बरेली में धान की फसल खेतों में बिछी:पानी में डूबे अरमान, बारिश से खेत तालाब बने, मक्का-अरहर भी चपेट में

Sep 27, 2026 - 12:52
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बरेली में धान की फसल खेतों में बिछी:पानी में डूबे अरमान, बारिश से खेत तालाब बने, मक्का-अरहर भी चपेट में
लगातार हो रही बारिश अब किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। शुक्रवार से शुरू हुआ बारिश का सिलसिला रविवार को भी जारी रहा। लगातार बारिश का आज तीसरा दिन है। बारिश का सबसे ज्यादा असर खेतों पर पड़ा है। धान की तैयार होती फसल खेतों में बिछ गई है। कई खेतों में पानी भरने से पौधे डूब गए हैं। धान के साथ मक्का और अरहर की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। खेतों में खड़ी धान की फसल बिछी बरेली सदर, फरीदपुर, मीरगंज, बहेड़ी, नवाबगंज, आंवला समेत जिले के कई ग्रामीण इलाकों में खेतों में पानी भर गया है। धान की फसल इस समय कई जगह दाने बनने और पकने की अवस्था में है। लगातार पानी और तेज बारिश से फसल जमीन पर गिर गई है। खेतों में पानी भरा रहने से धान के सड़ने और गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका भी बढ़ गई है। मक्का और अरहर को भी नुकसान बारिश का असर सिर्फ धान तक सीमित नहीं है। मक्का और अरहर के खेतों में भी पानी भर गया है। निचले इलाकों के खेतों में जलभराव ज्यादा होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। लगातार बारिश जारी रहने पर नुकसान और बढ़ने की आशंका है। कर्ज लेकर बोई थी फसल, अब नुकसान की चिंता किसानों का कहना है कि उन्होंने कर्ज लेकर खरीफ की फसल तैयार की थी। उम्मीद थी कि धान की अच्छी पैदावार होगी तो परिवार की जरूरतें पूरी होंगी। कई किसानों ने बेटी की शादी और दूसरी घरेलू जरूरतों के लिए फसल से मिलने वाली आमदनी पर भरोसा किया था। अब खेतों में पानी भरने और फसल गिरने से उनकी चिंता बढ़ गई है। सितंबर में दो बार भारी बारिश बरेली में इस महीने बारिश के दो बड़े दौर देखने को मिले हैं। 7 सितंबर को 24 घंटे में करीब 381 मिमी बारिश दर्ज हुई थी, जो सितंबर में एक दिन की बारिश का नया रिकॉर्ड बताया गया। इससे पहले सितंबर 2005 में 267 मिमी बारिश का रिकॉर्ड था। अब 25-26 सितंबर के दौर में भी 145 मिमी (शनिवार सुबह 8 बजे तक के आंकड़ा) बारिश दर्ज की गई है। 27 सितंबर तक भारी बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने बरेली में 26 और 27 सितंबर को भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट दिया है। 25 से 27 सितंबर के दौरान तेज हवा और गरज-चमक के साथ बारिश की चेतावनी भी जारी की गई है। ऐसे में खेतों में पहले से भरे पानी के कारण किसानों की चिंता और बढ़ गई है।

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