चौ.चरण सिंह के गांव से चुनाव की शुरुआत करेंगे मोदी:किसानों का मुद्दा उठाएंगे; क्या वेस्ट यूपी की 126 सीटों पर माहौल बनेगा
प्रधानमंत्री मोदी एक बार फिर यूपी चुनाव का माहौल वेस्ट यूपी से सेट करेंगे। इसकी शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के गांव नूरपुर (हापुड़) से होगी। भाजपा-रालोद चौधरी चरण सिंह की जयंती पर बड़ी जनसभा करेंगे। NDA गठबंधन किसान, जाट-गुर्जर समीकरण और चौधरी चरण सिंह की विरासत को एक मंच पर लाने की कोशिश करेगा। सियासी संदेश साफ है- पश्चिमी यूपी में रालोद-भाजपा के साथ सारे समुदाय हैं। अखिलेश यादव का PDA समीकरण फेल है। पिछले विधानसभा चुनाव में रालोद भाजपा के साथ गठबंधन में नहीं थी। सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ते हुए 8 सीटें जीती थीं। 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले रालोद NDA गठबंधन का हिस्सा बन गई। अब भाजपा वेस्ट यूपी की जाट-गुर्जर बहुल सीटों पर भगवा माहौल बनाने की तैयारी कर रही है। यह पहला मौका नहीं है, जब प्रधानमंत्री ने यूपी चुनाव की शुरुआत वेस्ट यूपी से कर रहे हैं। 2022 के चुनाव में भी पहली वर्चुअल जनसभा सहारनपुर से की थी। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी पहली जनसभा के लिए मेरठ-बुलंदशहर को चुना था। 2027 चुनाव के लिए प्रधानमंत्री 23 दिसंबर को हापुड़ पहुंचेंगे। क्या वेस्ट यूपी की 126 सीटों पर भगवामय माहौल बन सकेगा? पढ़िए रिपोर्ट… 126 सीटों पर जाट-गुर्जर समीकरण साधेंगे पश्चिमी यूपी की करीब 126 विधानसभा सीटें भाजपा-रालोद के लिए अहम मानी जा रही हैं। इस इलाके में जाट और गुर्जर समुदायों का असर कई सीटों पर चुनावी नतीजों को प्रभावित करता है। रालोद गठबंधन के साथ प्रधानमंत्री मोदी की जनसभा एक बड़े पावर शो की तरह होगी। RLD के प्रदेश महासचिव आतिर रिजवी के मुताबिक, 23 दिसंबर के कार्यक्रम के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय से सहमति मिल गई है। जयंत चौधरी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी और पश्चिमी यूपी के नेताओं को भी आमंत्रित किया है। जनसभा कहां होगी? इसके लिए स्थान संगठन तय कर रहा है। इस आयोजन में 2 से ढाई लाख लोग जुटने की संभावना है। सवाल उठ रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी वेस्ट यूपी से ही चुनाव की शुरुआत क्यों कर रहे हैं? इसके जवाब में सियासी जानकार कहते हैं कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पिछले कुछ समय से गुर्जर समुदाय के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। दादरी में गुर्जर सम्राट मिहिर भोज से जुड़े कार्यक्रम और उनकी प्रतिमा का मुद्दा इसी राजनीतिक कवायद का हिस्सा माना जा रहा है। ऐसे में चौधरी चरण सिंह की जयंती पर यह आयोजन पश्चिमी यूपी में भाजपा-RLD के लिए अपने कोर वोटरों को एकजुट रखने की कोशिश होगी। सपा के PDA के मुकाबले NDA की एकजुटता दिखाएंगे जयंत यूपी चुनाव में मोदी की पहली जनसभा कितनी अहम होने जा रही है, इसको लेकर वरिष्ठ पत्रकार सुरेश बहादुर सिंह कहते हैं- भाजपा-RLD की रणनीति के तीन प्रमुख पहलू हैं… पहला- चौधरी चरण सिंह की विरासत के जरिए किसान मतदाताओं तक पहुंच बनाना। यह बताना कि किसानों की समस्याओं का हल सिर्फ भाजपा के पास है। दूसरा- पश्चिमी यूपी में जाट और गुर्जर के बीच भाजपा-रालोद गठबंधन की स्वीकार्यता बनाए रखना। क्योंकि, 108 से 120 सीटों पर जाट-गुर्जर असर रखते हैं। तीसरा- सपा के PDA समीकरण के मुकाबले NDA की एकजुटता दिखाना। हालांकि, NDA गठबंधन के सामने सीटों के बंटवारे, स्थानीय नेताओं की दावेदारी और उम्मीदवारों के चयन जैसी चुनौतियां भी होंगी। दो चुनावों में पश्चिमी यूपी में रालोद कैसे मजबूत हुई 5 दिसंबर, 2022 को मुजफ्फरनगर की खतौली सीट पर उपचुनाव हुए। 8 दिसंबर को नतीजे आए। सपा के समर्थन से रालोद प्रत्याशी मदन भैया ने भाजपा प्रत्याशी राजकुमारी सैनी को 22 हजार से ज्यादा वोटों से हरा दिया। इस जीत के साथ 2022 में विधानसभा में रालोद के विधायकों की संख्या बढ़कर 9 हो गई थी। खतौली सीट पर उपचुनाव भाजपा विधायक विक्रम सिंह सैनी को अयोग्य घोषित किए जाने के कारण हुए थे। 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़े एक मामले में मुजफ्फरनगर की विशेष MP/MLA अदालत ने अक्टूबर- 2022 में विक्रम सैनी को 2 साल के कारावास की सजा सुनाई थी। सपा ने रालोद को मनचाही सीटें नहीं दीं, इसलिए छोड़ा था साथ 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले रालोद ने सपा का साथ छोड़ दिया था। गठबंधन टूटने के पीछे 2 प्रमुख वजहें रहीं- इस ऐतिहासिक फैसले के बाद जयंत चौधरी ने कहा था कि सरकार ने सिर्फ उनके दादा को नहीं दिया, बल्कि करोड़ों किसानों को सम्मान दिया है। उसके बाद वह गठबंधन के लिए मना नहीं कर सके। NDA का हिस्सा बनने के बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में RLD ने बागपत और बिजनौर दोनों सीटों पर जीत दर्ज की। सपा के ‘चवन्नी’ बयान से पश्चिमी यूपी में किसे फायदा पश्चिमी यूपी की राजनीति में यह विवाद अखिलेश यादव के एक महीने पहले दिए गए एक बयान के बाद शुरू हुआ। इसमें उन्होंने जयंत चौधरी पर तंज कसते हुए कहा था- 'चवन्नी से रुपया बना दिया, फिर भी छोड़कर चले गए।' जयंत के खिलाफ इस बयान को रालोद ने पश्चिमी यूपी में राजनीतिक और सामाजिक सम्मान से जोड़कर उठा रही है। जयंत चौधरी भी अखिलेश यादव को जवाब दे चुके हैं। जयंत ने कहा था- हमारी कोशिश रहती है कि कोई दुश्मन न बने। मैंने अखिलेश को छेड़ा भी नहीं, लेकिन वह बार-बार बयान दे रहे हैं। एक महीने पहले सहारनपुर की स्वाभिमान रैली में जयंत ने मंच से सपा नेताओं के वीडियो चलवाए। राजनीतिक तंज कसते हुए कहा कि ABCD की राजनीति छोड़िए। हम आपको G यानी गन्ना और J यानी जाट में फंसा देंगे, फिर SP नहीं आएगी। इस रैली में उनकी पत्नी चारू चौधरी ने भी भाषण दिया था। चारू ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयान पर कहा था- किसी को भी यह अधिकार नहीं कि वो आपका अपमान करे या आपको सिखाए, समझाए। उन्होंने अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा था- इस तरह की बयानबाजी सामने वाले की मानसिकता और अहंकार दिखाती है। लोकतंत्र में सरकार किसकी बनेगी और कौन सत्ता में आएगा-जाएगा, इसका फैसला जनता करती है। अगर रालोद किसानों के बीच सपा के खिलाफ माहौल बनाने में कामयाब होती है, तो भाजपा-रालोद गठबंधन को सीटों का फायदा हो सकता है। ------------------------- यह खबर भी पढ़ें- ओवैसी के टारगेट पर पूर्वांचल की 37 सीटें, 2022 में बिना तैयारी लड़े तो आजमगढ़ में 3% वोट मिले सपा से गठबंधन नहीं होने के बाद अब असदुद्दीन ओवैसी की नजर उन मुस्लिम बहुल सीटों पर है, जो सपा का गढ़ मानी जाती हैं। 11 अक्टूबर को ओवैसी आजमगढ़ में लोगों के बीच रहे। इससे पहले मुरादाबाद में भी जनसभा कर चुके हैं। पढ़िए रिपोर्ट…
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)