बृजभूषण बोले-आंदोलन हो नहीं रहा, कराया जा रहा:न्यायपालिका को दबाव में लेना चाहते, विदेशी फंडिंग के सहारे देश को अस्थिर करने की तैयारी
गोंडा के कैसरगंज के पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने सोमवार सुबह 11 बजे अपने पैतृक आवास विश्नोहरपुर में जनता दर्शन का आयोजन किया। इस दौरान उन्होंने कई जिलों से आए लोगों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को उनके समाधान के निर्देश दिए। जनता दर्शन के बाद उन्होंने CJP के प्रदर्शन, विपक्षी सांसदों की मुख्य न्यायाधीश (CJI) से मुलाकात नहीं होने और राहुल गांधी के प्रदर्शन को लेकर बयान दिया। बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि देश में पहले भी प्रदर्शन होते रहे हैं और आगे भी होते रहेंगे, लेकिन सवाल यह है कि प्रदर्शन किस मुद्दे पर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष जनता की समस्याओं को लेकर प्रदर्शन नहीं कर रहा, बल्कि चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निशाना बना रहा है। उन्होंने कहा, “जब आप चुनाव जीत जाते हैं, तब आपके लिए चुनाव आयोग अच्छा होता है, लेकिन जब हार जाते हैं तो वही आयोग खराब हो जाता है। अमित शाह देश के गृहमंत्री हैं। वह चुनाव लड़कर और जीतकर आए हैं। देश में जब कैबिनेट बनी, तो उन्हें गृहमंत्री बनाया गया। वह आपके रहमोकरम पर नहीं बने हैं।” ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति पर सवाल उठाने वालों से उन्होंने पूछा कि केपीएस गिल की नियुक्ति किस कानून के तहत हुई थी और नवीन चावला की नियुक्ति किस आधार पर की गई थी। कानून का उल्लंघन होता है तो सुप्रीम कोर्ट अंतिम रास्ता चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया पर बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि इसमें प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और एक नामित सदस्य के रूप में गृहमंत्री शामिल हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 से पहले देश में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए कोई निर्धारित प्रक्रिया नहीं थी। इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ले जाया गया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर संसद ने नियुक्ति की प्रक्रिया बनाई और उसी के तहत ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति हुई। उन्होंने कहा कि यदि ज्ञानेश कुमार विपक्ष को पसंद नहीं हैं, तो इसके लिए किसी दूसरे को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। यदि विपक्ष के पास कोई सबूत या साक्ष्य है, तो उसे सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए। कहीं कानून का उल्लंघन होता है, तो सुप्रीम कोर्ट ही अंतिम रास्ता है। राहुल गांधी के प्रदर्शन की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि राहुल गांधी लंबे समय से चुनाव आयोग को लेकर आरोप लगा रहे हैं, लेकिन मौजूदा आंदोलन के समय पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा, “राहुल जी, यह राग आप बहुत दिन से अलाप रहे हैं, लेकिन टाइमिंग देखिए। एक उद्योगपति का बयान आता है और वह उसे ट्वीट करता है। राहुल जी उसे रीट्वीट करते हैं। यहीं संदेह पैदा हो जाता है कि आंदोलन किया नहीं जा रहा, बल्कि कराया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि दो दिन पहले कॉकरोच नाम के जीव भी इस बार नहीं आ पाए। उन्होंने इस संदर्भ में भी आंदोलन कराए जाने की आशंका जताई। बृजभूषण ने आरोप लगाया कि दिल्ली में प्रदर्शन के कारण जनजीवन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि व्यापारी, पढ़ने वाले बच्चे, नौकरीपेशा लोग और आने-जाने वाले लोग परेशान हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि दिल्ली से 10 से 20 किलोमीटर दूर कोई मैदान निर्धारित कर दिया जाए, जहां लोग धरना-प्रदर्शन कर सकें। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर किसी को भी धरना-प्रदर्शन नहीं करना चाहिए। न्यायपालिका पर दबाव बनाने का लगाया आरोप विपक्षी सांसदों की CJI से मुलाकात नहीं होने के सवाल पर बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि यह देश में एक अलग तरह की घटना है कि आंदोलनकारी मुख्य न्यायाधीश से मिलना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति से भी मिलना चाहते थे और राष्ट्रपति ने उनसे मुलाकात कर उनकी बात सुनी। उन्होंने आरोप लगाया कि अब प्रदर्शनकारी सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों से भी मिलना चाहते हैं और उन्हें प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके मुताबिक, विपक्ष निष्पक्ष न्यायपालिका पर भी दबाव बनाने का प्रयास कर रहा है। अभिजीत दीपक के बयान को गंभीरता से नहीं लेते CJP के अभिजीत दीपक के बयान पर बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि वह दिल्ली पुलिस और अभिजीत दीपक के बयानों पर प्रतिक्रिया नहीं देना चाहते और उन्हें गंभीरता से नहीं लेते। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशी फंडिंग के सहारे देश को अस्थिर करने की तैयारी की जा रही है और इसी वजह से आंदोलन कराया जा रहा है। वहीं, असदुद्दीन ओवैसी की ओर से वोट चोरी को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर उन्होंने कहा कि जिसके पास सबूत हैं, वह उन्हें लेकर सुप्रीम कोर्ट जाए। राहुल गांधी के राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान सबूत नहीं ले जाने और बाद में देने की बात कहने पर बृजभूषण ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति से बड़ा तो कोई होता नहीं। प्रधानमंत्री जी को तो आप प्रधानमंत्री मानने को तैयार नहीं हैं। राष्ट्रपति से बड़ा कोई नहीं होता। अब जो सबूत आपके पास हैं, वे राष्ट्रपति को दीजिए। जब मिलने गए थे, तो सबूत लेकर क्यों नहीं गए? इनके पास कुछ है नहीं।” बोले- हमने देखा है कि चुनाव कैसे होते थे चुनाव आयोग पर विपक्ष के आरोपों को लेकर बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि जब विपक्ष चुनाव जीतता है, तो उसे आयोग की व्यवस्था ठीक लगती है, लेकिन हारने पर अपनी हार छिपाने और जनता को भ्रमित करने के लिए सारा दोष चुनाव आयोग पर डाल देता है। उन्होंने बिहार, बंगाल और पुराने चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष लगातार चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है। राहुल गांधी के उस बयान पर कि चुनाव आयोग के कार्यालय का नाम बदलकर भाजपा कार्यालय कर देना चाहिए, बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि उन्होंने नवीन चावला और केपीएस गिल के कार्यकाल में भी चुनाव होते देखे हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी मतदाता का नाम तीन जगह दर्ज है और अब उसे एक जगह कर दिया गया है, तो इसमें क्या परेशानी है? यदि किसी का नाम मतदाता सूची से कट गया है, तो उसे न्यायालय जाना चाहिए।
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