'बच्चों में बार-बार यूरिन,प्यास लगना डायबिटीज के लक्षण':SGPGI में पीडियाट्रिक एंडो क्लीनिक्स 2026 का आयोजन, हार्मोन संबंधी बीमारियों की पहचान और इलाज पर मंथन
बच्चों में बार-बार पेशाब आना, बहुत प्यास लगना और तेजी से वजन घटना टाइप-1 डायबिटीज के लक्षण हो सकते हैं। इन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। समय पर बीमारी की पहचान और इंसुलिन से इलाज जरूरी है। यह जानकारी पीजीआई के निदेशक डॉ.आरके धीमन ने रविवार को दी। SGPGI के टेलीमेडिसिन ऑडिटोरियम में रविवार को पीडियाट्रिक एंडो क्लीनिक्स 2026 का आयोजन हुआ। इसमें विशेषज्ञों ने बच्चों में हार्मोन संबंधी बीमारियों की पहचान, इलाज और बेहतर देखभाल पर चर्चा की। नियमित जांच जरूरी डॉ.आरके धीमान ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बच्चों और किशोरों की आबादी करीब 10 करोड़ है। ऐसे में विशेषज्ञ बाल चिकित्सा सेवाओं का विस्तार जरूरी है। पीजीआई के पीडियाट्रिक एंडोक्रिनोलॉजी विभाग में टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों के लिए विशेष क्लिनिक चलाया जाता है। यहां बच्चों और उनके परिजनों को इंसुलिन के इस्तेमाल, ब्लड शुगर की नियमित जांच और बीमारी को संभालने की जानकारी दी जाती है। संतुलित दिनचर्या और डॉक्टर की सलाह के मुताबिक इलाज जारी रखना जरूरी है। हार्मोन की गड़बड़ी से प्रभावित हो सकता है विकास डॉ.आरके धीमन ने कहा कि बच्चों में हार्मोन का असंतुलन थायरॉयड की बीमारी, मोटापे और टाइप-1 डायबिटीज जैसी समस्याओं की वजह बन सकता है। हड्डियों और खनिजों से जुड़ी गड़बड़ी से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं और बार-बार फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है। बच्चों की लंबाई का उम्र के हिसाब से नहीं बढ़ना और शारीरिक विकास में देरी भी हार्मोन संबंधी समस्या के संकेत हो सकते हैं। इसके अलावा समय से पहले या देर से यौवन आना भी जांच की जरूरत का संकेत है। ऐसे लक्षण दिखने पर बच्चों को विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाना चाहिए। समय पर जांच और इलाज से गंभीर जटिलताओं का खतरा कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि पीजीआई में राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति के तहत ग्रोथ हार्मोन थेरेपी भी मुफ्त उपलब्ध कराई जाती है।
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