बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल: फाल्टा से तृणमूल प्रत्याशी जहांगीर खान ने चुनाव लड़ने से किया इनकार
पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट पर दोबारा मतदान से पहले तृणमूल कांग्रेस प्रत्याशी जहांगीर खान ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। इस फैसले के बाद बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और ममता बनर्जी पर कई सवाल उठने लगे हैं।
दि राइजिंग न्यूज डेस्क | 19 मई 2026
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी विस्फोट देखने को मिला है। फाल्टा विधानसभा सीट पर होने वाले दोबारा मतदान से ठीक पहले तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी जहांगीर खान ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। उनके इस फैसले ने ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ती बेचैनी और दबाव का संकेत माना जा रहा है। मतदान से महज दो दिन पहले उम्मीदवार के पीछे हटने से पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
फाल्टा सीट पर पहले भी लग चुके हैं धांधली के आरोप
फाल्टा विधानसभा सीट पहले से ही विवादों के केंद्र में रही है। 29 अप्रैल को हुए मतदान के दौरान कई बूथों पर भारी गड़बड़ी और धांधली के आरोप सामने आए थे। भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों के चुनाव चिह्न वाले बटन पर सफेद पट्टी लगाए जाने की शिकायतों ने पूरे चुनाव को संदेह के घेरे में ला दिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए निर्वाचन आयोग ने विशेष पर्यवेक्षक भेजकर जांच कराई थी। जांच रिपोर्ट में कई अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद पूरे क्षेत्र में दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया गया।
पुष्पा झुकेगा नहीं कहने वाले जहांगीर ने बदला रुख
जहांगीर खान चुनाव प्रचार के दौरान अपने आक्रामक अंदाज और फिल्मी संवादों की वजह से लगातार चर्चा में बने हुए थे। उन्होंने सार्वजनिक मंच से “पुष्पा झुकेगा नहीं” जैसा संवाद बोलकर खुद को मजबूत उम्मीदवार के रूप में पेश किया था। उनका यह बयान सामाजिक माध्यमों पर तेजी से वायरल हुआ था और तृणमूल समर्थकों ने इसे बड़े अभियान की तरह प्रचारित किया था। लेकिन अब अचानक चुनावी मैदान छोड़ने के फैसले ने सभी को चौंका दिया है। विरोधी दल अब इस मुद्दे को लेकर तृणमूल कांग्रेस पर लगातार हमला बोल रहे हैं।
शुभेंदु अधिकारी के बयान के बाद बढ़ा विवाद
राजनीतिक विवाद उस समय और बढ़ गया जब पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जहांगीर खान को लेकर कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि “पुष्पा अब मेरी जिम्मेदारी है।” इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई थी। माना जा रहा है कि इसी बयान के बाद जहांगीर खान पर दबाव बढ़ा और उन्होंने कानूनी सुरक्षा की मांग शुरू कर दी। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बंगाल में अब चुनाव केवल मतदान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का माध्यम बन चुका है।
कलकत्ता उच्च न्यायालय पहुंचे थे जहांगीर खान
चुनाव से पीछे हटने से पहले जहांगीर खान ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका भी दायर की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके खिलाफ लगातार नए आपराधिक मामले दर्ज किए जा रहे हैं और उन्हें गिरफ्तार करने की साजिश रची जा रही है। उनके वकील ने अदालत में कहा कि हर दिन नए मुकदमे दर्ज कर उन्हें मानसिक और राजनीतिक रूप से परेशान किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने मांग की थी कि उनके खिलाफ दर्ज सभी मामलों की जानकारी सार्वजनिक की जाए। इस याचिका के बाद मामला और ज्यादा राजनीतिक हो गया।
तृणमूल कांग्रेस की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
इतने बड़े घटनाक्रम के बावजूद तृणमूल कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। पार्टी नेतृत्व की चुप्पी को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। विपक्ष का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा और पार्टी के नेता लगातार दबाव में हैं। वहीं तृणमूल समर्थक इसे विपक्ष की राजनीतिक साजिश बता रहे हैं। लेकिन जिस तरह मतदान से ठीक पहले उम्मीदवार ने मैदान छोड़ा है, उसने पार्टी की रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दोबारा मतदान पर पूरे देश की नजर
निर्वाचन आयोग ने फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में 21 मई को दोबारा मतदान कराने का फैसला किया है। इस सीट के नतीजे अब 24 मई को घोषित किए जाएंगे। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि फाल्टा सीट अब केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं रही, बल्कि यह बंगाल की राजनीति की दिशा तय करने वाली सीट बन चुकी है। भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस दोनों ने इस सीट को प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है। ऐसे में दोबारा मतदान के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और निष्पक्षता सबसे बड़ा मुद्दा रहने वाला है।
बंगाल की राजनीति में और बढ़ सकता है टकराव
जहांगीर खान के चुनाव मैदान छोड़ने के बाद बंगाल की राजनीति और ज्यादा गरमा गई है। विपक्ष इसे तृणमूल कांग्रेस की अंदरूनी कमजोरी बता रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल इसे राजनीतिक प्रताड़ना का परिणाम बता सकता है। आने वाले दिनों में यह मामला और बड़ा राजनीतिक संघर्ष बन सकता है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि मतदान के दौरान फिर किसी तरह का विवाद सामने आता है, तो इसका असर पूरे राज्य की राजनीति पर पड़ सकता है। फिलहाल बंगाल की जनता और देश की नजरें अब फाल्टा सीट पर टिक गई हैं।