अपरिहार्य कारणों से वापस लेने की जानकारी दी। इनमें डिप्टी रजिस्ट्रार, असिस्टेंट रजिस्ट्रार, सेक्शन ऑफिसर, असिस्टेंट, UDC, प्राइवेट सेक्रेटरी, सीनियर पर्सनल असिस्टेंट, पर्सनल असिस्टेंट, डिप्टी फाइनेंस ऑफिसर और असिस्टेंट फाइनेंस ऑफिसर सहित विभिन्न पद शामिल हैं। नोटिस में सहायक कुलसचिव पद पर पदोन्नति के लिए 7 अगस्त को सुबह 10 बजे प्रस्तावित विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक रद्द किए जाने का भी उल्लेख है। हालांकि, अधिसूचनाएं वापस लेने और बैठक रद्द करने के पीछे नोटिस में केवल “अपरिहार्य कारण” बताए गए हैं। नोटिस में इस फैसले को ई-मेल विवाद या FIR से सीधे जोड़ने का उल्लेख नहीं है। सात अधिकारियों ने संयुक्त रूप से की शिकायत FIR के मुताबिक, शिकायत पर जॉइंट रजिस्ट्रार मोहम्मद आरिफुद्दीन अहमद, जॉइंट रजिस्ट्रार एसएम सुरोम अथस, असिस्टेंट रजिस्ट्रार मोहम्मद सिराज अहमद कादरी, चयन समिति से जुड़े सेक्शन ऑफिसर अला उल्लाह खान, जेएनएमसीएच के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट कार्यालय की सेक्शन ऑफिसर अदीला सुल्ताना, प्रिंसिपल एवं CMS कार्यालय के सेक्शन ऑफिसर मोहम्मद जिया फारुकी और सेक्शन ऑफिसर मोहम्मद जावेद के हस्ताक्षर हैं। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। अब जांच के केंद्र में तीन अहम सवाल हैं कि विवादित ई-मेल किसने बनाया और भेजा, विश्वविद्यालय की आंतरिक जानकारी उस तक कैसे पहुंची और क्या ई-मेल तथा उसके बाद हुए प्रसार का DPC पर कोई वास्तविक प्रभाव पड़ा? सीओ तृतीय सर्वम सिंह के अनुसार साइबर फॉरेंसिक जांच और प्रशासनिक दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही इन सवालों के जवाब स्पष्ट हो सकेंगे।

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