उन्नाव में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से नीचे आया:24 घंटे में 23 सेंटीमीटर घटा, तटीय इलाकों में अब भी जलभराव से परेशानी
उन्नाव गंगा के जलस्तर में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई है। मंगलवार सुबह केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार जलस्तर घटकर 111.34 मीटर पर पहुंच गया। पिछले 24 घंटे में 23 सेंटीमीटर की कमी आई है। गंगा का जलस्तर अब चेतावनी बिंदु 112 मीटर से 66 सेंटीमीटर नीचे आ गया है। करीब तीन महीने बाद जलस्तर चेतावनी बिंदु से नीचे पहुंचने पर शुक्लागंज और आसपास के तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों ने राहत की उम्मीद जताई है। हालांकि, निचली बस्तियों और संपर्क मार्गों पर अब भी पानी भरा होने से लोगों की मुश्किलें बरकरार हैं। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 113 मीटर को पार करने के बाद शुक्लागंज और आसपास के इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई थी। कई मोहल्लों में पानी घरों तक पहुंच गया था। इससे लोगों को रोजमर्रा के कामकाज, जरूरी सामान की खरीदारी और सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ा था। कई संपर्क मार्गों पर पानी भरने से आवागमन भी प्रभावित हुआ था। अब जलस्तर में लगातार गिरावट आने से लोगों को बाढ़ का पानी उतरने की उम्मीद बंधी है। हालांकि, निचले इलाकों में जमा पानी की निकासी में समय लग सकता है। ऐसे में जलस्तर घटने के बावजूद लोगों को पूरी राहत मिलने का इंतजार है। गंगा में उफान के दौरान गोताखोर, कर्बला, हुसैन नगर, तेजीपुरवा और सैय्यद कंपाउंड समेत शुक्लागंज के कई तटीय इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंच गया था। रविदास नगर, मालवीय नगर, श्रीनगर और इंद्रानगर में भी जलभराव से लोगों को परेशानी हुई थी। घरों के आसपास पानी जमा होने और रास्ते डूबने के कारण लोगों को आवागमन के लिए वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ा। जलस्तर में गिरावट के बाद भी इन इलाकों में स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। गगनीखेड़ा और फत्तेखेड़ा समेत कई गांवों में पानी पहुंचने से ग्रामीणों की आवाजाही प्रभावित हुई थी। संपर्क मार्गों पर जलभराव के कारण लोगों को आने-जाने में दिक्कतें उठानी पड़ीं। नेतुआ स्थित कान्हा गौशाला में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया था। वहीं, त्रिभुवनखेड़ा पावर हाउस के पास पानी पहुंचने से स्थिति पर नजर रखी जा रही थी। फिलहाल जलस्तर में गिरावट से तटीय क्षेत्रों के लोगों को राहत की उम्मीद है। हालांकि, निचली बस्तियों में जमा पानी की निकासी और संपर्क मार्गों से जलभराव दूर होने के बाद ही जनजीवन पूरी तरह सामान्य हो सकेगा।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)