अयोध्या में श्रीराम जन्मोत्सव का उल्लास छा गया:आसमान से पुष्पवर्षा होने लगी,साकार हो उठी त्रेतायुग की झलक
भगवदाचार्य स्मारक सदन, अयोध्या की पौराणिक एवं ऐतिहासिक श्रीरामलीला के द्वितीय दिवस पर प्रभु श्रीराम के जन्मोत्सव और मुनि आगमन की दिव्य लीलाओं का भावपूर्ण मंचन किया गया। भगवान श्रीराम के प्राकट्य की मंगलमयी लीला ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। मंच पर साकार हुई त्रेतायुग की झलक के बीच पूरा वातावरण जय श्रीराम के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। श्रीराम जन्म की लीला के मंचन के दौरान अयोध्या नगरी में छाए आनंद, उल्लास और मंगल के वातावरण को कलाकारों ने जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। भगवान श्रीराम के जन्म की शुभ घड़ी आते ही मंच पर उत्सव का दृश्य साकार हो उठा। मंगलगीतों, भक्ति संगीत और जयघोष के बीच श्रद्धालु प्रभु के प्राकट्य की खुशी में भावविभोर नजर आए। श्रीराम जन्मोत्सव की प्रस्तुति ने दर्शकों को भगवान के बाल स्वरूप की दिव्यता और उनके अवतरण के आध्यात्मिक महत्व का अनुभव कराया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम का अवतरण धर्म की स्थापना, अधर्म के विनाश और लोककल्याण के लिए हुआ। उनकी जन्मलीला केवल उत्सव का प्रसंग नहीं, बल्कि मर्यादा, करुणा, त्याग और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देती है। रामलीला के माध्यम से कलाकारों ने इसी आध्यात्मिक संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया। इसके बाद मुनि आगमन की लीला का मंचन हुआ। महर्षि विश्वामित्र के अयोध्या आगमन और राजा दशरथ से श्रीराम एवं लक्ष्मण को अपने साथ ले जाने का प्रसंग मंच पर प्रस्तुत किया गया। ऋषि-मुनियों के यज्ञ में विघ्न डालने वाले राक्षसों से रक्षा के लिए भगवान श्रीराम को साथ ले जाने की मांग कथा को महत्वपूर्ण मोड़ प्रदान करती है। एक ओर पुत्र-वियोग की आशंका से व्याकुल राजा दशरथ का वात्सल्य दिखाई देता है, तो दूसरी ओर गुरुजनों के मार्गदर्शन में धर्म की रक्षा के लिए आगे बढ़ते श्रीराम के कर्तव्य और पराक्रम की झलक मिलती है। मुनि आगमन का यह प्रसंग दर्शाता है कि प्रभु श्रीराम का जीवन आरंभ से ही धर्म, गुरु-आज्ञा, कर्तव्यपालन और लोककल्याण के आदर्शों से जुड़ा रहा। इस भावपूर्ण मंचन ने दर्शकों को रामकथा के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व से जोड़ दिया। कार्यक्रम में अयोध्याधाम के पूज्य संत-महंतों एवं श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। श्री तुलसीदास रामलीला समिति के कोषाध्यक्ष एवं बड़ा भक्तमाल पीठाधीश्वर अवधेश कुमार दास, महामंत्री महंत संजय दास, महंत बलराम दास, उपाध्यक्ष नागा रामलखन दास, श्रृंगी ऋषि पीठाधीश्वर हेमंत दास, निर्वाणी अनी के महासचिव महंत सत्यदेव दास, महंत एम.बी. दास, महंत हरिभजन दास, महंत शशिकांत दास, सिय-पिया निवास के महंत कामता शरण, महंत धनुषधारी शुक्ला, पुजारी अनिल दास, विराट दास, घनश्याम दास, तन्मय दास, शशि दास, गोरखपुर के के.पी. शाही तथा सचिव शिवम श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में संत-महंत और श्रद्धालु उपस्थित रहे। भगवदाचार्य स्मारक सदन की यह ऐतिहासिक श्रीरामलीला अयोध्या की समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ नई पीढ़ी को प्रभु श्रीराम के आदर्शों से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम बनी हुई है। श्रीराम जन्मोत्सव और मुनि आगमन की लीला ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि प्रभु श्रीराम का जीवन सदैव धर्म, सत्य, मर्यादा और मानवकल्याण का मार्ग प्रशस्त करता रहेगा।
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