भाजपा पार्षद ने कहा-मैं जनता की बात करता था:भाजपाई कहते थे संगठन की कमी उजागर न करिए
सपा में जाने की तैयारी कर रहे भाजपा पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी ने पार्टी छोड़ने की वजह बताते हुए कहा कि जब मैं सदन में जनता की आवाज उठाता था तो भाजपा के बड़े नेता और पार्षद कहते थे कि संगठन की कमी उजागर न करिए। मैंने जनता से वोट लिया है और सरकार जनता की परेशानी नहीं समझेगी तो भविष्य में जनता के बीच जाकर वोट मांगने में बड़ी समस्या होगी। एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि को जनता की समस्या के निवारण के लिए सदन भेजा जाता है। भाजपा में रहकर आम जनमानस की समस्या नहीं उठा सकते। पार्षद ने कहा कि इसका एक उदाहरण है कि जब मैं जनता की बात कर रहा था तो सांसद जाति, धर्म व दल की बात कर रहे थे। ऐसे दल में रहकर काम करने से अच्छा है कि जहां ब्राह्मणों को सम्मान मिले और जहां जनता की आवाज को प्रमुखता से उठाने की सहमति रहे, ऐसे दल में चला जाए। इसीलिए मैंने सपा को चुना है। राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव सर्वमान्य नेता हैं। उनका विजन काफी अच्छा है। सांसद रविकिशन ब्राह्मणों के दो मोहल्ले नहीं बता पाएंगे विश्वजीत की जब सांसद रविकिशन से बहस हुई थी, उस समय रविकिशन ने कहा था कि 'सपा ज्वाइन कर लिए क्या' इस घटना को लगभग एक महीने बीत चुके हैं और अब विश्वजीत के सपा में जाने की पृष्ठभूमि तैयार हो चुकी है। चर्चा हो रही है कि सांसद की बात सही हो गई। विश्वजीत का इस सवाल पर कहना है कि जब जनता की बात करिए तो सांसद जाति, धर्म और पार्टी की बात करते हैं। भाजपा में रहकर जनता की समस्या उठा नहीं सकते। ब्राह्मणों का यहां कोई सम्मान नहीं है। इसलिए जहां सम्मान है, जहां जनता की बात कर सकते हैं, वहां जा रहे हैं। सांसद खुद को ब्राह्मणों का नेता कहते हैं लेकिन ब्राह्मणों के दो मोहल्लों का नाम नहीं बता पाएंगे। मामखोर का वंशज बताते हैं लेकिन अपने एक पटीदार का नाम नहीं जानते होंगे। लाभ के लिए भाजपा में नहीं आया था समय-समय पर यह बात भी उठती रहती है कि बेतियाहाता के पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी सत्ता के नजदीक रहने के लिए भाजपा में आए थे। लेकिन विश्वजीत इससे इनकार करते हैं। इस सवाल के जवाब में वह तर्क देते हैं। विश्वजीत कहते हैं कि मैं चुनाव जीत चुका था। जिस वार्ड से मैं पार्षद हूं वहां पूरा वार्ड भाजपाई है। उन लोगों ने भी कहा कि भाजपा में आ जाने से समस्याओं का समाधान और प्रभावी तरीके से हो सकेगा। इसलिए मैं भाजपा में आया। लेकिन जब जन समस्या की बात की तो चुप कराने का प्रयास किया गया। इसलिए ऐसे दल में रहने की क्या जरूरत। मैं जब टिकट के लिए यहां आता तो मेरा स्वार्थ कह सकते थे। अखिलेश यादव, उत्तर प्रदेश के ब्राह्मणों के चंद्रगुप्त हैं विश्वजीत कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों का अपमान हो रहा है। उदाहरण के रूप में प्रयागराज में ब्राह्मणों की शिखा खींचने से लेकर तमाम उदाहरण देते हैं। मगध के राजा घनानंद का जिक्र भी करते हैं। विश्वजीत कहते हैं कि सत्ता के नशे में चूर घनानंद ने चाणक्य की शिखा खींची थी। चाणक्य ने चंद्रगुप्त मौर्य को बनाया। घनानंद के साम्राजय का नाश हो गया। आज उत्तर प्रदेश में भी ब्राह्मण अखिलेश यादव को चंद्रगुप्त मान चुके हैं। यहां भी बदलाव होकर रहेगा। ब्राह्मण सपा के साथ जाएंगे। रविकिशन, मनोरंजन के साधन हैं दो बार के पार्षद विश्वजीत कहते हैं कि ब्राह्मण सपा में जाएंगे जबकि दो बार के सांसद रविकिशन ने मुख्यमंत्री के मंच से जोर देकर कहा कि ब्राह्मण कहीं नहीं जाएगा, वह भाजपा में रहेगा। रविकिशन के इस दावे पर विश्वजीत कहते हैं कि वह खुद ही फर्जी ब्राह्मण हैं। जौनपुर से आए हैं, यहां के किसी ब्राह्मण के दुख में कभी शामिल नहीं हुए। किसी मुद्दे पर यदि बोला हो उन्होंने तो बताएं। रविकिशन केवल मंच पर मुख्यमंत्री के मनोरंजन के साधन हैं। धर्म को लेकर काम करने वाली भाजपा से ब्राह्मण आखिर क्यों नाराज होंगे? विश्वजीत के दावों पर सवा उठता है कि हिन्दू धर्म के लिए सरकार काम कर रही है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर बना। मंदिरों के जीर्णोद्धार और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए गए। प्रवृत्ति से धार्मिक ब्राह्मण आखिर ऐसी पार्टी को छोड़कर कहीं और क्यों जाएगा? इस सवाल के जवाब में विश्वजीत कहते हैं कि धर्म के नाम पर काम तो हुआ है लेकिन राम मंदिर में जो अधर्म हुआ, भगवान राम के नाम पर चंदा चोरी हुई। उसका पाप भाजपा को लगेगा। उत्तर प्रदेश में जो क्रिया कलाप हो रहा है, वो किसी से छुपा नहीं है। राम के नाम पर आए हैं और रामधन की चोरी के नाम पर जा रहे हैं। जो इस प्रकरण में शामिल थे और सामर्थ्यवान थे, वे छूट गए। जो कर्मचारी थे, उनपर कार्रवाई हो गई।
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