अयोध्या के सिद्ध देवी मंदिरों में है पाटेश्वरी देवी:पिंड स्वरूप में विराजमान भगवती भक्तों को दर्शन दे रही
अयोध्या में शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन 51 शक्तिपीठों में से एक मां पाटेश्वरी देवी मंदिर में भक्त आराधना करने के लिए भर से ही पहुंच रहे हैं। मान्यता है कि यहां पर माता सती का दाहिना पैर गिरा था। यहां पर पिंड स्वरूप में मां विराजमान भक्तों को दर्शन दे रही हैं।
यह मंदिर अयोध्या शहर के कैंट में स्थित है। शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी का पूजन किया जा रहा है। अयोध्या में माता के सभी मंदिरों में भक्तों का सैलाब देखने को मिल रहा है। कैंट में स्थित 51 शक्ति पीठों में से एक मां पाटेश्वरी देवी के मंदिर में भक्त भोर से ही दर्शन पूजन करने के लिए पहुंच रहे है। मां को लाल गुड़हल का फूल बहुत पसंद है। भक्त मां को गुड़हल का फूल अर्पित कर प्रसन्न करने का प्रयास कर रहे है। मां के मंदिर को विभिन्न रंगों की लाइटों से सजाया गया है। मां के गर्भगृह को विभिन्न फूलों से सजाया गया है। भक्त मां का दर्शन कर आनंदित महसूस कर रहे है। मान्यता है कि अयोध्या आने वाले भक्त जहां एक और रामलला का दर्शन करते है। वहीं दूसरी ओर माता पार्टेश्वरी देवी का दर्शन जरूर करता है। जो भक्त सच्चे मन से मां से मांगता है उसकी मुराद माता जरूर पूरा करती है। अयोध्या के वरिष्ठ पत्रकार और देवी भक्त रामप्रकाश त्रिपाठी के अनुसार निर्जन क्षेत्र स्थित देवी का यह मंदिर बेहद मनमोहक है।यहां आकर भक्तों को परम सुख और शांति मिलने के साथ ही हृदय का कष्ट दूर हो जाता है।यह मंदिर बेहद चमत्कारिक है।ऐसा समय-समय पर भक्तों नेे अनुभव किया है।
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