अयोध्या में 8 दिवसीय मनोकार्यशाला संपन्न:डॉ. आलोक बोले- समय पर पहचानें संकेत, अवसाद और तनाव बढ़ाते हैं प्रवृत्ति
अयोध्या के परमहंस महाविद्यालय में सिफ्प्सा क्यू क्लब की ओर से आयोजित आठ दिवसीय मनोकार्यशाला का समापन हुआ। जिला चिकित्सालय के मनोपरामर्शदाता डॉ. आलोक मनदर्शन ने कहा कि आत्महत्या के विचारों का समय पर उपचार और सूक्ष्म संकेतों की पहचान जरूरी है। उन्होंने बताया कि अवसाद, मानसिक विकार, अभिभावकों की अति अपेक्षाएं, अकादमिक व कैरियर संबंधी दबाव, पीयर प्रेशर, प्रेम संबंधों की समस्याएं और नशे की लत आत्मघाती प्रवृत्ति बढ़ा सकती हैं। सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और जुए की लत भी नकारात्मक प्रभाव डालती है। उन्होंने कहा कि समय पर मनोपरामर्श से ऐसे विचारों से बाहर निकलने में मदद मिल सकती है। कार्यक्रम में सुसाइड प्रिवेंशन स्किल ट्रेनिंग के तहत राष्ट्रीय सेवा योजना के युवाओं को आत्मघात के संकेत पहचानने और भावनात्मक मनोदक्षता के उपयोग का प्रशिक्षण दिया गया। अध्यक्षता क्यू क्लब के नोडल ऑफिसर प्राचार्य डॉ. सुनील तिवारी ने की।
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