भारत की सस्ती बिजली पर बांग्लादेश को आपत्ति, चीन को देगा ज्यादा पैसे!

बांग्लादेश भारत से करीब 11 टका प्रति इकाई की दर से बिजली प्राप्त कर रहा है, लेकिन सीमा पार बिजली लेनदेन के लिए प्रस्तावित एक पैसे के शुल्क पर उसने आपत्ति जताई। भारत ने बाद में इस शुल्क को घटाकर आधा पैसा कर दिया। दूसरी ओर, ढाका के पास कचरे से बिजली बनाने वाली चीनी परियोजना के लिए करीब 25 टका प्रति इकाई भुगतान पर सहमति बनी है। इसी कीमत के अंतर को लेकर बांग्लादेश की ऊर्जा नीति पर सवाल उठ रहे हैं।

Sep 02, 2026 - 11:12
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भारत की सस्ती बिजली पर बांग्लादेश को आपत्ति, चीन को देगा ज्यादा पैसे!

दि राइजिंग न्यूज | ढाका | 2 सितंबर 2026

बांग्लादेश में बिजली संकट के बीच भारत से मिलने वाली सस्ती बिजली और चीन की महंगी बिजली परियोजना को लेकर सवाल उठ रहे हैं। भारत से करीब 11 टका प्रति इकाई की दर से बिजली मिलने के बावजूद बांग्लादेश ने मामूली अतिरिक्त शुल्क पर आपत्ति जताई है। वहीं, चीन की कचरे से बिजली बनाने वाली परियोजना के लिए करीब 25 टका प्रति इकाई भुगतान करने पर सहमति जताई गई है।

बांग्लादेश में बिजली संकट के बीच बढ़ा विवाद

बांग्लादेश इस समय बिजली संकट, विदेशी मुद्रा की कमी और लगातार बिजली कटौती जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे समय में भारत और चीन से मिलने वाली बिजली की कीमतों को लेकर बड़ा अंतर सामने आया है। भारत से बांग्लादेश को अपेक्षाकृत कम कीमत पर बिजली मिल रही है, लेकिन भारत की ओर से मांगे गए मामूली शुल्क को लेकर बांग्लादेश ने आपत्ति जताई है। इसी वजह से दोनों देशों के बिजली लेनदेन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।बांग्लादेश को भारत से लगभग 11 टका यानी करीब 8.50 रुपये प्रति इकाई की दर से बड़ी मात्रा में बिजली मिलती है। इसके मुकाबले चीन की एक नई परियोजना के लिए बांग्लादेश करीब 25 टका यानी लगभग 19.25 रुपये प्रति इकाई देने को तैयार हुआ है। कीमतों में इस बड़े अंतर ने भारत और बांग्लादेश के बीच बिजली व्यापार को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

भारत के एक पैसे के शुल्क पर बांग्लादेश ने जताई आपत्ति

भारत के केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग ने सीमा पार बिजली लेनदेन से जुड़ी व्यवस्था के लिए 0.01 रुपये यानी एक पैसा प्रति इकाई शुल्क का प्रस्ताव रखा था। यह शुल्क बिजली के सीमा पार लेनदेन में ग्रिड संचालन, समय निर्धारण और मीटर संबंधी खर्चों को पूरा करने के लिए प्रस्तावित किया गया था। यानी भारत की ओर से बिजली की कीमत के अलावा केवल बेहद मामूली सेवा शुल्क की मांग की गई थी।बांग्लादेश विद्युत विकास बोर्ड ने इस अतिरिक्त शुल्क पर आपत्ति जताई। इसके बाद भारत की ओर से प्रस्तावित शुल्क को घटाकर 0.005 रुपये यानी आधा पैसा प्रति इकाई कर दिया गया। इसके बावजूद यह मामला दोनों देशों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। भारत की ओर से शुल्क में इतनी कमी किए जाने के बाद भी बांग्लादेश की आपत्ति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

चीन की परियोजना के लिए 25 टका प्रति इकाई देने पर सहमति

दूसरी ओर बांग्लादेश में ढाका के पास अमीनबाजार में कचरे से बिजली बनाने की एक नई परियोजना पर काम किया जा रहा है। इस परियोजना के लिए चीनी कंपनी को करीब 25 टका प्रति इकाई की दर से भुगतान करने पर सहमति बनी है। यह दर भारत से मिलने वाली बिजली की करीब 11 टका प्रति इकाई कीमत से काफी अधिक है।दोनों दरों की तुलना करें तो चीन की परियोजना के लिए तय कीमत भारत से मिलने वाली बिजली की तुलना में करीब 127 प्रतिशत अधिक बताई जा रही है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि जब बांग्लादेश भारत के एक पैसे के शुल्क पर आपत्ति जता रहा है, तो चीन की परियोजना के लिए इतनी अधिक कीमत स्वीकार करने के पीछे क्या वजह है।

बांग्लादेश ने चीन की परियोजना को लेकर दी अलग दलील

रिपोर्ट के अनुसार बांग्लादेश का कहना है कि चीन की यह परियोजना केवल बिजली उत्पादन के लिए नहीं बनाई जा रही है। इसका एक बड़ा उद्देश्य ढाका शहर की बढ़ती कचरा समस्या का समाधान करना भी है। परियोजना के माध्यम से कचरे का निपटारा करने के साथ बिजली उत्पादन करने की योजना है। इसी वजह से इसकी तुलना सीधे भारत से मिलने वाली बिजली से नहीं की जा सकती।यह परियोजना करीब 42 मेगावाट क्षमता की बताई जा रही है। इसकी क्षमता भारत से बांग्लादेश को मिलने वाली बिजली की मात्रा की तुलना में काफी कम है। इसलिए यह परियोजना भारत से मिलने वाली बिजली का विकल्प नहीं बन सकती। इसके बावजूद दोनों देशों के साथ बिजली संबंधी अलग-अलग शर्तों को लेकर राजनीतिक और आर्थिक सवाल उठ रहे हैं।

भारत और चीन के साथ बिजली संबंधों पर उठे सवाल

बांग्लादेश के बिजली संकट के बीच भारत और चीन से होने वाले ऊर्जा सहयोग की तुलना अब चर्चा का प्रमुख विषय बन गई है। एक तरफ भारत से अपेक्षाकृत कम कीमत पर बिजली मिलने के बावजूद मामूली शुल्क को लेकर आपत्ति सामने आई है। दूसरी तरफ चीन की परियोजना के लिए काफी अधिक दर पर भुगतान की सहमति बनी है।हालांकि, चीन की परियोजना में बिजली उत्पादन के साथ कचरा प्रबंधन भी शामिल है, इसलिए दोनों समझौतों की लागत की सीधी तुलना पूरी तरह समान आधार पर नहीं की जा सकती। फिर भी भारत के साथ शुल्क विवाद और चीन की परियोजना के लिए अधिक कीमत स्वीकार करने के कारण बांग्लादेश की ऊर्जा नीति पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

बिजली संकट के बीच बांग्लादेश के सामने बड़ी चुनौती

बांग्लादेश में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाना लगातार चुनौती बना हुआ है। बिजली कटौती और विदेशी मुद्रा की कमी के बीच देश को भरोसेमंद ऊर्जा स्रोतों की जरूरत है। ऐसे में भारत से मिलने वाली बिजली और चीन की नई परियोजनाएं बांग्लादेश की ऊर्जा व्यवस्था में अलग-अलग भूमिका निभा सकती हैं।आने वाले समय में बांग्लादेश की ऊर्जा नीति और भारत के साथ बिजली व्यापार को लेकर स्थिति पर नजर रहेगी। खास तौर पर मामूली शुल्क को लेकर पैदा हुआ विवाद दोनों देशों के ऊर्जा संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं चीन की महंगी परियोजना को लेकर भी बांग्लादेश सरकार को लागत और लाभ के आधार पर जवाब देना पड़ सकता है।

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