बलरामपुर में दुष्कर्म के मामले में तीन दोषियों को सजा:दो सहयोगियों को भी 5-5 साल का कारावास, कुल 20 हजार रुपये का जुर्माना
बलरामपुर में किशोरी को बहला-फुसलाकर भगाने और दुष्कर्म के मामले में बलरामपुर की पॉक्सो अदालत ने तीन दोषियों को सजा सुनाई है। मुख्य दोषी हलीम को 10 साल के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई है। वहीं, उसके दो सहयोगियों सहजाद और शीबू को पांच-पांच साल के कारावास और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया गया है। मामला 15 मई 2018 का है। पीड़िता के पिता ने कोतवाली नगर में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि हलीम पुत्र चांद अली ने अपने दो सहयोगियों सहजाद पुत्र खुर्शीद और शीबू पुत्र अय्यूब, निवासी मेड़ई लाल पुरवा, थाना कोतवाली देहात, बलरामपुर के साथ मिलकर उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर भगा लिया और उसके साथ दुष्कर्म किया। विवेचना के बाद दाखिल किया आरोपपत्र शिकायत के आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। मामले की विवेचना उपनिरीक्षक सभाजीत सिंह ने की। जांच पूरी होने के बाद आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। पॉक्सो कोर्ट ने सुनाई सजा मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो कोर्ट, बलरामपुर में हुई। शुक्रवार को अदालत ने मुख्य दोषी हलीम को 10 साल के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं, सहजाद और शीबू को पांच-पांच साल के कारावास और पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। ऑपरेशन कनविक्शन के तहत हुई पैरवी पुलिस के मुताबिक, मॉनिटरिंग सेल के नोडल प्रभारी एवं अपर पुलिस अधीक्षक विशाल पाण्डेय के नेतृत्व में मामले में प्रभावी पैरवी की गई। जिला शासकीय अधिवक्ता पवन कुमार शुक्ला, मॉनिटरिंग सेल प्रभारी देवेंद्र कुमार मिश्र और कोतवाली नगर पुलिस ने अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी की। एसपी मार्तण्ड प्रकाश सिंह के निर्देश पर ऑपरेशन कनविक्शन अभियान के तहत मामले में लगातार प्रभावी पैरवी की गई। पुलिस ने बताया कि इसी के परिणामस्वरूप तीनों दोषियों को सजा सुनाई गई।
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