चिड़ियाघर में 15 दिन में 4 काले हिरण की मौत:डाक्टर बोले- टैबनिड फ्लाई मक्खी से फैलता है संक्रमण, 2015 में हुई थी मौते

Oct 08, 2026 - 06:37
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चिड़ियाघर में 15 दिन में 4 काले हिरण की मौत:डाक्टर बोले- टैबनिड फ्लाई मक्खी से फैलता है संक्रमण, 2015 में हुई थी मौते
कानपुर चिड़ियाघर में काले हिरणों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। पिछले 15 दिन में 4 काले हिरणों की मौत हो चुकी है। लगातार हो रही मौतों के बाद भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), इज्जतनगर-बरेली के वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम कानपुर जू पहुंची। टीम ने हिरणों के बाड़े का निरीक्षण किया और एक मृत हिरण का पोस्टमार्टम करने के साथ ही सैंपल जांच के लिए बरेली ले गई। विशेषज्ञों ने प्रारंभिक जांच में हीमोप्रोटोजोआ संक्रमण की आशंका जताई है। यह खून में होने वाला संक्रमण है। हालांकि, संक्रमण की वास्तविक वजह और मौत का कारण जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। मक्खी के काटने से फैलता है, संक्रमण कानपुर जू के डॉक्टर मोहम्मद नासिर ने बताया कि टैबनिड फ्लाई (Tabanid fly) मक्खी के जरिए यह संक्रमण एक हिरण से दूसरे हिरण में फैल सकता है। संक्रमित हिरण को काटने के बाद जब यही मक्खी दूसरे हिरण को काटती है तो संक्रमण उसके शरीर में भी पहुंच सकता है। उन्होंने बताया कि खून में संक्रमण पहुंचने के बाद हिरणों में खाना कम करना, मूवमेंट कम होना और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं। हालत बिगड़ने पर हिरण चलते-चलते अचानक गिर सकते हैं और उनकी मौत हो सकती है। 2015 में रायपुर में भी दिखे थे ऐसे लक्षण डॉ. नासिर के मुताबिक, 2015 में रायपुर के नंदन वन में भी काले हिरणों में इसी तरह के लक्षण दिखाई दिए थे। उस समय भी अक्टूबर के आसपास हिरणों की मौत हुई थी। बीमारी की वास्तविक पहचान कई महीने बाद फरवरी में हो सकी थी। कानपुर जू में जांच के लिए आए वैज्ञानिकों ने भी हिरणों में दिखाई दे रहे लक्षणों को रायपुर में हुई घटनाओं से मिलता-जुलता बताया है। इसी को देखते हुए जू प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। 87 हिरणों में से 26 को लगाई वैक्सीन डॉ. नासिर ने बताया कि चिड़ियाघर में कुल 87 काले हिरण मौजूद हैं। संक्रमण को देखते हुए बुधवार को 26 हिरणों को वैक्सीन दी गई है। बाकी हिरणों की भी निगरानी की जा रही है। इसके अलावा हिरणों के बाड़े में साफ-सफाई कराई गई है। संक्रमण और मक्खियों की रोकथाम के लिए चूने और दवाओं का छिड़काव भी कराया गया है। लगातार मौतों के बाद IVRI को लिखा पत्र डॉ. नासिर ने बताया कि पिछले दिनों हिरण चलते-चलते अचानक गिर रहे थे और कुछ ही देर में उनकी मौत हो जा रही थी। चिड़ियाघर के डॉक्टर नासिर और कटियार हिरणों का इलाज कर रहे थे, लेकिन लगातार मौतों के बाद जू प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए IVRI बरेली के विशेषज्ञों से जांच कराने का फैसला लिया। जू डायरेक्टर की ओर से IVRI को पत्र भेजा गया था। इसके बाद मंगलवार को विशेषज्ञों की टीम कानपुर चिड़ियाघर पहुंची। टीम में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एम. करीकलन, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश कुमार और तकनीशियन आदर्श कुमार शामिल रहे। टीम ने सबसे पहले काले हिरणों के बाड़े का निरीक्षण किया। इसके बाद एक मृत हिरण का पोस्टमार्टम किया गया और उसके विसरा समेत अन्य सैंपल जांच के लिए बरेली ले जाए गए। डेढ़ साल से स्थायी पशु चिकित्सा अधिकारी नहीं कानपुर चिड़ियाघर में करीब डेढ़ साल से स्थायी पशु चिकित्सा अधिकारी नहीं है। फिलहाल संविदा डॉक्टरों के भरोसे वन्यजीवों की देखरेख की जा रही है। ऐसे में वन्यजीवों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, समय पर उपचार, वैक्सीनेशन और बाड़ों की साफ-सफाई को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। हालांकि, काले हिरणों की मौत की वास्तविक वजह IVRI की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा।

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