BJP विधायल बोले-अखिलेश शहर पश्चिमी से मुस्लिम प्रत्याशी देंगे:सिद्धार्थ नाथ ने कहा मेरी विधानसभा में मुसलमानों की बड़ी संख्या, वो सवाल पूछ रहे

Oct 21, 2026 - 06:24
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BJP विधायल बोले-अखिलेश शहर पश्चिमी से मुस्लिम प्रत्याशी देंगे:सिद्धार्थ नाथ ने कहा मेरी विधानसभा में मुसलमानों की बड़ी संख्या, वो सवाल पूछ रहे
प्रयागराज में शहर पश्चिमी के बीजेपी विधायक सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव यह कहते हैं 'जिसकी जितनी हिस्सेदारी, उतनी उनकी संख्या होनी चाहिए, उसकी भागीदारी होनी चाहिए'। तो क्या अखिलेश यादव शहर पश्चिमी से किसी मुस्लिम को टिकट देंगे। सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि मैं सच बोलूं, तो मेरी विधानसभा (शहर पश्चिमी) में बहुत बड़ी संख्या है मुस्लिमों की। और हर मुस्लिम अब पूछ रहा है कि शहर पश्चिमी से क्या अखिलेश यादव मुसलमान टिकट देंगे कैंडिडेट बनाएंगे। उन्होंने कहा कि अखिलेश मुसलमानों को टिकट ही नहीं देना चाहते। उनको इस बात का जवाब देना होगा। असल में भाजपा विधायक से असदउ्दीन ओवैसी को लेकर सवाल हुआ। रामपुर में ओवैसी ने जो कहा उसके बारे में सिद्धार्थ नाथ ने कहा कि मैं ओवैसी की पैरवी नहीं कर रहा हूं, न उनकी बातों से सहमत हूं। मगर सुनने में आ रहा है कि अखिलेश यादव मुसलमानों को टिकट ही नहीं देना चाहते! क्योंकि उन्होंने मान के रखा हुआ है कि यह कहीं जा ही नहीं सकते। मुसलमान भाजपा को तो वोट देंगे नहीं, तो हमें ही देंगे इसलिए उनको टिकट देना नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि अखिलेश बोलते हैं हम जातीय समीकरण करेंगे। अब चुनाव क्या जाति के नाम पर लड़ना चाहिए? भारतीय जनता पार्टी कहती है कि आप गणित करते हो। हम केमिस्ट्री बनाते हैं जनता से। यही तो अंतर है। विधायक ने असम के सीएम का समर्थन किया सिद्धार्थ नाथ ने कहा कि असम के मुख्यमंत्री जो कहा वह सही बात है। हम लोग भगवान राम तो आराध्य हैं पूरे भारत के लिए। हर धर्म के लिए, हर जाति के लिए लेकिन बाबर कौन है? वह तो मुगलों का सरदार था, बाहर से आया था और आक्रांता था। तो उसके नाम पर आप लड़ते हैं। आपको तो बाबरी मस्जिद पसंद है। हम लोगों को जो पसंद है, वह भगवान राम हैं। राम का मंदिर होना चाहिए भगवान राम का। आपने तो राम भक्तों पर गोली भी चलाई। मुख्यमंत्री ने जो कहा वह सही कहा अखिलेश यादव के बारे में। हिंदू हारा तो अतीक, मुख्तार और आजम खां आएंगे प्रयागराज की शहर पश्चिमी सीट से भाजपा विधायक सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कसारी-मसारी का नाम बदलने के मुद्दे पर हिंदू वोटों की एकजुटता को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि हिंदू बंटे तो फिर अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और आजम खान जैसे लोगों का दौर लौट सकता है। उनके मुताबिक, वोट बंटने से भाजपा सीटें हारती है और श्रीकृष्ण पुरी का नाम फिर कसारी-मसारी हो सकता है। विधायक के इस बयान से इलाके के नाम परिवर्तन का मुद्दा हिंदू वोट बैंक और मुस्लिम मतदाताओं को लेकर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। उनका बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। सपा और कांग्रेस नेताओं ने इसका विरोध किया है। ‘हिंदू बंटे तो फिर कसारी-मसारी हो जाएगा’ सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि देशभर में, खासकर उत्तर प्रदेश में, हिंदुओं को बांटने का प्रयास हो रहा है। उन्होंने कहा कि जब हिंदुओं के वोट बंटते हैं तो भाजपा सीटें हारती है। इसके बाद हिंदुओं का हक छीना जाता है और समाजवादी पार्टी का वर्चस्व बढ़ता है। उन्होंने अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और आजम खान का जिक्र करते हुए माफियागिरी, गुंडागर्दी और अराजकता लौटने की आशंका जताई। विधायक ने प्रधानमंत्री के कथन ‘एक रहोगे तो श्रेष्ठ रहोगे’ और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कथन ‘बंटोगे तो कटोगे’ का हवाला देते हुए हिंदुओं से एकजुट रहने की अपील की। 70 से 80 प्रतिशत हिंदुओं से भाजपा को वोट देने की अपील इससे पहले दुर्गा पूजा पंडाल में दिए बयान में सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा था कि 70 से 80 प्रतिशत हिंदुओं को एकजुट होकर भाजपा को वोट देना होगा, वरना कसारी-मसारी का नाम फिर लौट सकता है। वायरल वीडियो में वह शहर पश्चिमी विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 1 लाख 21 हजार और बाकी मतदाताओं की संख्या 2 लाख 40 हजार बताते सुनाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि उनके पक्ष के 70 से 80 प्रतिशत लोग मतदान नहीं करेंगे तो श्रीकृष्ण पुरी का नाम फिर कसारी-मसारी हो सकता है। हालांकि, वीडियो में बताए गए मतदाताओं के आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। योगी ने किया था श्रीकृष्ण पुरी नाम रखने का ऐलान प्रयागराज का कसारी-मसारी इलाका माफिया अतीक अहमद और उसके गिरोह से जुड़े लोगों के कारण भी चर्चा में रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 15 अक्टूबर 2026 को कसारी-मसारी का नाम बदलकर श्रीकृष्ण पुरी करने का ऐलान किया था। यह घोषणा पूर्व कैबिनेट मंत्री और शहर पश्चिमी के विधायक सिद्धार्थ नाथ सिंह की मांग पर की गई थी। नाम बदलने के ऐलान के बाद से ही इस मुद्दे पर समर्थन और विरोध जारी है। अब विधायक के बयानों ने इसे वोटों के ध्रुवीकरण और हिंदू-मुस्लिम राजनीति से जोड़ दिया है।

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