भमोला का रावण दहन मेला भगवान भरोसे:अलीगढ़ में नुमाइश मैदान पर फोकस, आयोजकों का आरोप- पत्राचार के बाद भी न लाइटें लगीं, न मैदान समतल हुआ
शहर में दशहरा आयोजनों की तैयारियों के बीच पुरानी बस्ती भमोला की एक तस्वीर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। यहां 52वें आदर्श रामलीला कमेटी के रावण दहन मेले की तैयारियां स्थानीय लोग सामूहिक सहयोग से कर रहे हैं, लेकिन आयोजकों का आरोप है कि जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस की ओर से जरूरी इंतजाम तक नहीं किए गए। न रास्तों पर रोशनी की व्यवस्था है, न मैदान समतल कराया गया है और न ही जलभराव से राहत मिली है। आयोजकों के मुताबिक, हर साल नुमाइश मैदान पर होने वाले दशहरा आयोजन पर पूरा ध्यान रहता है, जबकि शहर की पुरानी बस्ती भमोला के मेले को उसके हाल पर छोड़ दिया जाता है।
मंगलवार को यहां रावण दहन होना है। आयोजकों का दावा है कि आसपास के इलाकों से 25 से 30 हजार लोग मेला देखने पहुंचते हैं। इनमें महिलाएं, बच्चे और दोनों समुदायों के लोग शामिल होते हैं। ऐसे में बदहाल मैदान, उड़ती धूल और रास्तों पर अंधेरा भीड़ की सुरक्षा और सुविधा के लिहाज से गंभीर सवाल हैं।
पत्र दिए, फिर भी नहीं जगी जिम्मेदारों की नींद
आयोजक लोकेश के मुताबिक, हर साल जिलाधिकारी कार्यालय से रावण दहन मेले की अनुमति ली जाती है। इसकी प्रतियां अपर नगर आयुक्त, एसपी सिटी, एसपी ट्रैफिक, सीओ, संबंधित थानों, अग्निशमन विभाग और सीएमओ समेत सभी संबंधित अधिकारियों को भेजी जाती हैं। नगर निगम को 28 अगस्त और 28 सितंबर को भी पत्र दिए गए, लेकिन इसके बावजूद मेला मार्ग पर लाइटों की व्यवस्था नहीं की गई। निर्माण विभाग को पत्र देने के बाद भी मैदान का समतलीकरण नहीं हुआ।
मैदान में राख, ठेलों के पास जलभराव
आयोजकों का कहना है कि मेला स्थल पर राख बिछी हुई है। रावण दहन के बाद निकलने वाले स्वरूपों और श्रद्धालुओं की आवाजाही के दौरान धूल-मिट्टी उड़ने की आशंका है। ठेले लगाने वाले स्थान पर पानी भरा है और मैदान में गड्ढे बने हुए हैं। इससे मेले में आने वाले लोगों को परेशानी उठानी पड़ सकती है। आयोजकों ने सवाल उठाया कि जब हजारों लोगों के जुटने की जानकारी पहले से है और अनुमति की प्रक्रिया भी हर साल पूरी होती है, तो बुनियादी सुविधाओं के इंतजाम समय रहते क्यों नहीं किए गए?
भमोला मरघट से शुरू होकर वहीं होगा रावण दहन
मेले का जुलूस भमोला मरघट (पथवारी) से शुरू होकर नगला भुंडा और बरौला पुल के नीचे से गुजरेगा। इसके बाद वापस भमोला मरघट पहुंचकर रावण दहन के साथ आयोजन संपन्न होगा। आयोजकों ने प्रशासन से मांग की है कि मैदान में मिट्टी डलवाकर गड्ढे भरवाए जाएं, जलभराव दूर हो, रास्तों पर रोशनी की व्यवस्था की जाए और भीड़ को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया जाए। उन्होंने फ्लैग मार्च समेत जरूरी सुरक्षा इंतजाम कराने की भी मांग की है।
स्थानीय लोगों के सामूहिक सहयोग से आयोजित हो रहा यह मेला शहर की गंगा-जमुनी तहजीब की भी मिसाल है। अब सवाल यह है कि हजारों लोगों की मौजूदगी वाले इस आयोजन से पहले जिम्मेदार विभाग व्यवस्थाएं दुरुस्त कराते हैं या हर बार की तरह आयोजकों और श्रद्धालुओं को ही अव्यवस्थाओं से जूझना पड़ेगा।
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