बेटी बचाओ भाजपा का नारा नहीं चेतावनी थी–अराधना:स्कूल से निकली बेटियां घर नहीं लौट रहीं, एक हफ्ते की 12 घटनाएं गिनाईं
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की नवनिर्वाचित अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना ने रविवार को भाजपा सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि बीते दस साल में आदित्यनाथ सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश बेटियों के लिए सर्वाधिक असुरक्षित प्रदेश बन गया है। घर से स्कूल निकली बेटियां लौटकर नहीं आतीं, दुष्कर्म का शिकार होती हैं और कई बार मौत के घाट उतार दी जाती हैं। बच भी गईं तो गर्भावस्था और प्रसव की पीड़ा में नाबालिग और उसके बच्चे दोनों की जान चली जाती है। उन्होंने कहा कि बेटी बचाओ भाजपा का नारा नहीं, चेतावनी थी। अब बेटियों पर आतंक सबके सामने है। यूपी की जनता कह रही है जिसने यूपी का किया ये हाल, उसे और क्यों दें पांच साल। एक सप्ताह की 12 घटनाएं गिनाई कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने बीते एक सप्ताह में महिलाओं के साथ हुई प्रमुख घटनाएं गिनाईं। इसमें बुलंदशहर के औरंगाबाद क्षेत्र में कक्षा 7 की 16 वर्षीय छात्रा पर घर लौटते समय चार युवकों द्वारा कार से अगवा कर सामूहिक दुष्कर्म किए जाने का आरोप लगा। तहरीर के बावजूद तत्काल मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। बस्ती में स्कूल से निकली कक्षा 7 की 15 वर्षीय छात्रा रानीपुर बाबू चौराहे के पास बेहोशी की हालत में मिली, परिजनों ने सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया। बस्ती में ही 29 सितंबर की रात गौर क्षेत्र में नाबालिग को गन्ने के खेत में ले जाकर दुष्कर्म का आरोप लगा। बांदा में नरैनी क्षेत्र में नाबालिग को बहाने से बाइक पर बैठाकर सुनसान जगह ले जाने और सामूहिक दुष्कर्म का आरोप, सोनभद्र में दुष्कर्म की शिकार 14 वर्षीय किशोरी गर्भवती हुई; प्रसव के दौरान मृत बच्चे को जन्म देने के बाद अत्यधिक रक्तस्राव से मौत, कौशांबी में कड़ा धाम क्षेत्र में किशोरी के साथ लंबे समय तक दुष्कर्म और गर्भवती होने का मामला सामने आया। इसी तरह ललितपुर में तालबेहट क्षेत्र में पांच वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म की घटना, मुजफ्फरनगर में 16 वर्षीय किशोरी को बहला-फुसलाकर और धमकाकर ले जाने तथा दुष्कर्म का आरोप, गोरखपुर में नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म का मामला, मेरठ में नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म और वीडियो वायरल करने की धमकी का आरोप, प्रयागराज में गंगापार क्षेत्र में 10 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म का मामला और लखनऊ के निगोहां क्षेत्र में 15 वर्षीय किशोरी को बहला-फुसलाकर ले जाने और दुष्कर्म का आरोप लगा। एनसीआरबी के आंकड़ों का किया जिक्र अराधना मिश्रा ने एनसीआरबी के 2023 के आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि सवाल सिर्फ इन घटनाओं का नहीं पूरी व्यवस्था का है। प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराध के एक वर्ष में 66,381 मामले दर्ज हुए। औसतन करीब 182 मामले प्रतिदिन। इसी आधार पर दुष्कर्म के 3,516 मामले दर्ज हुए, औसतन करीब 9.6 प्रतिदिन। हत्या के 3,206 मामले और एसिड अटैक के 31 मामले दर्ज होने का दावा किया गया। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का भी जिक्र आराधना मिश्रा ने 30 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का हवाला दिया। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने बुलंदशहर से जुड़े एक मामले की सुनवाई में यूपी पुलिस की जांच पर मौखिक रूप से कड़ी नाराजगी जताई थी। शिकायतकर्ता द्वारा आरोपी को मौके पर पकड़कर सौंपने के बावजूद एफआईआर “अज्ञात” के खिलाफ दर्ज होने पर कोर्ट ने कहा था कि हम यूपी पुलिस को भंग भी कर सकते हैं और सभी जांच सीबीआई को सौंपने पर विचार हो सकता है। कोर्ट ने इसे कवर-अप की कोशिश बताया और कहा, यह बकवास किसी न किसी बिंदु पर रुकनी चाहिए। प्रदेश सरकार से सवाल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने पूछा कि जब स्कूल से घर लौटती बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं, पांच साल की बच्ची सुरक्षित नहीं है, दस साल की बच्ची सुरक्षित नहीं है और नाबालिग छात्राओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, तो सरकार हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठी है? उन्होंने कहा कि जो सत्ता बेटियों को सुरक्षित स्कूल, सड़क और घर नहीं दे सकती, उसे जनता उखाड़ फेंकेगी। बेटियां डर में नहीं, सम्मान और सुरक्षा के साथ जीना चाहती हैं।
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