भाजपा छोड़ने पर धर्मेंद्र कश्यप बोले- घुटन हो रही थी:बरेली में जिन लोगों ने चुनाव हराया, वही आज पहली पंक्ति में बैठ, पूरा इंटरव्यू पढ़िए
बरेली में आंवला के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने भाजपा छोड़ दी है। उन्होंने कहा-भाजपा में घुटन हो रही थी, इसलिए पार्टी छोड़ी है। इससे पहले मंगलवार को धर्मेंद्र कश्यप ने फेसबुक पर टाटा बाय-बाय’ लिखकर पोस्ट किया था। इसके बाद सोशल मीडिया प्रोफाइल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर भी हटा दी थी। धर्मेंद्र कश्यप झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार और कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने के बाद से असंतुष्ट थे। उन्होंने कहा- भाजपा में नए कार्यकर्ता के तौर पर नहीं आए था। इससे पहले विधायक, मंत्री और सांसद रह चुका हूं। अपना जनाधार बनाकर भाजपा में आया था। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने भाजपा छोड़ने की वजह, प्रदेश की कानून-व्यवस्था, राम मंदिर में चढ़ावा चोरी, 2027 के चुनाव और अपनी बेटी के चुनाव लड़ने समेत कई मुद्दों पर खुलकर बात की। पूरा इंटरव्यू पढ़िए… प्रश्न: आपकी ‘टाटा बाय-बाय’ वाली सोशल मीडिया पोस्ट से सियासी हलचल मच गई। आखिर भाजपा छोड़ने की वजह क्या रही? उत्तर: देखिए, हम भाजपा में घुट-घुटकर रह रहे थे। सबसे ज्यादा कष्ट इस बात का था कि जिन लोगों ने हमें चुनाव हराने का काम किया, वही आज पार्टी के मंच और कार्यक्रमों में पहली पंक्ति में बैठ रहे हैं। पहले हमने सोचा कि पार्टी के कार्यक्रमों में जाना ही बंद कर दें, लेकिन जब उससे भी बात नहीं बनी तो हमने तय किया कि अब टाटा बाय-बाय करना ही बेहतर है। प्रश्न: आप दो बार सांसद रहे और इलाके में पार्टी को मजबूत किया। फिर यह नौबत क्यों आई? उत्तर: पार्टी को हमने भी मजबूत किया और पार्टी ने भी हमें सहारा दिया। यह दोनों तरफ से होता है। हम कोई मूल भाजपाई नहीं हैं। हम भाजपा में बने-बनाए नेता के रूप में आए थे। इससे पहले विधायक रहे, मंत्री रहे और पार्लियामेंट का चुनाव भी लड़ा। जब विचारधारा और पटरी नहीं बैठ रही थी तो टाटा बाय-बाय कर दिया। प्रश्न: प्रदेश के मौजूदा सियासी और प्रशासनिक हालात को किस तरह देखते हैं? उत्तर: प्रदेश में आज दोहरी व्यवस्था चल रही है। कुछ लोगों के लिए कानून अलग है और कुछ के लिए अलग। जब कानून अपने हिसाब-किताब से काम करेगा तो जनता में निराशा स्वाभाविक है। कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए। अमीर-गरीब, अगड़े-पिछड़े सभी के लिए एक जैसा कानून होना चाहिए। प्रश्न: क्या आपको लगता है कि कानून-व्यवस्था में भेदभाव हो रहा है? उत्तर: बिल्कुल। बदायूं की एचपीसीएल की घटना को देख लीजिए, जहां दो अधिकारियों की हत्या हो गई। लेकिन उन अपराधियों पर कोई सख्त कार्रवाई या एनकाउंटर नहीं हुआ। दूसरी तरफ छोटी-छोटी बातों पर एनकाउंटर कर दिए जाते हैं। मन में यह टीस थी कि जब ऐसे हालात हैं तो अपने आप को किनारे कर लेना ही ठीक है। प्रश्न: क्या कश्यप समाज को नजरअंदाज किया जा रहा है? आपका अगला कदम क्या होगा? उत्तर: कश्यप समाज को तो हमेशा से ही नजरअंदाज किया गया है। इसमें कोई नई बात नहीं है। जहां तक मेरे भविष्य का सवाल है, हम कोई हवा-हवाई नेता नहीं हैं। हमारा जनाधार जनता के बीच है। सिर्फ आंवला या बिथरी ही नहीं, शामली, मुजफ्फरनगर, बिजनौर से लेकर पूरे पूर्वांचल तक हमारे समर्थक हैं। हम साथियों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं। जल्द ही बड़ी पंचायत करेंगे और उसके बाद अगला फैसला लेंगे। प्रश्न: अखिलेश यादव के PDA फॉर्मूले और उनके नेतृत्व को आप किस तरह देखते हैं? उत्तर: अखिलेश यादव बहुत सूझबूझ वाले नेता हैं। उनके नेतृत्व में काफी सकारात्मक परिवर्तन आया है। PDA फॉर्मूले पर हम आगे विस्तार से बात करेंगे। प्रश्न: सरकार धर्म और विकास के दावों के साथ आगे बढ़ रही है। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले पर क्या कहेंगे? उत्तर: धर्म का चोला पहनकर अब राजनीति में आगे नहीं बढ़ा जा सकता। धर्म की बात एक-दो बार कही जा सकती है, बार-बार नहीं। जनता अब बहुत समझदार हो चुकी है। लोगों को आज असल मुद्दों की जरूरत है। रोटी, कपड़ा, मकान, सम्मान और पहचान चाहिए। आज स्कूल बंद हो रहे हैं, स्कूलों का मर्जर हो रहा है और शराब के ठेके खुल रहे हैं। जनता सब देख रही है और समझ रही है। प्रश्न: क्या 2027 में उत्तर प्रदेश की सत्ता में कोई बड़ा बदलाव देख रहे हैं? उत्तर: प्रदेश में परिवर्तन की हवा चल रही है, परिवर्तन की बयार बह रही है। प्रश्न: आपकी बेटी भी क्षेत्र में सक्रिय हैं। क्या वह आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेंगी? उत्तर: हां, बिल्कुल। वह जनता की सेवा में जुटी हैं। सीट कौन सी होगी, दातागंज या कोई दूसरी, यह समय आने पर तय होगा। लेकिन उनका चुनाव लड़ना पूरी तरह निश्चित है।
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