4 रुपये घटेगा मछलियों के चारे का दाम

आंध्र प्रदेश सरकार की पहल पर एक्वा फीड कंपनियों ने मछलियों के चारे की कीमत में 4 रुपये प्रति किलोग्राम की कटौती करने पर सहमति जताई है। इस फैसले से राज्य के हजारों मछली पालकों को राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार ने क्षेत्र की अन्य समस्याओं के समाधान के लिए संयुक्त समिति बनाने का भी निर्णय लिया है।

4 रुपये घटेगा मछलियों के चारे का दाम

दि राइजिंग न्यूज़ | हैदराबाद | 20 जून 2026

मछली पालकों को मिली बड़ी राहत

आंध्र प्रदेश के मछली पालकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की पहल पर एक्वा फीड यानी मछलियों के चारे की कीमत में 4 रुपये प्रति किलोग्राम की कटौती करने का फैसला लिया गया है। इस निर्णय से राज्य के हजारों मछली और झींगा पालक किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद चारा बनाने वाली कंपनियों ने किसानों पर बढ़ते आर्थिक दबाव को देखते हुए कीमत कम करने पर सहमति जताई। इसके साथ ही मछली पालक संगठनों ने भी इस प्रस्ताव का स्वागत किया है।

112 रुपये से घटकर 108 रुपये प्रति किलो हुआ चारा

नए फैसले के तहत एक्वा फीड की अधिकतम खुदरा कीमत 112 रुपये प्रति किलोग्राम से घटाकर 108 रुपये प्रति किलोग्राम कर दी गई है। पिछले कुछ वर्षों में चारे की कीमतों में लगातार वृद्धि होने के कारण मछली पालन की लागत बढ़ गई थी। ऐसे में कीमतों में की गई यह कटौती किसानों के लिए महत्वपूर्ण राहत मानी जा रही है।  चारा मछली पालन की कुल लागत का बड़ा हिस्सा होता है। इसलिए कीमत में कमी का सीधा असर किसानों की आय और लाभ पर पड़ेगा।

स्थायी समाधान के लिए बनेगी संयुक्त समिति

मुख्यमंत्री नायडू ने केवल कीमत कम करने तक ही अपने प्रयास सीमित नहीं रखे हैं। उन्होंने एक दीर्घकालिक समाधान तैयार करने के लिए संयुक्त समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। इस समिति में मछली पालक किसान, एक्वा फीड कंपनियों के प्रतिनिधि और सरकारी अधिकारी शामिल होंगे। समिति को 20 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है। यह समिति चारे की कीमतों के अलावा मछली पालन क्षेत्र से जुड़ी अन्य चुनौतियों, प्रसंस्करण सुविधाओं और प्रदूषण नियंत्रण उपायों पर भी सुझाव देगी।

बढ़ती लागत से परेशान हैं किसान

बैठक के दौरान मछली पालकों ने सरकार को बताया कि पिछले कुछ वर्षों में उत्पादन लागत में लगातार वृद्धि हुई है। किसानों के अनुसार चारा, बिजली, दवाइयों और अन्य आवश्यक संसाधनों की कीमतें बढ़ी हैं, जबकि मछली और झींगा उत्पादों के बाजार भाव उसी अनुपात में नहीं बढ़े हैं। इसका असर किसानों की आय पर पड़ा है और कई उत्पादकों का मुनाफा घटा है।

किसानों ने रखीं कई मांगें

मछली पालकों ने सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें भी रखीं। उन्होंने पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित करने, बीमा सुविधाओं का विस्तार करने और सब्सिडी योजनाओं को अधिक सरल बनाने की मांग की। किसानों ने झींगा तालाबों के लिए व्यापक बीमा कवरेज और नर्सरी तालाबों को बढ़ावा देने की भी अपील की। किसानों का कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं और बीमारियों के कारण होने वाले नुकसान से बचाने के लिए मजबूत बीमा व्यवस्था आवश्यक है।

सरकार ने दिया सहयोग का भरोसा

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि मछली पालन क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था और लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार ने बिजली सब्सिडी के रूप में एक्वा क्षेत्र को 1,543 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की है। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि मछली पालन गतिविधियों के लिए पानी की उपलब्धता में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी और किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।

चारा कंपनियों ने भी रखी अपनी बात

बैठक में चारा निर्माण कंपनियों के प्रतिनिधियों ने अपनी चुनौतियों को भी सरकार के सामने रखा। कंपनियों ने बताया कि सोयाबीन और फिश मील जैसे प्रमुख कच्चे माल की कीमतों में लगातार वृद्धि हुई है। साथ ही इनकी उपलब्धता भी सीमित हो गई है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ी है। कंपनियों का कहना है कि सस्ते सोयाबीन के आयात की पर्याप्त सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें घरेलू बाजार से ऊंची कीमतों पर खरीद करनी पड़ रही है। यही वजह है कि चारे की कीमतों में बढ़ोतरी हुई थी।

निर्यात गुणवत्ता पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री ने मछली पालकों से उत्पादन की गुणवत्ता बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए गुणवत्ता नियंत्रण बेहद जरूरी है। यदि निर्यात मानकों का पालन नहीं किया गया तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों की साख प्रभावित हो सकती है। मुख्यमंत्री ने किसानों से सुरक्षित उत्पादन पद्धतियां अपनाने और गुणवत्ता संबंधी सभी दिशानिर्देशों का पालन करने का आग्रह किया।

एक्वाकल्चर क्षेत्र को मिलेगी मजबूती

सरकार और उद्योग से जुड़े पक्षों के बीच हुई इस बैठक के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि चारे की कीमतों में कमी से राज्य के हजारों मछली और झींगा पालकों को आर्थिक राहत मिलेगी।  यह कदम न केवल किसानों की लागत कम करेगा बल्कि आंध्र प्रदेश के एक्वाकल्चर क्षेत्र को भी नई मजबूती प्रदान करेगा। राज्य पहले से ही देश के प्रमुख मत्स्य उत्पादन केंद्रों में शामिल है और यह निर्णय इस क्षेत्र के विकास को और गति दे सकता है।