भीषण गर्मी से खरीफ फसलों पर खतरा
देश के कई हिस्सों में लगातार पड़ रही भीषण गर्मी और सूखे जैसे हालात ने खरीफ फसलों के लिए गंभीर चुनौती पैदा कर दी है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सतर्क रहने और फसलों को गर्मी के प्रभाव से बचाने के लिए विशेष उपाय अपनाने की सलाह दी है।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 20 जून 2026
भीषण गर्मी और सूखे से बढ़ी किसानों की चिंता
देश के कई राज्यों में पिछले कुछ सप्ताह से जारी भीषण गर्मी और सूखे जैसे हालात ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम में नमी की कमी और लगातार बढ़ते तापमान का असर खरीफ फसलों पर दिखाई देने लगा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही मौसम में बदलाव नहीं हुआ तो धान, कपास, गन्ना, सूरजमुखी, मूंग, उड़द, सब्जियों और फलों की फसलों को भारी नुकसान हो सकता है।इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव के कारण तापमान सामान्य से अधिक रहने की आशंका पहले ही जताई गई थी। अब इसके प्रभाव खेतों और बागानों में दिखाई देने लगे हैं।
कपास की फसल पर बढ़ा संकट
पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक गर्मी कपास की फसल के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हो रही है।विशेषज्ञों ने बताया कि अधिक तापमान के कारण कपास के पौधों के तने के आसपास पीले रंग का घेरा बनने लगता है। इससे पौधे बैक्टीरिया और अन्य रोगजनक जीवों के हमले के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं। परिणामस्वरूप पौधे मुरझाने लगते हैं और कई मामलों में उनकी मृत्यु भी हो जाती है।कपास उत्पादक क्षेत्रों में किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई है।
फलों के पौधों पर भी मौसम की मार
जून महीने की तेज गर्मी का असर फलदार पौधों पर भी पड़ रहा है। विशेष रूप से हाल ही में लगाए गए नए पौधे अधिक जोखिम में हैं।बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार दक्षिण-पश्चिम दिशा से आने वाली तेज धूप सीधे पौधों के तनों पर पड़ती है, जिससे उनमें सनबर्न की समस्या उत्पन्न होती है। इससे तनों में दरारें पड़ सकती हैं और कई बार छाल भी उखड़ जाती है।आम, लीची, अमरूद, पपीता और खट्टे फलों के पौधे इस समस्या के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील माने जाते हैं। लंबे समय तक ऐसे हालात बने रहने पर पौधों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है और उत्पादन में कमी आ सकती है।
वैज्ञानिकों ने दिए बचाव के सुझाव
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को फलों के पौधों की सुरक्षा के लिए कई उपाय अपनाने की सलाह दी है। पौधों के निचले तनों पर सफेद घोल लगाना लाभकारी हो सकता है। यह घोल 100 लीटर पानी में 25 किलोग्राम बुझा हुआ चूना, 500 ग्राम कॉपर सल्फेट और 500 ग्राम गोंद मिलाकर तैयार किया जा सकता है।इसके अलावा नियमित अंतराल पर सिंचाई करने से मिट्टी में नमी बनी रहती है और पौधों को गर्मी के तनाव से राहत मिलती है। नए पौधों को सरकंडा, पराली या खजूर के पत्तों से बने अस्थायी छायादार ढांचे से ढकने की भी सलाह दी गई है।
सब्जियों के उत्पादन पर असर
भीषण गर्मी का प्रभाव सब्जी उत्पादक किसानों पर भी दिखाई दे रहा है।मिर्च, भिंडी, करेला, लौकी और अन्य बेल वाली सब्जियों में फूल और फल झड़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक तापमान परागण प्रक्रिया को प्रभावित करता है, जिससे फल बनने की क्षमता घट जाती है।इसका सीधा असर उत्पादन और किसानों की आय पर पड़ सकता है।
बार-बार सिंचाई करने की सलाह
सब्जियों की फसलों में कम मात्रा में लेकिन बार-बार सिंचाई करना अधिक लाभदायक होगा।इससे खेतों के आसपास का तापमान कुछ हद तक नियंत्रित रहता है और पौधों को गर्मी से राहत मिलती है। साथ ही मिट्टी में पर्याप्त नमी बनाए रखने से फसलों की वृद्धि बेहतर होती है।
करेले की फसल में सनबर्न की समस्या
करेले जैसी मचान पर उगाई जाने वाली फसलों में सनबर्न की समस्या तेजी से देखी जा रही है।कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार यह कोई रोग नहीं बल्कि अत्यधिक तापमान का परिणाम है। तेज धूप के कारण फलों और पत्तियों पर झुलसन के निशान दिखाई देते हैं, जिससे उनकी गुणवत्ता प्रभावित होती है।
नेट हाउस किसानों को विशेष सलाह
जो किसान नेट हाउस या संरक्षित खेती कर रहे हैं, उन्हें भी गर्मी का लाभ उठाने की सलाह दी गई है। इस दौरान मिट्टी की जुताई करके उसे धूप के संपर्क में लाया जा सकता है। इससे मिट्टी में मौजूद कई हानिकारक रोगजनक जीव और निमेटोड नष्ट हो सकते हैं।मिट्टी का तापमान बढ़ाने के लिए पॉलीथीन शीट का उपयोग भी किया जा सकता है, जिससे रोग नियंत्रण में सहायता मिलेगी।
सतर्कता ही बचाव का सबसे बड़ा उपाय
मौजूदा मौसम परिस्थितियों में किसानों को फसलों की नियमित निगरानी करनी चाहिए और सिंचाई, छायांकन तथा पौध संरक्षण के उपाय समय पर अपनाने चाहिए।यदि आने वाले दिनों में वर्षा नहीं होती है और तापमान इसी तरह ऊंचा बना रहता है, तो खरीफ सीजन की कई प्रमुख फसलों के उत्पादन पर व्यापक असर पड़ सकता है। ऐसे में वैज्ञानिक सलाह के अनुसार कार्य करना किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।