बसपा के प्रचार अभियान को धार देंगे आकाश:यूपी की 5 सीटों के साथ पंजाब और उत्तराखंड में भी करेंगे रैली, मायावती ने मैदान में उतारा

Oct 16, 2026 - 17:19
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बसपा के प्रचार अभियान को धार देंगे आकाश:यूपी की 5 सीटों के साथ पंजाब और उत्तराखंड में भी करेंगे रैली, मायावती ने मैदान में उतारा
बसपा में चौथी बार वापसी के बाद आकाश आनंद एक बार फिर चुनावी मैदान में उतरने जा रहे हैं। पार्टी प्रमुख मायावती ने उन्हें उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड में जनसभाओं की जिम्मेदारी सौंपी है। अगले दो महीने में आकाश की 7 सभाएं प्रस्तावित हैं। इसके अलावा कई विधानसभा क्षेत्रों के प्रत्याशी भी अपने यहां उनकी सभा कराने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आकाश आनंद की सक्रियता बढ़ने के संकेत हैं। बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद का कार्यक्रम पार्टी के केंद्रीय कार्यालय की ओर से जारी किया गया है। इसके मुताबिक, 28 अक्टूबर को बुलंदशहर के अनूपशहर, 2 नवंबर को सहारनपुर के नकुड़, 20 नवंबर को अयोध्या के बीकापुर, 22 नवंबर को आगरा और 29 नवंबर को कानपुर के बिल्हौर में जनसभा होगी। इसके अलावा 26 नवंबर को पंजाब और 6 दिसंबर को उत्तराखंड के हरिद्वार में सभा प्रस्तावित है। पंजाब में सभा का स्थान अभी तय नहीं हुआ है। मायावती ने फिर जताया भरोसा आकाश आनंद को पार्टी में वापस लेने के बाद मायावती ने उन्हें राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी दी थी। इससे पहले उन्हें पार्टी से बाहर किया गया था। वापसी के बाद 9 अक्टूबर को कांशीराम की पुण्यतिथि के कार्यक्रम में भी आकाश आनंद मायावती के साथ नजर आए। इस दौरान उन्होंने मायावती के प्रति सम्मान जताया। अब लगातार जनसभाओं का कार्यक्रम तय होने से संकेत मिल रहे हैं कि मायावती 2027 के चुनाव में आकाश आनंद को अहम भूमिका देने की तैयारी कर रही हैं। पार्टी के भीतर उनके समर्थकों और विरोधियों के बीच लंबे समय से चल रही चर्चा के बीच यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पहले भी कर चुके हैं चुनावी सभाएं पार्टी से फिर बाहर किए जाने से पहले आकाश आनंद ने हाथरस के सादाबाद और नोएडा में जनसभाएं की थीं। सादाबाद की सभा को लेकर देशभर में चर्चा हुई थी। अब पार्टी में वापसी के बाद उन्हें फिर से अलग-अलग क्षेत्रों में भेजने की तैयारी है। बसपा में प्रत्याशियों की ओर से आकाश आनंद की सभाओं की मांग भी सामने आ रही है। पार्टी का प्रयास है कि उनकी सभाओं के जरिए कार्यकर्ताओं में सक्रियता बढ़े और चुनाव से पहले जनसंपर्क मजबूत हो। दलित वोट के साथ दूसरे समाजों पर भी नजर 2027 के चुनाव से पहले बसपा के सामने अपने पारंपरिक दलित जनाधार को मजबूत रखने के साथ दूसरे सामाजिक वर्गों में समर्थन बढ़ाने की चुनौती है। अनूपशहर, नकुड़, बीकापुर, आगरा और बिल्हौर में प्रस्तावित सभाएं इसी लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। पार्टी इन कार्यक्रमों के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर सकती है। पश्चिमी यूपी में सैनी समाज के मतदाताओं और अन्य पिछड़े वर्गों तक पहुंच बनाना भी बसपा की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। वहीं, पंजाब और उत्तराखंड में सभाएं रखकर पार्टी दूसरे राज्यों में भी संगठन को सक्रिय करने की कोशिश कर रही है। 6 दिसंबर की सभा के भी सियासी मायने आकाश आनंद की आखिरी प्रस्तावित सभा 6 दिसंबर को हरिद्वार में होगी। यह दिन डॉ. भीमराव आंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है। बसपा के लिए यह तारीख वैचारिक और संगठनात्मक रूप से महत्वपूर्ण है। ऐसे में हरिद्वार की सभा में आंबेडकरवादी विचारधारा, सामाजिक न्याय और संगठन को मजबूत करने के मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं। इधर, आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद की पार्टी ने भी 26 नवंबर को संविधान दिवस पर लखनऊ के रमाबाई आंबेडकर मैदान में कार्यक्रम प्रस्तावित किया है। दलित राजनीति में अलग-अलग दलों की बढ़ती सक्रियता के बीच बसपा के कार्यक्रमों पर भी नजर रहेगी। मायावती ने आकाश को कब-कब जिम्मेदारी दी और कब हटाया? जानिए 10 दिसंबर 2023- मायावती ने यूपी-उत्तराखंड के नेताओं की बैठक बुलाई। इसमें अपने सबसे छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे आकाश को उत्तराधिकारी घोषित किया। 7 मई 2024 को आकाश की गलतबयानी की वजह से मायावती ने उनसे सभी जिम्मेदारियां छीन लीं। आकाश को उत्तराधिकारी पद के साथ ही नेशनल कोऑर्डिनेटर पद से हटा दिया। मायावती ने कहा कि आकाश अभी अपरिपक्व हैं। 47 दिन बाद मायावती ने अपना फैसला पलट दिया। 23 जून, 2024 को फिर से उत्तराधिकारी बनाया और नेशनल कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी सौंपी, लेकिन 2 मार्च, 2025 को उनसे फिर सारी जिम्मेदारियां छीन लीं। 3 मार्च, 2025- मायावती ने आकाश को पार्टी से बाहर कर दिया। कहा- आकाश को पश्चाताप करके अपनी परिपक्वता दिखानी थी। लेकिन वो अपने ससुर के प्रभाव में स्वार्थी, अहंकारी हो गए। 13 अप्रैल, 2026- मायावती ने आकाश को माफ कर दिया। कहा था- आकाश को उत्तराधिकारी नहीं बनाऊंगी। 3 महीने यानी 18 मई को आकाश को मायावती ने दोबारा से चीफ नेशनल को-ऑर्डिनेटर बनाया। कहा- आकाश को दूसरा मौका दिया जा रहा है। 29 अगस्त को पार्टी में राष्ट्रीय संयोजक का नया पद बनाकर आकाश को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी थी। 3 सितंबर- मायावती ने राष्ट्रीय संयोजक पद से आकाश को हटाया था। कहा- उन्हें अभी और अधिक मैच्योर होने की जरूरत है। 9 सितंबर- आकाश आनंद को दोबारा जिम्मेदारियां सौंपने के लिए आकाश के ससुर के राजनीतिक जीवन से संन्यास लेने की शर्त रखी। 10 सितंबर- मायावती ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया था। कुछ घंटों बाद आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास का ऐलान कर दिया था। 26 मार्च 2023 को अशोक सिद्धार्थ की बेटी प्रज्ञा से आकाश आनंद की शादी हुई थी। इसमें मायावती भी शामिल हुईं थीं। -फाइल फोटो अब मायावती के हालिया फैसलों के बारे में पढ़िए 6 सितंबर: आकाश को हटाने के बाद मायावती ने भतीजे ईशान को 19 राज्यों में संगठन की समीक्षा की जिम्मेदारी दी। 13 सितंबर: मायावती ने ऐलान किया कि आकाश ही नहीं, बल्कि ईशान को भी पार्टी में कोई पद नहीं दिया जाएगा। भतीजी दीपिका आनंद को पार्टी में आगे बढ़ाने के संकेत दिए थे। आकाश ने 2017 में राजनीति में की थी एंट्री​​ 2017 में आकाश आनंद सहारनपुर की जनसभा में मायावती के साथ दिखे थे। इसके बाद वह लगातार पार्टी का काम कर रहे थे। 2019 में उन्हें नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाया गया। इसके बाद बसपा-सपा का गठबंधन टूट गया। उस वक्त यह बात सामने आई थी कि आकाश के कहने पर ही मायावती ने गठबंधन तोड़ा। 2022 के हिमाचल विधानसभा चुनाव में पहली बार आकाश आनंद का नाम स्टार प्रचारकों की लिस्ट में आया था। आकाश ने लंदन से मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) की पढ़ाई की है।

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