अयोध्या नगर निगम का बजट 3 गुना बढ़ाने की मांग:महापौर बोले- रोज आते हैं 1 लाख श्रद्धालु, शहर के रखरखाव के लिए फंड चाहिए
अयोध्या नगर निगम का मासिक बजट तीन गुना बढ़ाने की मांग उठी है। महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने 14 अक्टूबर को लखनऊ के ताज होटल में छठवें राज्य वित्त आयोग की समिति के सामने यह मांग रखी। उन्होंने कहा कि अयोध्या में रोजाना करीब एक लाख श्रद्धालु आते हैं। ऐसे में सफाई, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और दूसरी नागरिक सुविधाओं पर खर्च लगातार बढ़ रहा है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना की मौजूदगी में महापौर ने कहा कि धार्मिक और पर्यटन नगरी होने के कारण अयोध्या की जरूरतें दूसरे नगर निगमों से अलग हैं। इसके बावजूद वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य वित्त आयोग से मिलने वाला मासिक आवंटन समान श्रेणी के दूसरे नगर निगमों के मुकाबले करीब एक तिहाई है। इसलिए नगर निगम का बजट तीन गुना किया जाना चाहिए। साल में 4 करोड़ से ज्यादा पर्यटक आने का दावा महापौर ने आयोग को बताया कि अयोध्या में सालाना चार करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आगमन होता है। मकर संक्रांति, रामनवमी, सावन झूला, दीपोत्सव और कार्तिक पूर्णिमा जैसे आयोजनों में भीड़ कई गुना बढ़ जाती है। प्रमुख धार्मिक आयोजनों के दौरान एक दिन में 40 से 50 लाख श्रद्धालुओं के आने का भी दावा किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे मौकों पर सफाई, पेयजल, प्रकाश, यातायात प्रबंधन और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए विशेष इंतजाम करने पड़ते हैं। इसके लिए छठवें राज्य वित्त आयोग से धार्मिक आयोजनों और मेलों के लिए अलग बजट देने की मांग की गई। कर्मचारियों की संख्या दोगुनी से ज्यादा हुई महापौर के मुताबिक, नगर निगम में कर्मचारियों की संख्या पहले के मुकाबले दोगुनी से अधिक हो गई है। इससे संचालन और अवस्थापना पर खर्च बढ़ा है। सीमित बजट में बढ़ती जरूरतों को पूरा करना चुनौती बन रहा है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में विकास के साथ सांस्कृतिक विरासत, स्वच्छता और नागरिक सुविधाओं को बनाए रखने के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन जरूरी हैं। STP के रखरखाव के लिए 13.75 करोड़ खर्च नगर निगम क्षेत्र में तीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) चालू हैं। महापौर ने बताया कि इनके वार्षिक रखरखाव पर जल निगम के माध्यम से करीब 13.75 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। अनुरक्षण अवधि समाप्त होने के बाद इन संयंत्रों के रखरखाव की जिम्मेदारी नगर निगम पर आ सकती है। ऐसे में इसके लिए अलग से बजट उपलब्ध कराने की मांग की गई। महापौर ने नगर निगम की आय बढ़ाने के प्रयासों का भी ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2022-23 में भवनों को कर के दायरे में लाने के लिए सर्वे कराया गया। इसके बाद कर निर्धारण वाले भवनों की संख्या 45,643 से बढ़कर 61,915 हो गई। 55.96 करोड़ से बढ़कर 70.53 करोड़ हुई आय उनके मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2024-25 में नगर निगम की आय 55.96 करोड़ रुपये थी, जो 2025-26 में बढ़कर 70.53 करोड़ रुपये हो गई। वित्तीय वर्ष 2026-27 में करीब 100 करोड़ रुपये राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। महापौर ने बताया कि ऑनलाइन भुगतान, घर-घर कर संग्रह और पीपीपी मॉडल पर भगवान राम के जीवन प्रसंगों पर आधारित वैक्स म्यूजियम का संचालन भी आय बढ़ाने के प्रयासों में शामिल है।
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