‘बच्चों की प्यारी दीनी कहानियां’ का विमोचन:कहानियों के साथ सवाल-जवाब और गतिविधियां भी शामिल
लखनऊ। बच्चों में तालीम, अच्छे अख़लाक़ और इंसानी मूल्यों की बुनियाद मजबूत करने के उद्देश्य से लिखी गई किताब ‘बच्चों की प्यारी दीनी कहानियाँ’ का रस्म-ए-इजरा बाबुल इल्म, सज्जाद बाग में किया गया। किताब का विमोचन इमाम-ए-जमाना (अ.फ.) के नायब, ग्रैंड रिलीजियस अथॉरिटी आयतुल्लाह सैयद अली सिस्तानी के भारत में प्रतिनिधि आगा अशरफ अली ग़रवी ने किया। किताब की लेखिका मरियम फ़ातिमा रिज़वी हैं। पुस्तक में बच्चों की उम्र और समझ को ध्यान में रखते हुए दीनी वाक़ियात और अख़लाक़ी सबक को सरल एवं दिलचस्प अंदाज़ में पेश किया गया है। हज़रत आदम (अ.स.), हज़रत मूसा (अ.स.) और हज़रत यूसुफ़ (अ.स.) से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से बच्चों को सच्चाई, सब्र, शुक्र, माफ़ी, अल्लाह पर भरोसा और हसद से बचने जैसे मूल्यों की सीख देने की कोशिश की गई है। किताब की खासियत यह है कि इसे केवल कहानी पढ़ने तक सीमित नहीं रखा गया है। हर कहानी के बाद सबक़, सवाल-जवाब और गतिविधियों को शामिल किया गया है, ताकि बच्चे कहानी को समझने के साथ उसे अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी से भी जोड़ सकें। मरियम फ़ातिमा रिज़वी का संबंध एक इल्मी और अदबी परिवार से है। वह आयतुल्लाह सैयद हामिद हुसैन, अल्लामा ग़ुलाम हुसैन किन्तूरी और जस्टिस करामत हुसैन जैसी इल्मी शख्सियतों से जुड़ी किन्तूर की रवायत वाले परिवार की बेटी हैं। वह नगराम के सैयद शुजाअत हुसैन रिज़वी की पोती और जर्नलिस्ट रिज़वान मुस्तफ़ा की बड़ी बेटी हैं। लेखिका के अनुसार, इस किताब की प्रेरणा उनके बचपन की उन यादों से मिली, जब उनकी अम्मी उन्हें दीनी कहानियाँ सुनाया करती थीं। उन्हीं कहानियों ने उन्हें मुश्किल समय में सब्र और हौसला दिया। इसी अनुभव को उन्होंने आज की नई पीढ़ी तक पहुँचाने की कोशिश की है। किताब का उद्देश्य बच्चों के दिलों में मोहब्बत, सच्चाई, सब्र और अच्छे अख़लाक़ की बुनियाद मजबूत करना है।
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