गुड़िया ने 4.50 लाख से ज्यादा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया:बलिया में परिवार के खिलाफ जाकर शुरू की संस्था, बिंदी बनाने, मसाला पैकिंग का काम सिखाया
संघर्षों से घबराकर पीछे हटने के बजाय अपना रास्ता खुद बनाना ही सच्ची सफलता की पहचान है। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रसड़ा विकासखंड के अमहर उत्तर पट्टी गांव निवासी गुड़िया राज ने इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है। परिवार के समर्थन के बिना और तमाम सामाजिक बंदिशों के बावजूद उन्होंने न केवल अपनी पढ़ाई पूरी की, बल्कि आत्मनिर्भर बनकर पूर्वांचल की हजारों महिलाओं और छात्राओं को भी आत्मनिर्भरता की राह दिखाई। वर्ष 2020 में गुड़िया राज ने समाजसेवा और महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से 'नारी शक्ति सेवा संस्थान (आराध्या फाउंडेशन)' की नींव रखी। शुरुआत में परिवार के लोग उनके इस फैसले के पक्ष में नहीं थे। आर्थिक सहयोग न मिलने के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने और आत्मनिर्भर बनने के लिए सैनिटरी पैड बेचने का काम शुरू किया। इसके बाद घर-घर जाकर ग्रामीण महिलाओं को मासिक धर्म स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के साथ बिंदी निर्माण, मसाला पैकेजिंग और रुई-बत्ती निर्माण जैसे छोटे गृह उद्योगों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। गुड़िया की मेहनत और लगन का असर धीरे-धीरे दिखाई देने लगा। छात्राएं और ग्रामीण महिलाएं उनके अभियान से जुड़ती चली गईं। आज उनकी संस्था का कार्यक्षेत्र बलिया के साथ मऊ और गाजीपुर तक फैल चुका है। संस्था के माध्यम से अब तक करीब 4.50 लाख छात्राओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए जागरूक किया जा चुका है। अभियान से जुड़ी महिलाएं और छात्राएं बिंदी बनाने, मसाला पैकेजिंग और रुई-बत्ती निर्माण जैसे कार्य कर रही हैं। इससे वे आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ अपने परिवार का सहारा भी बन रही हैं। संस्था की प्रबंध निदेशक गुड़िया राज महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के साथ गरीब परिवारों की बच्चियों को निःशुल्क शिक्षा भी उपलब्ध करा रही हैं। गुड़िया राज का कहना है, "हमारा उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़ी हर महिला और बेटी को सहारा देना है। यदि हमारी संस्था 'नारी शक्ति सेवा संस्थान (आराध्या फाउंडेशन)' को सहयोग या डोनेशन मिलता है, तो हम निर्धन और असहाय परिवारों की बेटियों का विवाह कराने की दिशा में भी काम करना चाहते हैं।" गुड़िया राज की यह सोच और संघर्ष की कहानी नारी सशक्तिकरण की एक प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई है। अपने संघर्ष के दम पर उन्होंने न केवल खुद की पहचान बनाई, बल्कि बड़ी संख्या में महिलाओं और छात्राओं को आत्मनिर्भर बनने की राह भी दिखाई है।
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