अरविंद राजभर ने अखिलेश यादव पर साधा निशाना:रोजगार, शिक्षा और जनहित के मुद्दों पर चर्चा की बात कही, कुश्ती दंगल में हुए शामिल

Oct 10, 2026 - 17:22
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अरविंद राजभर ने अखिलेश यादव पर साधा निशाना:रोजगार, शिक्षा और जनहित के मुद्दों पर चर्चा की बात कही, कुश्ती दंगल में हुए शामिल
मऊ के सरवां गांव में शनिवार को विराट कुश्ती दंगल का आयोजन किया गया। उत्तर प्रदेश कुश्ती संघ एवं जिला कुश्ती संघ के समन्वय से आयोजित इस प्रतियोगिता में विभिन्न क्षेत्रों से आए पहलवानों ने अपने दमखम, शारीरिक क्षमता और कुश्ती कौशल का प्रदर्शन किया। दंगल देखने के लिए बड़ी संख्या में कुश्ती प्रेमी जुटे। कार्यक्रम में पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर के पुत्र एवं पूर्व राज्यमंत्री अरविंद राजभर भी शामिल हुए। जिला कुश्ती संघ मऊ के जिलाध्यक्ष आलोक सिंह (गोलू) सहित आयोजन समिति के सदस्यों ने अतिथियों का स्वागत किया। आयोजकों ने कहा कि दंगल का उद्देश्य पारंपरिक कुश्ती को बढ़ावा देना और ग्रामीण क्षेत्रों की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करना है। मऊ की मिट्टी के पहलवान देश का गौरव: अरबिंद राजभर मीडिया से बातचीत में अरबिंद राजभर ने कहा कि मऊ की मिट्टी में तैयार होने वाले पहलवान केवल अखाड़े में अपना दमखम नहीं दिखाते, बल्कि देश का गौरव भी बढ़ाते हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले पहलवान यहां अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं और स्थानीय लोगों का आशीर्वाद लेकर लौटते हैं। ऐसे आयोजन मऊ की पहचान को देशभर में मजबूत करते हैं। अखिलेश यादव पर रोजगार और शिक्षा के मुद्दों को लेकर हमला राजनीतिक सवालों पर अरबिंद राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को युवाओं के रोजगार, बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और महिलाओं एवं बालिकाओं को निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने जैसे मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने संविधान की शिक्षा प्राथमिक विद्यालयों से ही प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव जनता के मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने वाले बयान देते हैं। अयोध्या में राम मंदिर और मथुरा में बांके बिहारी मंदिर के दर्शन को लेकर भी उन्होंने अखिलेश यादव पर सवाल उठाए। धार्मिक प्रतीकों को लेकर भी की टिप्पणी अरबिंद राजभर ने अखिलेश यादव की धार्मिक पहचान और मंदिर दर्शन से जुड़े बयानों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल वेशभूषा या धार्मिक प्रतीकों का प्रदर्शन करने से जनता का विश्वास हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने रामायण के रावण प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जनता सब समझती है और किसी भी राजनीतिक दल को केवल प्रतीकों के आधार पर लोगों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। सरवां गांव में आयोजित इस विराट कुश्ती दंगल ने जहां पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने का संदेश दिया, वहीं कार्यक्रम के दौरान अरबिंद राजभर के राजनीतिक बयानों ने भी चर्चा बटोरी।

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