औरैया में नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा:घंटे के नाद से असुरों के संहार की मान्यता, भक्तों ने मां से सुख-समृद्धि मांगी

Oct 13, 2026 - 10:34
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औरैया में नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा:घंटे के नाद से असुरों के संहार की मान्यता, भक्तों ने मां से सुख-समृद्धि मांगी
शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन बुधवार को औरैया में मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप माता चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जा रही है। जिले के देवी मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। पूरे जिले में नवरात्र का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा कर सुख-समृद्धि और शांति की कामना कर रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा के मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित है और उनके हाथ में घंटा है। चंद्रमा को शांति का प्रतीक माना जाता है, जबकि घंटा नाद का प्रतीक है। मान्यता है कि मां चंद्रघंटा अपने नाद के माध्यम से शांति का संदेश देती हैं। देवासुर संग्राम में घंटा नाद से असुरों के संहार की मान्यता देवी मां की कथा के अनुसार, देवासुर संग्राम के दौरान मां के घंटे के नाद से कई असुर मारे गए थे। इसी कारण मां चंद्रघंटा के स्वरूप को साहस और शक्ति से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि मां की आराधना करने से भक्तों का भय दूर होता है और उन्हें साहस व शक्ति प्राप्त होती है। सिद्धकुंजिका स्तोत्र का पाठ भी शुभ माना गया नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की उपासना में सिद्धकुंजिका स्तोत्र का पाठ भी शुभ माना गया है। मंदिरों में श्रद्धालु मां के जयकारे लगाकर अपनी आस्था जता रहे हैं। पूजा-अर्चना के बीच जिले में भक्तिमय माहौल बना हुआ है।

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