ईरान की धमकी से सहमा अमेरिका! भारत पर पड़ेगा तेल का असर
ईरान और अमेरिका के बीच फिर सैन्य तनाव बढ़ गया है। ट्रंप की चेतावनी के बाद ईरान ने कड़े पलटवार की धमकी दी है। बढ़ते तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिसका असर भारत में पेट्रोल-डीजल, महंगाई और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
ईरान-अमेरिका के बीच फिर बढ़ा सैन्य तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच करीब एक महीने की शांति के बाद एक बार फिर तनाव गहरा गया है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार को ईरान के खिलाफ ताजा सैन्य कार्रवाई की। अमेरिकी केंद्रीय कमान के अनुसार, यह कार्रवाई ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की गतिविधियों के जवाब में की गई।अमेरिका का आरोप है कि ईरानी बलों की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों और पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने की कोशिश की गई। इसी के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के कुछ ठिकानों पर हमला किया। इस कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंचता दिखाई दे रहा है।
ट्रंप ने ईरान को दी बड़ी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका की ओर से किया गया हमला अंतिम कार्रवाई नहीं है और इससे भी बड़ा हमला अभी बाकी है। उनके इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।ट्रंप की चेतावनी के बाद ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रवक्ता होसैन मोहेबी ने कहा कि अमेरिका को अपने ताजा हमलों पर पछताना पड़ेगा। ईरान ने यह भी कहा है कि अमेरिकी कार्रवाई में हुए नुकसान का जवाब दिया जाएगा।
ईरान ने दी कड़े पलटवार की धमकी
ईरान की सेना ने अमेरिकी हमलों को गंभीर कार्रवाई बताते हुए जवाब देने की बात कही है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी हमलों में कई लोगों की मौत हुई है और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। ईरान का दावा है कि घायलों में बच्चे भी शामिल हैं।दोनों देशों के बीच बढ़ता तनाव अब सीधे सैन्य टकराव का रूप लेता दिखाई दे रहा है। अगर ईरान की ओर से अमेरिका या उसके सहयोगी देशों के ठिकानों पर बड़े हमले किए जाते हैं, तो संघर्ष का दायरा और बढ़ सकता है। इसका असर पश्चिम एशिया की सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में शामिल है। खाड़ी क्षेत्र से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और अन्य ऊर्जा उत्पाद इसी समुद्री रास्ते से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचते हैं। इसलिए यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है।अमेरिका का दावा है कि ईरान ने इस समुद्री मार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश की थी। ईरान ने इन आरोपों को गलत बताया है। यदि तनाव बढ़ता है और समुद्री यातायात प्रभावित होता है, तो कच्चे तेल की आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है और इसका असर पूरी दुनिया में ईंधन की कीमतों पर दिखाई दे सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का तत्काल असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार में दिखाई दिया है। तनाव बढ़ने के बाद ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें 92 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं। कारोबार के दौरान कीमतों के 94 से 95 डॉलर प्रति बैरल तक जाने की भी जानकारी सामने आई।पिछले कुछ समय से कच्चे तेल की कीमतें अपेक्षाकृत सीमित दायरे में बनी हुई थीं। लेकिन पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव बढ़ने के बाद बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। यदि संघर्ष लंबा चलता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।
भारत के लिए क्यों बढ़ सकती है परेशानी
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का सीधा प्रभाव भारत के आयात खर्च पर पड़ता है। तेल महंगा होने से देश के व्यापार घाटे और अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ सकता है।कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी रहने पर पेट्रोल और डीजल की घरेलू कीमतों को नियंत्रित रखना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, घरेलू ईंधन कीमतों पर सरकार की कर नीति और तेल कंपनियों के मूल्य निर्धारण सहित कई अन्य कारकों का भी असर होता है। इसलिए कीमतों में बढ़ोतरी को अभी निश्चित नहीं माना जा सकता।
पेट्रोल-डीजल महंगा हुआ तो बढ़ेगी महंगाई
अगर ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी होती है, तो इसका असर केवल वाहन चलाने वाले लोगों तक सीमित नहीं रहेगा। माल ढुलाई की लागत बढ़ने से फल, सब्जियां, दूध, अनाज और रोजमर्रा की कई जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं।परिवहन खर्च बढ़ने का असर कारोबार और उद्योगों की लागत पर भी पड़ता है। इससे वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है और आम परिवारों का मासिक बजट प्रभावित हो सकता है। यानी पश्चिम एशिया में शुरू हुआ सैन्य तनाव भारत में महंगाई की समस्या को और बढ़ा सकता है।
रसोई गैस और ऊर्जा क्षेत्र पर भी असर
कच्चे तेल और गैस की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी का असर ऊर्जा क्षेत्र पर भी पड़ सकता है। यदि पश्चिम एशिया में संघर्ष लंबा चलता है, तो गैस की आपूर्ति और परिवहन लागत को लेकर भी चिंता बढ़ सकती है। इसका प्रभाव औद्योगिक क्षेत्र और घरेलू उपभोक्ताओं दोनों पर पड़ सकता है।भारत में पहले से ही ऊर्जा कीमतों को लेकर लोगों की नजर बनी रहती है। ऐसे में ईरान-अमेरिका तनाव अगर लंबे समय तक जारी रहता है, तो रसोई गैस और अन्य ऊर्जा उत्पादों की कीमतों पर भी दबाव बन सकता है। हालांकि, वास्तविक असर अंतरराष्ट्रीय कीमतों और सरकार के फैसलों पर निर्भर करेगा।
शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है असर
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिल सकता है। महंगा तेल भारत के लिए आयात लागत बढ़ाता है और इससे कई कंपनियों के मुनाफे पर दबाव आ सकता है। खासकर परिवहन, विमानन और अधिक ईंधन इस्तेमाल करने वाले क्षेत्रों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।दूसरी ओर, तेल और गैस से जुड़े कुछ क्षेत्रों को ऊंची अंतरराष्ट्रीय कीमतों से लाभ भी मिल सकता है। बाजार में निवेशकों की चिंता बढ़ने पर उतार-चढ़ाव तेज हो सकता है। इसलिए पश्चिम एशिया में आगे होने वाली सैन्य और कूटनीतिक घटनाओं पर भारतीय बाजार की नजर बनी रहेगी।
भारत के लिए कितना बड़ा खतरा
फिलहाल भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा सीधे सैन्य टकराव का नहीं, बल्कि ऊर्जा आपूर्ति और महंगाई से जुड़ा हुआ है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात बाधित होता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि हो सकती है। इसका असर भारत के आयात बिल से लेकर आम आदमी की जेब तक पहुंच सकता है।भारत के लिए पश्चिम एशिया में शांति और समुद्री व्यापार मार्गों का खुले रहना बेहद महत्वपूर्ण है। यदि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष सीमित रहता है, तो आर्थिक नुकसान को नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन संघर्ष दूसरे देशों और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों तक फैलता है, तो भारत समेत पूरी दुनिया के लिए चुनौती काफी बड़ी हो सकती है।
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