बांदा में महंगाई के कारण रावण के पुतले छोटे हुए:पहले 50-60 फीट के बनते थे, अब बजट के हिसाब से तय हो रही ऊंचाई
बांदा में दशहरे पर रावण दहन की परंपरा कई दशकों से चली आ रही है। शहर में अलग-अलग स्थानों पर रावण के पुतले जलाए जाते हैं, लेकिन बदलते समय और बढ़ती महंगाई का असर अब इस परंपरा पर भी दिखाई देने लगा है। पहले जहां 50 से 60 फीट तक के रावण बनाए जाते थे, वहीं अब कमेटियों के बजट के हिसाब से पुतलों की ऊंचाई कम होती जा रही है। परागी तालाब मोहल्ले में भी दशहरे पर रावण दहन का आयोजन होगा, जिसे देखने के लिए सैकड़ों लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। तीन पीढ़ियों से पुतले बना रहा मुस्लिम परिवार बांदा के अलीगंज निवासी तुथैल अहमद का परिवार तीन पीढ़ियों से रावण और मेघनाद के पुतले बनाने का काम कर रहा है। तुथैल अहमद के पिता एजाज अहमद और उनके बाबा भी यही काम करते थे। अब तुथैल इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। दशहरे पर पुतले बनाने वाला यह परिवार आयोजन समितियों के लिए काम करता है। पुतले बनाने में बांस, कागज और दूसरे सामान का इस्तेमाल होता है। सामग्री की बढ़ती कीमतों के कारण आयोजन समितियों को बजट के हिसाब से पुतलों की ऊंचाई तय करनी पड़ रही है। बांदा में परागी तालाब, अलीगंज, छावी तालाब, जहीर क्लब मैदान और कांशीराम कॉलोनी के पास रावण दहन के आयोजन होते रहे हैं। पिछले साल प्रकाशित रिपोर्ट में परागी तालाब, अलीगंज और छावी तालाब में 25 फीट, जबकि जहीर क्लब मैदान और कांशीराम कॉलोनी में 20 फीट के रावण बनाए जाने का जिक्र था। इस साल आयोजन समितियों के अनुसार पुतलों की ऊंचाई अलग हो सकती है। दशहरे पर परागी तालाब मोहल्ले में रावण दहन देखने के लिए सैकड़ों लोगों के जुटने की उम्मीद है। भीड़ को देखते हुए यहां 10 से 12 पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। पुलिसकर्मी आयोजन के दौरान सुरक्षा और भीड़ को नियंत्रित करने में मदद करेंगे।
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