BHU ट्रामा सेंटर में गलत सर्जरी की जांच शुरू:मानवाधिकार आयोग निर्देश पर CMO ने बनाई जांच कमेटी, 7 मार्च को हुई थी सर्जरी

Oct 07, 2026 - 07:24
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BHU ट्रामा सेंटर में गलत सर्जरी की जांच शुरू:मानवाधिकार आयोग निर्देश पर CMO ने बनाई जांच कमेटी, 7 मार्च को हुई थी सर्जरी
बीएचयू ट्रामा सेंटर में 7 मार्च 2026 को न्यूरो सर्जरी के मरीज के जांघ में चीरा लगाने का मामला सामने आया था। जिसके बाद हड़कंप मचा था और कई तरीके की जांच के बाद अभी भी इस मामले में इंटरनल कार्रवाई चल रही है। इसी बीच मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर सीएमओ डॉ एनपी सिंह ने टीम गठित कर एक बार फिर इस मामले की जांच शुरू की है। मानवाधिकार आयोग ने डीएम को भी जांच के लिए पत्र लिखा है। बता दें की आईएमएस बीएचयू ने जांच करवाकर मानवाधिकार आयोग को भेजी थी। पर इसपर आयोग ने आपत्ति जताई है और डीएम और सीएमओ से इसमें नए सिरे से जांच करवा कर रिपोर्ट तलब किया है। बता दें की इस ऑपरेशन के कुछ ही दिन बाद ही महिला की मौत हो गई थी और परिजनों ने इसकी शिकायत दर्ज कराई थी। जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश 7 मार्च को बीएचयू ट्रामा सेंटर में एडमिट महिला जो की न्यूरो की पेशेंट थी। उसे ऑपरेशन थियेटर में ले जाकर जांघ का ऑपरेशन कर दिया गया था। सीएमओ डॉ एनपी सिंह ने बताया - मानवाधिकार आयोग की तरफ से निर्देश दिया गया है कि एक टीम गठित कर इस मामले की नए सिरे से जांच की जाए। साथ ही इस सर्जरी की गड़बड़ी से जुड़े इलाज और जांच संबंधी कागजात की भी जांच कराई जाए। अब जानिए क्या था पूरा प्रकरण… आईएमएस बीएचयू के डॉक्टर्स ने ट्रॉमा सेंटर में स्पाइनल कॉर्ड ट्यूमर पीड़ित महिला राधिका देवी (71) की जांघ का ऑपरेशन कर दिया। हुआ यूं कि राधिका नाम की दो मरीज ट्रॉमा सेंटर में भर्ती हुई थीं। एक स्पाइनल कॉर्ड में ट्यूमर से पीड़ित थी। दूसरे के पैर में फ्रैक्चर था। सात मार्च को फ्रैक्चर का ऑपरेशन करने ट्यूमर के मरीज को ओटी में ले गए। जब पैर की सर्जरी के दौरान फ्रैक्चर नहीं मिला तो ओटी में डॉक्टरों को शक हुआ कि गलत मरीज का ऑपरेशन कर रहे हैं। हड़बड़ी में उसके पैर को सिलकर बाहर भेज दिया। बाद में अट्ठारह मार्च को उसकी न्यूरो सर्जरी भी की। 27 मार्च को महिला की अस्पताल में मौत हो गई। परिजनों ने कुलपति से की शिकायत महिला बलिया की रहने वाली थी। महिला के पोते मृत्युंजय पाल ने मामले की शिकायत बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी और आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन संखवार से की। कुलपति ने रिपोर्ट तलब की तो लापरवाही सामने आ गई। यही नहीं निदेशक की तरफ से मामले की जांच में भी लापरवाही बरती गई। जिस डॉक्टर अमित रस्तोगी की टीम की लापरवाही से महिला की मौत हुई थी उसी डॉ. अमित रस्तोगी को जांच कमेटी का अध्यक्ष बना दिया गया। हालांकि मामला सामने आया तो जांच अधिकारी को बदल दिया। बलिया निवासी राधिका देवी (71) को स्पाइलन कॉर्ड ट्यूमर की समस्या थी। राधिका के पोते मृत्युंजय पाल उन्हें 25 फरवरी को ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंचे थे। उन्होंने न्यूरो सर्जरी में डॉ. अनुराग साहू को दिखाया, तो उन्होंने भर्ती कर लिया। जांच के बाद 7 मार्च को सर्जरी की तारीख तय की गई। मृत्युंजय पाल ने एक अप्रैल 2026 को आईएमएस के निदेशक से जो शिकायत दर्ज कराई है उसके मुताबिक दादी को स्पाइनल ट्यूमर की समस्या थी। न्यूरो सर्जरी की टीम को ऑपरेशन करना था लेकिन आर्थो के डॉक्टरों की टीम दादी को ऑपरेशन थियेटर में लेकर गई।

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