बदायूं की सियासत में भाजपा के सामने नेतृत्व की चुनौती:सपा के पास सांसद आदित्य यादव, BJP में बड़े चेहरे पर चर्चा
बदायूं में विधानसभा की तीन सीटों पर कब्जे के बावजूद भाजपा के सामने जिले में बड़े राजनीतिक चेहरे की पहचान का सवाल खड़ा हो रहा है। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के पास सांसद आदित्य यादव और दो विधायकों के रूप में जिले में अपना राजनीतिक नेतृत्व है। इसी बीच केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा का यह कहना कि भाजपा के पास अनगिनत चेहरे हैं, जिले की सियासत में चर्चा का विषय बन गया है। दरअसल, बदायूं की सदर, बिल्सी और दातागंज विधानसभा सीटों पर भाजपा के विधायक क्रमशः महेश चंद्र गुप्ता, हरीश शाक्य और राजीव कुमार सिंह हैं। वहीं, समाजवादी पार्टी के पास सहसवान से ब्रजेश यादव और शेखूपुर से हिमांशु यादव विधायक हैं। बदायूं लोकसभा सीट से आदित्य यादव सांसद हैं। इस लिहाज से भाजपा के पास विधानसभा में संख्या बल ज्यादा है, लेकिन जिले में बड़े संगठनात्मक चेहरे की चर्चा अलग है। जिले की राजनीति में एक प्रमुख चेहरा सपा के पास सांसद के रूप में आदित्य यादव की मौजूदगी उसे जिले की राजनीति में एक प्रमुख चेहरा देती है। ऐसे में भाजपा के सामने अपने विधायकों के साथ संगठनात्मक नेतृत्व को भी जिले में मजबूत पहचान दिलाने की चुनौती है। यह सवाल इसलिए भी उठ रहा है, क्योंकि बदायूं निवासी दुर्विजय शाक्य ब्रज क्षेत्र अध्यक्ष रहे हैं। अब वह भी प्रदेश उपाध्यक्ष जैसे संगठनात्मक पद पर हैं। वहीं, बीएल वर्मा केंद्र सरकार में राज्यमंत्री हैं, लेकिन उनका कार्यकाल अगले महीने खत्म हो रहा है। भाजपा के लिए पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप का पार्टी छोड़ना भी राजनीतिक रूप से अहम है। वह आंवला लोकसभा सीट से दो बार भाजपा सांसद रहे हैं। दातागंज और शेखूपुर विधानसभा क्षेत्र आंवला लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा हैं। इन दोनों क्षेत्रों में धर्मेंद्र कश्यप का सजातीय मतदाताओं समेत एक बड़े वोट बैंक से जुड़ाव माना जाता है। ऐसे में उनका भाजपा से अलग होना पार्टी के लिए केवल एक नेता के जाने का मामला नहीं है। इसका असर इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा के सामाजिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है। औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल बिसौली में भी सियासी स्थिति अलग है। यहां से सपा के टिकट पर विधायक बने आशुतोष मौर्य ने पिछली राज्यसभा के दौरान क्रॉस वोटिंग की थी। उनके रुख को भाजपा के प्रति झुकाव के तौर पर देखा गया, हालांकि इसे औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल होना नहीं कहा जा सकता। यहां भी सियासी समीकरण पूर्व बीजेपी विधायक कुशाग्र सागर आने वाले दिनों में बदल सकते हैं। ऐसे में बीएल वर्मा का ‘अनगिनत चेहरे’ वाला बयान भाजपा के आत्मविश्वास को दिखाता है। वहीं नए सवाल भी छोड़ रहा है।
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