बेटे की मौत पर मां को नहीं मिला बीमा क्लेम:अलीगढ़ में बैंक की गलती से नहीं मिला लाभ, बैंक को 7% ब्याज के साथ भुगतान के आदेश
अलीगढ़ में बैंक की लापरवाही से एक मां को बेटे की मौत के बाद 2 लाख रुपए का बीमा क्लेम नहीं मिला। बेटे के खाते में बीमा प्रीमियम काटने के लिए पर्याप्त पैसे थे, लेकिन बैंक ने 100 रुपए नहीं काटे। इसके कुछ महीने बाद बेटे की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। मां ने क्लेम के लिए आवेदन किया, लेकिन भुगतान नहीं हुआ। करीब 9 साल तक चली कानूनी लड़ाई के बाद जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने मां के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने बैंक को 2 लाख रुपए की बीमा राशि पर शिकायत दर्ज करने की तारीख से भुगतान तक 7% सालाना ब्याज देने का आदेश दिया है। इसके अलावा 5 हजार रुपए मानसिक उत्पीड़न और 5 हजार रुपए मुकदमे के खर्च के रूप में देने होंगे। खाते में 500 रुपए जमा थे, फिर भी नहीं कटा प्रीमियम क्वार्सी की नीलकंठेश्वर कॉलोनी निवासी शीला देवी के बेटे शिव राज सिंह ने 2014 में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में खाता खुलवाया था। उसी दौरान 100 रुपए प्रीमियम देकर 2 लाख रुपए की बीमा पॉलिसी ली थी। बैंक स्टेटमेंट के मुताबिक, 18 अक्टूबर 2014 को प्रीमियम काटा गया था। पॉलिसी की अगली अवधि 18 अक्टूबर 2015 से 17 अक्टूबर 2016 तक थी। रिकॉर्ड के मुताबिक, शिव राज सिंह ने 15 अक्टूबर 2015 को खाते में 500 रुपए जमा किए थे। 22 नवंबर तक खाते में 100 रुपए से ज्यादा रकम मौजूद थी। इसके बावजूद बैंक ने पॉलिसी का नवीनीकरण नहीं किया। बेटे की मौत के बाद भी नहीं मिला क्लेम 11 जनवरी 2016 को शिव राज सिंह की दुर्घटना में मौत हो गई। पॉलिसी में उनकी मां शीला देवी नामित थीं। उन्होंने 4 और 6 अप्रैल 2016 को बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया, लेकिन उन्हें रकम नहीं मिली। इसके बाद शीला देवी ने 20 जून 2017 को एसबीआई की रामघाट रोड शाखा और संबंधित बीमा कंपनी के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। बैंक ने जवाब तक दाखिल नहीं किया आयोग के अध्यक्ष हसनैन कुरैशी और सदस्य पूर्णिमा सिंह राजपूत की पीठ ने 9 अक्टूबर 2026 को फैसला सुनाया। आयोग ने माना कि खाते में पर्याप्त रकम होने के बावजूद 100 रुपए का प्रीमियम नहीं काटना बैंक की सेवा में कमी है। बैंक ने पर्याप्त अवसर मिलने के बाद भी अपना लिखित जवाब दाखिल नहीं किया। वहीं, बीमा कंपनी ने कहा कि उसे संबंधित अवधि का प्रीमियम नहीं मिला था और उस अवधि के लिए पॉलिसी जारी नहीं हुई थी। आयोग ने बीमा राशि के भुगतान की जिम्मेदारी बैंक पर तय की। 2 लाख पर ब्याज के साथ 10 हजार रुपए अतिरिक्त देने होंगे आयोग ने बैंक को 2 लाख रुपए की बीमा राशि पर 7% सालाना ब्याज देने का आदेश दिया है। ब्याज शिकायत दर्ज करने की तारीख से भुगतान होने तक देना होगा। इसके अलावा 5 हजार रुपए मानसिक उत्पीड़न और 5 हजार रुपए मुकदमे के खर्च के लिए देने होंगे।
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