बदायूं पुलिस को तस्करों को छोड़ने के आरोप में क्लीनचिट:8 लाख रुपए लेने का था आरोप, अफीम नहीं असलाह तस्करी का मामला था
बदायूं में तीन लोगों को पकड़ने के बाद आठ लाख रुपए लेकर छोड़ने के आरोपों से घिरी इस्लामनगर थाना पुलिस को जांच में क्लीनचिट मिल गई है। अब इस मामले में नया तथ्य सामने आया है कि पुलिस ने कार्रवाई अफीम तस्करी की सूचना पर नहीं, बल्कि अवैध असलहों की तस्करी की सूचना मिलने के बाद की थी। एसपी सिटी अभिषेक सिंह ने मामले की जांच की थी। उनकी जांच में थाना पुलिस को राहत मिली है। इस्लामनगर थाना पुलिस पर आरोप लगा था कि बरेली के सिरौली क्षेत्र के दो युवकों और बदायूं के दबतोरी निवासी उनके एक रिश्तेदार को अफीम तस्करी के आरोप में पकड़ा गया। जबकि बाद में आठ लाख रुपये वसूलकर तीनों छोड़ दिए गए। रकम जुटाने के लिए परिजनों और ग्रामीणों से चंदा लेने की बात भी सामने आई थी। मामला चर्चा में आने के बाद पुलिस महकमे ने जांच शुरू कराई। शुरुआत में सीओ बिल्सी आलोक सिद्धू ने मामले की जांच की थी। इसके बाद एसपी सिटी अभिषेक सिंह को जांच सौंपी गई। जांच के दौरान इस्लामनगर थाने के चार सिपाहियों को वहां से हटाया गया था। रितिक तेवतिया को लाइन हाजिर किया गया, जबकि अनुज चौधरी, काले सिंह और कपिल कुमार को दूसरे थानों में भेजा गया था। मामले की पड़ताल के लिए पीलीभीत की एएसपी नताशा गोयल ने भी जांच की थी। उन्होंने थाने पहुंचकर पुलिसकर्मियों से पूछताछ की, सीसीटीवी फुटेज देखे और थाने के पिछले रास्ते का निरीक्षण किया था। संबंधित लोगों के घर जाकर भी बयान दर्ज किए गए थे। अब एसपी सिटी की जांच में थाना पुलिस को क्लीनचिट मिलने से मामले में नया मोड़ आया है। पुलिस की ओर से धरपकड़ का आधार अवैध असलहों की तस्करी की सूचना बताया गया है। एसपी सिटी ने बताया कि प्रकरण की कई पहलुओं पर जांच की गई लेकिन पुलिस के खिलाफ ठोस साक्ष्य नहीं मिले। इसलिए पुलिस टीम को क्लीनचिट दी गई है।
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